2 तीमुथियुस 2:15
अपने आपको परमेश्वर के ग्रहणयोग्य ऐसा कार्य करनेवाला ठहराने का प्रयत्न कर जिस से लज्जित होना न पड़े, और जो सत्य के वचन को ठीक-ठीक काम में लाए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: 2 तीमुथियुस 2
12यदि हम धीरज से सहें तो उसके साथ राज्य भी करेंगे। यदि हम उसका इनकार करें तो वह भी हमारा इनकार करेगा।
13यदि हम विश्वासघाती हों, फिर भी वह विश्वास-योग्य बना रहता है, क्योंकि वह स्वयं अपना इनकार नहीं कर सकता।
14उन्हें इन बातों का स्मरण दिला और परमेश्वर के सामने उनको चेतावनी दे कि शब्दों के बारे में तर्क-वितर्क न किया करें जो व्यर्थ है और सुनने वालों के लिए विनाश का कारण है।
15अपने आपको परमेश्वर के ग्रहणयोग्य ऐसा कार्य करनेवाला ठहराने का प्रयत्न कर जिस से लज्जित होना न पड़े, और जो सत्य के वचन को ठीक-ठीक काम में लाए।
16पर सांसारिक और व्यर्थ बकवाद् से दूर रह, क्योंकि इस से लोग अभक्ति में और भी बढ़ते जाएंगे,
17और उनकी बातें सड़े घाव की तरह फैलेंगी। हुमिनयुस और फिलेतुस उन्हीं में से हैं:
18वे यह कहकर कि पुनरुत्थान पहिले ही हो चुका है सत्य से भटक गए हैं और कुछ लोगों के विश्वास को उलट-पुलट कर देते है।
संबंधित पद
- 1 थिस्सलुनीकियों 2:4
परमेश्वर ने अपना सुसमाचार सौंपने के लिए हमें योग्य समझा-इसीलिए हम मनुष्यों को नहीं, परन्तु हृदयों के जांचने वाले परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए प्रचार करते है।
- 2 पतरस 1:10
अतः हे भाइयो, अपने बुलाए जाने और चुने जाने की निश्चयता का और भी अधिक प्रयत्न करते जाओ, क्योंकि इन बातों के प्रयत्न में जब तक रहोगे, तुम कभी ठोकर न खाओगे,
- 1 तीमुथियुस 4:6
भाइयों को इन बातों का स्मरण दिलाकर तू मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा और विश्वास की बातों और उस खरी शिक्षा द्वारा जिसे तू मानता आया है तेरा पालन-पोषण होता रहेगा।
- 2 कुरिन्थियों 10:18
क्योंकि जो अपनी बड़ाई स्वयं करता है उसकी नहीं, परन्तु जिसकी बड़ाई प्रभु करता है उसी की प्रशंसा होती है।
- 2 कुरिन्थियों 5:9
इसलिए हमारी अभिलाजा यह है, चाहे साथ रहें या अलग रहें, हम उसे प्रिय लगते रहे।
- 1 तीमुथियुस 4:12–16
कोई तेरी युवावस्था को तुच्छ न समझे, परन्तु तू वचन, व्यवहार, प्रेम, विश्वास और पवित्रता में विश्वासियों के लिए आदर्श बन जा।
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