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पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 31 / 36

2 इतिहास 31

1जब यह सब पूरा हो चुका तो वहां उपस्थित सब इस्राएलियों ने यहूदा के नगरों में जाकर सब लाटों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, अशेराओं को काट डाला और यहूदा तथा बिन्यामीन से लेकर एप्रैम और मनश्शे तक के ऊंचे स्थानों और वेदियों को ढाकर पूर्णतः नष्ट कर दिया। तब सब इस्राएल अपने-अपने नगर तथा अपनी-अपनी निज भूमि को चले गए।

2और हिजकिय्याह ने याजकों और लेवियों को उनके दलों के अनुसार अर्थात् याजकों और लेवियों दोनों दलों के प्रत्येक व्यक्ति को उसकी सेवा के अनुसार होमबलि और मेलबलि चढ़ाने, सेवा करने, धन्यवाद देने तथा स्तुति करने के लिए यहोवा की छावनी के द्वारों में ठहराया।

3और उसने अपनी सम्पत्ति में से होमबलि के लिए अर्थात् भोर और संध्या की होमबलि के लिए और विश्राम, और नये चांद के दिनों, पर्वों और नियत समयों पर यहोवा की व्यवस्था के अनुसार होने वाले होमबलि के लिए, राजा के भाग को भी ठहरा दिया।

4फिर उसने यरूशलेम में रहने वालों को आज्ञा दी कि वे याजकों और लेवियों को उनका निर्धारित भाग दिया करें जिससे कि वे यहोवा की व्यवस्था को पूरा करने में मन लगा सके।

5इस आज्ञा के निकलते ही इस्राएल लोग अन्न, नया दाखमधु, तेल, शहद और खेत की सब प्रकार की उपज का पहला फल बहुतायत से देने लगे। वे सभी वस्तुओं का दशमांश बहुतायत से लाने लगे।

6और जो इस्राएल और यहूदी, यहूदा के नगरों में रहते थे, वे भी बछड़ों और भेड़-बकरियों का दशमांश और उन पवित्र भेंटों का दशमांश ले आए जो उनके परमेश्वर यहोवा के लिए अर्पित किए गए थे, और उनके ढेर-के-ढेर लगा दिए।

7उन्होंने तीसरे महीने में ढेर लगाना आरम्भ किया और सातवें महीने में पूरा किया।

8जब हिजकिय्याह और उसके अधिकारियों ने आकर ढेरों को देखा तब उन्होंने यहोवा को और उसकी प्रजा इस्राएल को धन्य कहा।

9तब हिजकिय्याह ने याजकों और लेवियों से उन ढेरों के विषय में पूछा।

10और महायाजक अजर्याह ने जो सादोक के घराने का था, उससे कहा, “जब से लोग यहोवा के भवन में भेंटें लाने लगे हैं, तब से हमारे पास खाने को बहुत होता है और बच भी जाता है, क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को आशीष दी है, और यह बचे हुए का बड़ा ढेर है।”

11तब हिजकिय्याह ने यहोवा के भवन में कोठरियां तैयार करने की आज्ञा दी, और वे तैयार की गईं।

12तब वे सच्चाई से भेंटें और दशमांश और अर्पित की हुई वस्तुएं लाए; उनका अधिकारी कोनन्याह नामक लेवी था और उसका भाई शिमी नायब था।

13और राजा हिजकिय्याह की आज्ञा से अहीएल, अजज्याह, नहत, असाहेल, यरीमोत, योजाबाद, एलीएल, यिस्मक्याह, महत, और बनायाह, प्रबन्धक नियुक्त किए गए जो कोनन्याह और उसके भाई शिमी के अधीन थे और अजर्याह परमेश्वर के घर का प्रधान था।

14और यिम्ना लेवीय का पुत्र कोरे जो पूर्वी द्वार का द्वारपाल था, वह परमेश्वर के लिए अर्पित स्वेच्छाबलियों का प्रबन्धक था, कि यहोवा को दी गई भेंटें और परमपवित्र वस्तुएं बांटा करे।

15और उसके अधिकार में एदेन, मिन्यामीन, येशू शमायाह, अमर्याह और शकन्याह याजकों के नगरों में रहते थे कि वे अपने भाइयों को चाहे वे छोटे दल के हों या बड़े, सच्चाई से उनका भाग दिया करे।

16इसके अतिरिक्त वे तीस वर्ष व उससे अधिक आयु के सब पुरफ़षों को भी दें जिनके नाम वंशावली के अनुसार गिने गए और जो दिन प्रतिदिन अपनी सेवकाई के कार्य के लिए यहोवा के भवन में अपने दल के अनुसार जाया करते थे।

17उन याजकों को जिनके नामों की गिनती उनके पूर्वजों के घरानों की वंशावली के अनुसार की गई और उन लेवियों को भी जो बीस वर्ष से अधिक आयु के थे और अपने-अपने दल के अनुसार कार्य करते थे।

18और सभा के लोगों को भी जिनके नाम उनके छोटे बच्चों, पत्नियों, पुत्रों और उनकी पुत्रियों के साथ लिखे गए थे, क्योंकि उन्होंने अपने आप को पवित्र कार्य के लिए सच्चाई से पवित्र किया था।

19फिर हारून की सन्तान के याजकों को भी जो अपने-अपने नगरों में या हर एक नगर के आसपास की चरागाहोे में थे, देने के लिए ऐसे भी लोग नियुक्त किए गए थे जिनके नाम लिखे गए कि वे याजकों के सब पुरफ़षों को और उन लेवियों को उनका भाग दिया करें जिनके नाम वंशावली के अनुसार लिखे गए है।

20अतः हिजकिय्याह ने सारे यहूदा में ऐसा ही प्रबन्ध किया। और जो कुछ उनके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और उचित और सत्य था, उसने वही किया।

21और अपने परमेश्वर की खोज करते हुए परमेश्वर के भवन में सेवा, व्यवस्था और आज्ञापालन से सम्बन्धित हर एक कार्य जो उसने आरम्भ किया, उसे पूरे मन से किया और सफल भी हुआ।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)