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पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 7 / 24

2 शमूएल 7

1फिर ऐसा हुआ कि अब राजा अपने भवन में रहने लगा, और यहोवा ने उसके चारों ओर के सब शत्रुओं से उसे विश्राम दे दिया,

2तब राजा ने नातान भविष्यद्वक्ता से कहा, “देख, मैं तो देवदार के बने हुए भवन में रहता हूं, परन्तु परमेश्वर का सन्दूक तम्बू में रहता है।”

3तब नातान ने राजा से कहा, “जा, तेरे मन में जो है वह सब कर क्योंकि यहोवा तेरे साथ है।”

4परन्तु उसी रात को यहोवा का यह वचन नातान के पास पहुंचा,

5“जा, मेरे सेवक दाऊद से कह कि यहोवा यह कहता है, ‘क्या तू मेरे निवास के लिए भवन बनाएगा?

6मैं तो जिस दिन से इस्राएलियों को मिस्र से निकाल कर लाया उस दिन से आज तक घर में नहीं रहा, परन्तु तम्बू, और डेरे में घूमता आया हू।

7मैं सब इस्राएलियों के साथ जहां कहीं गया, क्या मेंने इस्राएल के किसी भी गोत्र से, जिसे मैंने अपनी प्रजा इस्राएल की चरवाही की आज्ञा दी, कभी एक शब्द भी कहा, “तुमने मेरे लिए देवदार का भवन क्यों नहीं बनवाया?”’

8इसलिए, अब तू मेरे सेवक दाऊद से ऐसा कह, ‘सेनाओं का यहोवा कहता है, “मैंने तुझे चरागाह से अर्थात् भेड़-बकरियों के पीछे-पीछे फिरने से निकाला कि तू मेरी प्रजा इस्राएल का शासक बने।

9और जहां-कहीं तू गया वहां मैंने तेरे सामने से तेरे सब शत्रुओं को नाश किया हैं फिर मैं तेरा नाम संसार के बड़े-बड़े लोगों के समान महान करूंगा।

10मैं अपनी प्रजा इस्राएल के लिए एक स्थान भी नियुक्त करूंगा, और उनको रोपूंगा कि वे अपने ही स्थान में रह सकें, और पुनः खदेड़े न जाएं और दुष्ट लोग उन्हें फिर नहीं सताएंगे,

11जैसा कि वे उन दिनों में करते थे जब मैंने अपनी प्रजा, इस्राएल के ऊपर न्यायियों को ठहराया था। मैं तुझे तेरे सब शत्रुओं से भी विश्राम दूंगा। यहोवा तुझे यह भी बताता है कि यहोवा तेरे लिए घर बनाएगा।

12जब तेरी आयु के दिन पूरे हो जाएंगे और तू अपने पूर्वजों के साथ सो जाएगा तब मैं तेरे पश्चात् तुझ ही में से निकले तेरे वंश को अर्थात् तेरी सन्तान को खड़ा करूंगा, और उसके राज्य को स्थिर करूंगा।

13वह मेरे नाम के लिए भवन बनाएगा, और मैं उसके राज्य के सिंहासन को सदा-सर्वदा के लिये स्थिर रखूंगा।

14मैं उसका पिता ठहरूंगा, और वह मेरा पुत्र होगा। यदि वह अधर्म करे तब मैं मनुष्यों के योग्य दण्ड से और मनुष्यों की मार से उसे सुधारूंगा।

15परन्तु मेरी करुणा उस पर से न हटेगी, जैसे मैंने शाऊल पर से उठा ली थी और जिसे तेरे सामने से हटा दिया था।

16तेरा घराना और तेरा राज्य मेरे सामने सर्वदा बना रहेगा। तेरा सिंहासन सर्वदा के लिए स्थिर किया जाएगा।”’

17नातान ने इन सब वचनों तथा इस सम्पूर्ण दर्शन के अनुसार दाऊद से बातें की।

18तब दाऊद राजा भीतर जाकर यहोवा के सामने बैठ गया, और कहने लगा, “हे प्रभु यहोवा, मैं कौन हूं, और मेरा घराना क्या है कि तू मुझको यहां तक ले आया है?

19तो भी हे प्रभु परमेश्वर, तेरी दृष्टि में यह छोटी सी बात थी क्योंकि तूने अपने सेवक के घराने के सुदूर भविष्य के विषय में भी कहा है। हे प्रभु परमेश्वर, यह तो मनुष्य की रीति है।

20अब इससे अधिक दाऊद तुझसे क्या कह सकता है? क्योंकि हे प्रभु परमेश्वर, तू तो अपने दास को जानता है।

21अपने वचन के कारण तथा अपनी निज इच्छा के अनुसार तू ने ये सब महान् कार्य किये हैं कि तेरा दास जान ले।

22हे प्रभु परमेश्वर, इसी कारण तू महान् है। क्योंकि जो कुछ हमने अपने कानों से सुना है उसके अनुसार तेरे समान दूसरा कोई नहीं, और तेरे सिवाय कोई दूसरा परमेश्वर नही।

23फिर पृथ्वी पर तेरी प्रजा, इस्राएल के समान दूसरी जाति ही कौन है जिसको छुड़ाने के लिए परमेश्वर स्वयं गया की उसको अपनी निज प्रजा बना ले, अपना नाम ऊँचा करे और तेरे निज लोगों के सामने जिनको तूने स्वयं अपने लिए अनेक जातियों तथा उनके देवताओं से छुड़ाया कि तेरे लिए महान् कार्य और तेरे देश के लिए भंयकर कार्य करे?

24और तू ने अपनी प्रजा, इस्राएल को अपने लिए स्थिर किया है कि वह सर्वदा तेरी निज प्रजा बनी रहे, और हे यहोवा, तू उनका परमेश्वर हुआ है।

25इसलिए, अब हे यहोवा परमेश्वर, जो वचन तूने अपने दास और उसके घराने के विषय में कहे हैं उन्हें सर्वदा के लिए दृढ़ कर, और वैसा ही कर जैसा तूने कहा है

26जिससे तेरा नाम सर्वदा के लिए यह कहते हुए महान् किया जाए कि ‘सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर है,’ और तेरे दास, दाऊद का धाराना तेरे सामने स्थिर किया जाए।

27हे सेनाओं के यहोवा, इस्राएल के परमेश्वर, तू ने अपने दास पर प्रकट करके कहा है, ‘मैं तेरे लिए घर बनाऊंगा।’ इस कारण तेरे दास को तुझसे यह प्रार्थना करने का साहस हुआ है।

28अब, हे प्रभु यहोवा, तू परमेश्वर है, और तेरे वचन सत्य हैं, और तूने अपने दास से इस भलाई की प्रतिज्ञा की है।

29इसलिए, अब तू अपने दास के घराने को आशीष देने के लिए प्रसन्न हो कि वह तेरे सामने सर्वदा बना रहे क्योंकि हे प्रभु परमेश्वर, तूने ही यह कहा है। तेरी आशीष से तेरे दास का घराना सर्वदा आशीषित बना रहे।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)