पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 5 / 24
2 शमूएल 5
1तब इस्राएल के समस्त गोत्र हेब्रोन में दाऊद के पास आकर कहने लगे, “देख, हम तो तेरे ही हाड़ मांस है।
2इससे पूर्व जब शाऊल हमारा राजा था, तब तू ही युद्ध में इस्राएल की अगुवाई करता था। और यहोवा ने तुझसे कहा, ‘तू मेरी प्रजा इस्राएल की चरवाही करेगा, तथा तू इस्राएल का शासक होगा’।”
3अतः इस्राएल के सब प्राचीन हेब्रोन में राजा के पास आए। और दाऊद राजा ने हेब्रोन में यहोवा के सामने उनके साथ वाचा बांधी, और उन्होंने इस्राएल का राजा होने के लिए दाऊद का अभिषेक किया।
4जब दाऊद राजा बना तब वह तीस वर्ष का था, तथा उसने चालीस वर्ष तक राज्य किया,
5उसने हेब्रोन में यहूदा पर साढ़े सात वर्ष तक तथा यरूशलेम में समस्त इस्राएल और यहूदा पर तैंतीस वर्ष तक राज्य किया।
6जब राजा और उसके पुरुषों ने यरूशलेम जाकर यबूसियों पर आक्रमण किया जो उस देश के निवासी थे। उन्होंने यह सोचकर कि दाऊद यहां प्रवेश नहीं कर सकता, उससे कहा, “तू यहां आने न पाएगा। तुझे तो अन्धे और लंगड़े ही बाहर रोक देंगे।”
7फिर भी दाऊद ने सिय्योन का गढ़ ले लिया, जो अब दाऊदनगर है।
8उस दिन दाऊद ने कहा, “जो कोई यबूसियों पर वार करना चाहे वह जेल की सुरंग से इन लंगड़ों और अंधों तक पहुंचे जिनसे दाऊद मन से घृणा करता है।” इसलिए कहावत है, “अन्धे या लंगड़े भवन में प्रवेश करने नहीं पाएंगे।”
9तब दाऊद उस गढ़ में रहने लगा, और उसका नाम दाऊदनगर रखा। तब दाऊद ने चारों ओर मिल्लो से लेकर भीतर की ओर निर्माण-कार्य करवाया।
10इस प्रकार दाऊद और भी महान् होता गया क्योंकि सेनाओं का परमेश्वर यहोवा, उसके साथ था।
11तब सोर के राजा हीराम ने दाऊद के पास देवदार की लकड़ी, बढ़इर् और राजमिस्त्रियों के साथ सन्देश-वाहक भेजे। उन्होंने दाऊद के लिए एक भवन बनाया।
12अब दाऊद को निश्चय हो गया कि यहोवा ने मुझे इस्राएल के राजा के पद पर स्थिर किया है, और कि उसने अपनी प्रजा इस्राएल के कारण मेरे राज्य को बढ़ाया है।
13हेब्रोन से आने के बाद दाऊद ने यरूशलेम से अपने लिए और पत्नियां और रखेलियां रख लीं जिनसे दाऊद के और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं।
14यरूशलेम में जो उत्पन्न हुए उनके नाम ये हैं: शम्मू, शोबाब, नातान, सुलैमान,
15यिभार, एलोशू, नेपेग, यापी,
16एलीशाम, एल्यादा और एलीपेलेत।
17जब पलिश्तियों ने सुना कि इस्राएल का राजा होने के लिए दाऊद का अभिषेक हुआ है तब सब पलिश्ती दाऊद की खोज में निकल पड़े। जब दाऊद ने यह सुना तो वह किले में चला गया।
18तब पलिश्ती आकर रपाईम की घाटी में फैल गए।
19तब दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्या मैं पलिश्तियों का सामना करने जाऊं? क्या तू उन्हें मेरे हाथ में कर देगा?” और यहोवा ने दाऊद से कहा, “जा, क्योंकि पलिश्तियों को मैं निश्चय तेरे हाथ में कर दूंगा।”
20अतः दाऊद बालपरासीम में आया, और उनको वहीं पराजित किया। तब उसने कहा, “यहोवा मेरे सामने मेरे शत्रुओं पर जलधाराओं के समान टूट पड़ा है।” इसलिए, उसने उस स्थान का नाम बाल परासीम रखा।
21वे अपनी मूर्तियां वहीं छोड़ गए जिनको दाऊद और उसके सब पुरुष उठा ले गए।
22इसके पश्चात् पलिश्ती एक बार फिर आए और रपाईम की तराई में फैल गए।
23जब दाऊद ने यहोवा से पूछा तब उसने उत्तर दिया, “तू उन पर आक्रमण मत कर। उनके पीछे से उनको घेर ले और शहतूत वृक्ष के सामने से उन पर चढ़ जा।
24जब तू शहतूत वृक्षों की फुनगियों पर सेना के चलने की आहट सुने तब तुरन्त टूट पड़ना क्योंकि उस समय पलिश्तियों की सेना पर प्रहार करने के लिए यहोवा तेरे आगे जा चुका होगा।
25तब दाऊद ने ठीक वैसा ही किया जैसा यहोवा ने उसे आज्ञा दी थी, और पलिश्तियों को गेबा से लेकर गेजेर तक मारता गया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)