पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 6 / 24
2 शमूएल 6
1अब दाऊद ने इस्राएल के चुने हुए पुरुषों को पुनः एकत्रित किया। वे तीस हजार थे।
2फिर दाऊद उठा, और अपने साथ के सब लोगों के संग यहूदा के बाले को गया कि वहां से परमेश्वर की वाचा के सन्दूक को लाए जो उसके नाम से, अर्थात् करूबों पर विराजमान सेनाओं के यहोवा का कहलाता है।
3उन्होंने परमेश्वर की वाचा के सन्दूक को नई गाड़ी पर चढ़ाया कि पहाड़ी पर स्थित अबीनादाब के घर से ला सके। अबीनादाब के पुत्र, उज्जा और अह“यो नई गाड़ी को हांक रहे थे।
4अतः वे उसे परमेश्वर के सन्दूक के साथ अबीनादाब के घर से ले आए जो पहाड़ी पर था। अह“यो सन्दूक के आगे चल रहा था।
5इस समय दाऊद और इस्राएल का पूरा घराना यहोवा के सामने सनौवर की लकड़ी से बने सब प्रकार के बाजेः वीणा, सितार, डफ, करताल, झांझ आदि बजाकर उत्सव मना रहे थे।
6जब वे नाकोन के खलिहान पर पहुंचे तब उज्जा ने परमेश्वर के सन्दूक की ओर हाथ बढ़ाकर उसे सम्भाल लिया क्योंकि बैलों ने ठोकर खाई।
7तब यहोवा का क्रोध उज्जा पर भड़क उठा, और परमेश्वर ने उसके इस अनादर के कारण उसे वहीं पर मारा जिससे वह वहीं परमेश्वर के सन्दूक के पास मर गया।
8उज्जा पर यहोवा के इस प्रकोप के कारण दाऊद क्रोधित हुआ, जिससे वह स्थान आज तक पेरे-उज्जा कहलाता है।
9अतः दाऊद उस दिन यहोवा से भयभीत हुआ और उसने कहा, “अब यहोवा का सन्दूक मेरे पास कैसे आ सकेगा?”
10अब यहोवा के सदूक को दाऊद अपने साथ दाऊदनगर ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ, अतः वह उसे दूसरी ओर गतवासी ओबेद-एदोम के घर ले गया।
11इस प्रकार, यहोवा का सन्दूक गतवासी ओबेद-एदोम के घर तीन महीने रहा, और यहोवा ने ओबेद-एदोम तथा उसके पूरे परिवार को आशीष दी।
12तब दाऊद राजा को सूचना दी गई, “परमेश्वर के सन्दूक के कारण यहोवा ने ओबेद-एदोम के परिवार को और जो कुछ उसका है, उस सबको आशीषित किया है।” अतः दाऊद जाकर परमेश्वर के सन्दूक को ओबेद-एदोम के घर से दाऊदनगर में आनन्दपूर्वक ले आया।
13और ऐसा हुआ कि सन्दूक को उठानेवाले छः कदम ही चल पाए थे कि उसने एक बैल और एक मोटा बछड़ा बलि किया।
14दाऊद तो यहोवा के सामने सनी का एपोद पहने हुए तन्मय होकर नाच रहा था।
15इस प्रकार, दाऊद और इस्राएल का पूरा घराना यहोवा के सन्दूक को जयजयकार तथा नरसिंगे की ध्वनि के साथ ला रहा था।
16और ऐसा हुआ कि जब यहोवा का सन्दूक दाऊदनगर में पहुंचा तो शाऊल की पुत्री, मीकल ने अपनी खिड़की से झांक कर दाऊद राजा को यहोवा के सामने नाचते कूदते देखा और उसे अपने मन में तुच्छ जाना।
17उन्होंने यहोवा के सन्दूक को लाकर उस तम्बू के भीतर नियत स्थान पर रखा जिसे दाऊद ने इस काम के लिए बनवाया था। उसके बाद दाऊद ने यहोवा के सामने होमबलि और मेलबलि चढ़ाई।
18जब दाऊद होमबलि ओर मेलबलि चढ़ा चुका तब उसने सेनाओं के यहोवा के नाम से प्रजा को आशीर्वाद दिया।
19फिर उसने सब लोगों को, इस्राएल के सम्पूर्ण समाज के प्रत्येक स्त्री और पुरुष को एक-एक रोटी तथा खजूर की और किशमिश की एक-एक टिकिया बांटी। तब सब लोग अपने-अपने घर चले गए।
20परन्तु जब दाऊद अपने परिवार को आशीर्वाद देने के लिए लौटा तब शाऊल की पुत्री मीकल दाऊद से मिलने बाहर आई, और बोली, “आज इस्राएल के राजा ने अपने को कैसा प्रतापी प्रकट किया! उसने अपने को अपने सेवकों की दासियों के सामने ऐसा उघाड़ा था जैसे कोई मूर्ख निर्लज्जतापूर्वक निर्वस्त्र हो जाता है।”
21दाऊद ने मीकल से कहा, “मैंने यहोवा के सामने यह किया जिसने तेरे पिता तथा उसके सम्पूर्ण घराने की अपेक्षा मुझे चुना कि यहोवा की प्रजा, इस्राएल के ऊपर शासक नियुक्त करे। इसलिए, मैं यहोवा के सामने उत्सव मनाऊंगा।
22मैं इससे भी अधिक तुच्छ बनूंगा, और स्वयं अपनी दृष्टि में नीचा ठहरूंगा, परन्तु जिन दासियों के विषय में तूने कहा है वे तो मेरा आदर करेंगी।”
23अतः शाऊल की पुत्री मीकल मृत्यु तक निस्सन्तान रही।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)