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नया नियम · प्रेरितों के काम · अध्याय 8 / 28

प्रेरितों के काम 8

1इस प्रकार उसके मार डाले जाने में -शाऊल भी सहमत था। उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर घोर अत्याचार आरम्भ हुआ, और प्रेरितों को छोड़ वे सब यहूदिया और सामरिया के समस्त प्रदेशों में तितर-बितर हो गए।

2फिर कुछ भक्तों ने स्तिफनुस को दप़फ़नाया और उसके लिए बड़ा विलाप किया।

3परन्तु -शाऊल घर-घर  जाकर कलीसिया को उजाड़ने और स्त्री-पुरफ़जों को घसीट-घसीट कर बन्दीगृह में डालने लगा।

4अतः जो तितर-बितर हुए थे, घूम-घूम कर वचन का प्रचार करने लगे,

5और फिलिप्पुस सामरिया नगर में जाकर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा।

6जब लोगों ने फिलिप्पुस की बातें सुनीं और उन चिन्हों को देखा जिन्हें वह दिखा रहा था तो उन्होंने एकचित्त होकर उसकी बातों पर घ्यान दिया।

7क्योंकि बहुत लोगों में से अशुद्ध आत्माएं बड़े शब्द से चिल्लाती हुई निकल रही थीं, तथा अनेक जो लकवे के मारे और लंगड़े थे, चंग किए जा रहे थे।

8और उस नगर में बड़ा आनन्द छा गया। -

9वहां -शमौन नामक एक मनुष्य था जो पहिले उस नगर में जादू-टोना किया करता और एक महान् पुरफ़ज होने का दावा करके सामरिया के लोगों को आशचर्य में डाला करता था।

10वे सब, छोटे से लेकर बड़े तक, उस पर ध्यान देकर यह कहते थे, ‘‘यह व्यक्ति परमेश्वर की वह -शक्ति है जो महान् कहलाती है।”

11वे उस पर इसलिए ध्यान देते थे, कि उसने अपने जादू के कार्यों द्वारा उन सब को लम्बे समय से आशचर्य में डाल रखा था।

12परन्तु जब उन्होंने फिलिप्पुस का विश्वास किया जो परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार और यीशु के नाम का प्रचार करता था तो क्या पुरफ़ज, क्या स्त्री-सब बपतिस्मा लेने लगे।

13और स्वयं -शमौन ने भी विश्वास किया तथा बपतिस्मा लेकर फिलिप्पुस के साथ रहने लगा। वह चिह्नों तथा बड़े बड़े आश्चर्यकर्मोंं को होते देख कर चकित हुआ करता था।

14जब यरूशलेम में प्रेरितों ने सुना कि सामरियों ने परमेश्वर का वचन ग्रहण किया है, तो उन्होंने उनके पास पतरस और यूहन्ना को भेजा।

15उन्होंने वहां पहुंचकर उनके लिए प्रार्थना की कि वे पवित्र आत्मा पाए।

16क्योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर नहीं उतरा था; उन्होंने केवल प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा लिया था।

17तब उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्होंने पवित्र आत्मा पाया।

18जब -शमौन ने यह देखा कि प्रेरितों के हाथ रखने से पवित्र आत्मा मिलता है तो उनके पास रफ़पये लाकर कहा,

19‘‘यह अधिकार मुझे भी दो, कि जिस किसी पर मैं हाथ रखूँ वह पवित्र आत्मा पाए।”

20परन्तु पतरस ने उस से कहा, ‘‘तेरे रफ़पये तेरे साथ नाश हों, क्योंकि तू ने परमेश्वर का वरदान रफ़पयों से प्राप्त करने का विचार किया!

21इस बात में न तेरा कोई साझा है और न हिस्सा, क्योंकि तेरा मन परमेश्वर के सामने ठीक नहीं

22इसलिए अपनी दुष्टता से पश्चाताप कर और प्रभु से प्रार्थना कर संभव है की तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए

23क्योंकि मैं देख रहा हूँ कि तू पित्त की सी कड़वाहट और अधर्म के बन्धन में है। ̧

24पर शमौन ने उत्तर दिया, ‘‘तुम मेरे लिए प्रभु से प्रार्थना करो कि जो बातें तुमने कही हैं उनमें से कोई भी मुझ पर न आ पड़े!”

25अतः जब वे दृढ़ता से गवाही देकर प्रभु का वचन सुना चुके तो सामरियों के बहुत से गांवों में सुसमाचार प्रचार करते हुए यरूशलेम को लौट गए।

26परन्तु प्रभु के एक स्वर्गदूत ने फिलिप्पुस से कहा, ‘‘उठ, और दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा जो यरूशलेम से गाज़ा की ओर जाता है।” यह एक निर्जन मार्ग है।

27वह उठकर गया, और देखो, इथियोपिया देश का एक खोजा था, जो उस देश की रानी कन्दाके का मन्त्री तथा कोजाध्यक्ष था। वह आराधना करने यरूशलेम आया था।

28वह अपने रथ में बैठकर यशायाह नबी की पुस्तक पढ़ते हुए वापस लौट रहा था।

29तब आत्मा ने फिलिप्पुस से कहा, “जा, तू इस रथ के साथ चला जा।”

30जब फिलिप्पुस दौड़ कर वहां पहुंचा तो उसने उसे यशायाह नबी की पुस्तक पढ़ते सुना और कहा, ‘‘जो तू पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है?”

31उसने कहा, ‘‘जब तक कोई मुझे न समझाए, मैं कैसे समझ सकता हूँ?” और उसने फिलिप्पुस से विनती की कि वह ऊपर आकर उसके पास बैठे।

32पवित्रशास्त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, यह थाः “वह वध होने वाली भेड़ के समान ले जाया गया, और जैसे मेमना ऊन कतरने वालों के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।

33दीनता की दशा में उसका न्याय नहीं होने पाया। उसकी पीढ़ी के लोगों का वर्णन कौन करेगा? क्योंकि पृथ्वी पर से उसका जीवन उठा लिया जाता है।”

34खोजे ने फिलिप्पुस से कहा, ‘‘कृपा करके मुझे बता कि नबी यह किसके विषय में कहता है? अपने या किसी दूसरे के विजय में?”

35तब फिलिप्पुस ने अपना मुंह खोला और इसी -शास्त्र से आरम्भ करके उसे यीशु के विषय में सुसमाचार सुनाया।

36मार्ग पर चलते चलते वे जल के किसी स्थान पर पहुंचे। तब खोजे ने कहा, ‘‘देख, यहां जल है। अभी बपतिस्मा लेने में मेरे लिए क्या रफ़कावट है?”

37फिलिप्पुस ने कहा, ‘‘यदि तू सारे मन से विश्वास करता है तो अवश्य ले सकता है।” उसने उत्तर दिया, ‘‘मैं विश्वास करता हूँ कि यीशु मसीह, परमेश्वर का पुत्र है।”

38तब उसने रथ रोकने की आज्ञा दी, और फिलिप्पुस तथा खोजा दोनों जल में उतरे और उसने खोजे को बपतिस्मा दिया।

39जब वे जल में से बाहर आए, तब प्रभु का आत्मा फिलिप्पुस को उठा ले गया और खोजे ने उसे फिर नहीं देखा, परन्तु आनन्द मनाता हुआ अपने मार्ग पर चला गया।

40फिलिप्पुस ने अपने आप को अशदोद में पाया और कैसरिया पहुंचने तक वह नगर-नगर सुसमाचार सुनाता गया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)