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पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 3 / 36

2 इतिहास 3

1तब सुलैमान ने यरूशलेम के मोरिय्याह पहाड़ पर, अपने पिता दाऊद द्वारा तैयार किए गए उस स्थान पर अर्थात् यबूसी ओर्नान के खलिहान में जहां यहोवा ने उसके पिता दाऊद को दर्शन दिया था, यहोवा का भवन बनाना आरम्भ किया।

2उसने अपने राज्य के चौथे वर्ष के दूसरे महीने के दूसरे दिन निर्माण कार्य आरम्भ किया।

3सुलैमान ने परमेश्वर के भवन की नींव इस प्रकार डालीः पुराने नाप के अनुसार उसकी लम्बाई साठ हाथ और चौड़ाई बीस हाथ थी।

4और भवन के सामने के ओसारे की लम्बाई, भवन की चौड़ाई के बराबर अर्थात् बीस हाथ, और ऊंचाई एक सौ बीस हाथ थी। उसने उसे भीतर से चोखे सोने से मढ़वाया।

5भवन के मुख्य कमरे की छत उसने सनोवर की लकड़ी से डलवाई और उसे उत्तम सोने से मढ़वाकर उसे खजूर के वृक्षों और जंजीरों के चित्रें की नक्काशी से सजाया।

6फिर उसने सुन्दरता के लिए भवन में मणि जड़वाए। उसमें लगा सोना पर्वेम का सोना था।

7उसने भवन को भी सोने से मढ़वाया-उसकी कड़ियों, डेवढ़ियों, दीवारों और दरवाजों को सोने से मढ़वाया; और दीवारों पर करूबों के चित्र खुदवाए।

8फिर उसने भवन के परमपवित्र स्थान को बनाया; उसकी लम्बाई और चौड़ाई भवन की चौड़ाई के बराबर बीस बीस हाथ थी। उसने उसे छः सौ किक्कार चोखे सोने से मढ़ा।

9सोने की कीलों का तौल पचास शेकेल था। उसने ऊपरी कोठरियों को भी सोने से मढ़ा।

10तब उसने परमपवित्र स्थान में दो तराशे हुए करूब बनाए और उन्हेंं सोने से मढ़ा।

11करूबों के फैले हुए पंखों का विस्तार बीस हाथ था। एक करूब का पांच हाथ लम्बा एक पंख, भवन की दीवार को स्पर्श करता था, और उसका दूसरा पांच हाथ लम्बा पंख, दूसरे करूब के पंख को स्पर्श करता था।

12और दूसरे करूब का पांच हाथ लम्बा एक पंख, भवन की दीवार को स्पर्श करता था, और उसका दूसरा पांच हाथ लम्बा पंख, पहले करूब के पंख को स्पर्श करता था।

13इन करूबों के पंख बीस हाथ तक फैले हुए थे, वे अपने पैरों पर खड़े थे और उनके मुंह कक्ष की ओर थे।

14फिर उसने पर्दे को नीले, बैंजनी और लाल रंग के महीन मलमल से बनवाया और उस पर करूब कढ़वाए।

15उसने भवन के सामने पैंतीस-पैंतीस हाथ ऊंचे दो स्तम्भ भी बनाए, और प्रत्येक के सिरे पर जो कंगनी थी वह पांच हाथ ऊंची थी।

16और उसने जंजीरें बनाकर उन्हें स्तम्भों के सिरे पर लगाया; तथा एक सौ अनार बनवाकर उन्हें जंजीरों पर लटकाया।

17और उसने स्तम्भों को मन्दिर के सामने एक को दाहिने और दूसरे को बाएं खड़ा कराया; और दाहिने खम्भे का नाम याकीन तथा बाएं खम्भे का नाम बोअज रखा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)