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नया नियम · कुलुस्सियों · अध्याय 1 / 4

कुलुस्सियों 1

1पौलुस, जो परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से,

2मसीह में उन पवित्र और विश्वासी भाइयों को जो कुलुस्से में रहते हैं: हमारे पिता परमेश्वर की ओर से अनुग्रह और शान्ति मिले।

3हम तुम्हारे लिए सदैव प्रार्थना करते हुए अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं,

4क्योंकि हमने मसीह यीशु में तुम्हारे विश्वास और सब पवित्र लोगों के प्रति तुम्हारे प्रेम के विषय में सुना है।

5यह उस आशा के कारण है जो तुम्हारे लिए स्वर्ग में रखी हुई है, जिसके विषय में तुम पहले ही सत्य वचन अर्थात् उस सुसमाचार में सुन चुके हो,

6जो तुम्हारे पास पहुंचा है, और जिस प्रकार वह सारे जगत में निरन्तर फल लाता और बढ़ता जा रहा है, उसी प्रकार जिस दिन से तुमने उसे सुना और सच्चाई से परमेश्वर के अनुग्रह को समझा, वह तुम में भी कार्य करता जा रहा है।

7उसी की शिक्षा तुमने हमारे प्रिय संगी-दास इपफ्रास से भी पाई जो हमारी ओर से मसीह का विश्वासयोग्य सेवक है।

8उसने भी तुम्हारे उस प्रेम के विषय में जो पवित्र आत्मा में है, हमें बताया।

9इसी कारण, जिस दिन से हमने इसके विषय में सुना है, तुम्हारे लिए प्रार्थना और यह विनती करना नहीं छोड़ा कि तुम समस्त आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ,

10जिस से तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो जाए, और सब प्रकार से उसे प्रसन्न कर सको तथा सब भले कामाें से फलवन्त होकर परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ते जाओ,

11और उसकी महिमामय शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्त बन सको जिस से हर प्रकार की दृढ़ता और धैर्य प्राप्त कर सको,

12और पिता का धन्यवाद आनन्द से करते जाओ जिसने हमें इस योग्य बनाया है कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ उत्तराधिकार में सहभागी हो।

13उसने तो हमें अन्धकार के साम्राज्य से छुड़ा कर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया है,

14जिसमें हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा प्राप्त होती है।

15वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप तथा समस्त सृष्टि में पहिलौठा है।

16क्योंकि उसी में सब वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की अथवा पृथ्वी की, दृशय अथवा अदृशय, सिंहासन अथवा साम्राज्य, शासन अथवा अधिकार-समस्त वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिए सृजी गई है।

17वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती है।

18वही देह, अर्थात् कलीसिया का सिर है। वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा है, जिससे कि सब बातों में उसी को प्रथम स्थान मिले।

19क्योंकि पिता को यही भाया कि समस्त परिपूर्णता उसी में वास करे,

20और उसके क्रूस पर बहाए गए लहू के द्वारा शान्ति स्थापित कर के उसी के द्वारा समस्त वस्तुओं का अपने साथ मेल कर ले- चाहे वे पृथ्वी पर की हों अथवा स्वर्ग में की।

21तुम पहिले तो अलग किए हुए और मन से बैरी थे, और बुरे कामों में लगे हुए थे,

22फिर भी उसने अपनी शरीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम से मेल कर लिया है कि तुम्हें अपने समक्ष पवित्र, निष्कलंक और निर्दोष बना कर उपस्थित करे-

23यह तब ही सम्भव है यदि तुम सचमुच विश्वास में दृढ़ होकर स्थिर बने रहो और सुसमाचार की उस आशा को जिसे तुमने सुना है, न छोड़ो जिसका प्रचार आकाश के नीचे की समस्त सृष्टि में किया गया और जिसका मैं, पौलुस, सेवक बना।

24अब मैं अपने दुखों में जो तुम्हारे लिए उठाता हूं, आनन्द करता हूं और मसीह के क्लेशों की घटी को उसकी देह अर्थात् कलीसिया के लिए अपने शरीर में पूर्ण करता हू।

25इस कलीसिया के लिए मैं परमेश्वर के उस प्रबन्ध के अनुसार सेवक ठहराया गया हूं जो तुम्हारे लाभ के लिए मुझे सौंपा गया, कि मैं परमेश्वर के वचन का पूर्णरूप से प्रचार करूं,

26अर्थात् उस रहस्य को जो युगों और पीढ़ियों से गुप्त रहा पर अब उसके पवित्र लोगों पर प्रकट हुआ है।

27परमेश्वर ने उन पर यह प्रकट करना चाहा, कि गै़रयहूदियों में उस रहस्य की महिमा का धन क्या है, अर्थात् यह कि मसीह तुम में वास करता है और यही महिमा की आशा है।

28हम उसी का प्रचार करते हैं, हर एक मनुष्य को चिता देते हैं और समस्त ज्ञान से हर एक को सिखाते हैं, जिससे कि प्रत्येक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध करके उपस्थित कर सके।

29इसी अभिप्राय से मैं उसकी उस शक्ति के अनुसार जो मुझ में सामर्थ्य के साथ कार्य करती है, कठोर परिश्रम करता हू।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)