पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 27 / 31
1 शमूएल 27
1तब दाऊद ने अपने मन में सोचा, “अब मैं किसी दिन शाऊल के हाथों नष्ट हो जाऊंगा। अतः मेरे लिए यही अच्छा है कि मैं पलिश्तियों के देश में चला जाऊ। तब शाऊल इस्राएल के सब क्षेत्रों में मुझे खोजते-खोजते हताश हो जाएगा, और मैं उसके हाथ से बच निकलूंगा।”
2तब दाऊद उठा और अपने छः सौ साथी लेकर गत के राजा माओक के पुत्र आकीश, के पास चला गया।
3तब दाऊद और उसके सब साथी अपने-अपने घराने के साथ गत में आकीश के पास रहने लगे। दाऊद अपनी दोनों पत्नियों अर्थात् यिज्रेली अहीनोअम तथा नाबाल की विधवा कर्मेली अबीगैल, के साथ वहां रहने लगा।
4यह बात शाऊल को बता दी गई कि दाऊद गत को भाग गया है। इसलिए उसने उसे फिर कभी न ढूंढा।
5तब दाऊद ने आकीश से कहा, “यदि तेरी कृपादृष्टि मुझ पर हुई है तो मुझे देश के किसी नगर में स्थान दिला दे कि मैं वहां रहूं; तेरा दास तेरे साथ राजधानी में क्यों रहे?
6अतः आकीश ने उस दिन उसे सिकलग नगर दे दिया। इसीलिए सिकलग आज तक यहूदा के राजा के अधिकार में बना है।
7इस प्रकार दाऊद एक वर्ष चार महीनों तक पलिश्तियों के देश में रहा।
8दाऊद ने अपने साथियों के साथ जाकर गशूरियों, गिर्जियों और अमालेकियों पर आक्रमण किया। ये जातियां तो प्राचीनकाल से उस क्षेत्र में निवास करती थीं जो शूर के मार्ग से मिस्र तक फैला था।
9दाऊद ने इस देश पर आक्रमण किया, और पुरुष, व स्त्री किसी को भी जीवित न छोड़ा। उसने भेड़-बकरियां, गाय-बैल, गदहे-गदहियां, ऊंट-ऊंटनियां और कपड़े-लत्ते सब लूट लिए। फिर वह लौटकर आकीश के पास आया
10तब अकीश ने पूछा, “आज तू ने कहां आक्रमण किया?” दाऊद ने उत्तर दिया, “यहूदा के नेगेव, यरहमेलियो के नेगेव तथा केनियों के नेगेव पर।”
11दाऊद ने एक भी पुरुष या स्त्री को गत लाने के लिए जीवित नहीं छोड़ा था। उसने सोचा, “ऐसा न हो कि कोई हमारे विषय में यह कहे कि दाऊद ने ऐसा किया है और जब से वह पलिश्तियों के देश में रहने लगा है तब से ऐसा ही करता आया है।”
12अतः आकीश ने दाऊद पर यह सोचकर विश्वास किया है कि, “उसने तो अपने को इस्राएल के लोगों के बीच निस्सन्देह घृणित बना डाला है। अतएव, वह सर्वदा के लिए मेरा दास बना रहेगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)