पुराना नियम · दानिय्येल · अध्याय 3 / 12
दानिय्येल 3
1नबूकदनेस्सर राजा ने साठ हाथ ऊंची और छः हाथ चौड़ी सोने की एक मूर्ति बनवाकर उसको बेबीलोन प्रान्त के दूरा नामक मैदान में स्थापित कराया।
2तब नबूकदनेस्सर राजा ने सब प्रदेशों के अधिपतियों और प्रान्तों के सब शासकों को अपनी स्थापित की हुई मूर्ति की प्रतिष्ठा में बुलवा भेजा।
3तब नबूकदनेस्सर राजा के द्वारा स्थापित की हुई मूर्ति की प्रतिष्ठा के लिए सब अधिपति, हाकिम, राज्यपाल, मंत्री, कोषाध्यक्ष, न्यायी, अधिकारी और शासक एकत्र होकर उस मूर्ति के सामने खड़े हुए जिसे नबूकदनेस्सर राजा ने स्थापित किया था।
4तब उद्घोषक ने ऊंचे शब्द से कहा, “हे देश-देश, जाति-जाति और भिन्न-भिन्न भाषा के सब लोगो, तुम्हारे लिए यह आज्ञा है,
5कि ज्योंही तुम नरसिंगे, बांसुरी, वीणा, सारंगी, सीतार, शहनाई आदि सब प्रकार के वाघों की आवाज सुनो, त्योंही नबूकदनेस्सर राजा द्वारा स्थापित की हुई सोने की मूर्ति के सम्मुख गिरकर उसे दण्डवत् करो।
6पर जो कोई गिरकर दण्डवत् न करे वह तुरन्त आग की धधकती हुई भट्टी में फेंक दिया जाएगा।”
7इस कारण नरसिंगे, बांसुरी, वीणा, सारंगी, सितार, शहनाई आदि सब प्रकार के वाघों का स्वर सुनते ही देश-देश और जाति-जाति के भिन्न-भिन्न भाषा बोलने वाले लोगों ने नबूकदनेस्सर राजा की स्थापित कराई हुई सोने की मूर्ति की सम्मुख गिरकर उसे दण्डवत् किया।
8इस कारण कुछ कसदी उस समय राजा के पास जाकर यहूदियों पर दोष लगाने लगे।
9उन्होंने नबूकदनेस्सर राजा से कहा, “राजा चिरंजीव रहे।
10हे राजा, तूने स्वयं यह आज्ञा दी है कि नरसिंगे, बांसुरी, वीणा, सारंगी, सितार, शहनाई आदि सब प्रकार के वाघों का स्वर सुनते ही प्रत्येक व्यक्ति गिरकर सोने की मूर्ति को दण्डवत् करे;
11पर जो कोई गिरकर दण्डवत् न करे वह आग की धधकती हुई भट्ठी में फेंक दिया जाए।
12पर शद्रक, मेशक और अबेद-नगो नामक जिन यहूदियों को तूने बेबीलोन प्रान्त पर शासक नियुक्त किया है, हे राजा, उन्होने, तेरा तिरस्कार किया है और वे न तो तेरे देवताओं की उपासना करते और न उस सोने की मूर्ति को जिसे तूने स्थापित किया है दण्डवत् करते है।”
13तब नबूकदनेस्सर ने रोष और जलजलाहट में आकर शद्रम, मेशक और अबेद-नगो को बुलवा भेजा और वे राजा के सम्मुख लाए गए।
14नबूकदनेस्सर ने उनसे पूछा, “हे शद्रक, मेशक और अबेद-नगो, क्या यह सच है कि तुम न तो मेरे देवताओं की उपासना करते और न उस सोने की मूर्ति को जिसे मैंने स्थापित किया है, दण्डवत् करते हो?
15पर अब यदि तुम नरसिंगे, बांसुरी, वीणा, सारंगी, सितार, शहनाई आदि सब वाघों का स्वर सुनते ही मेरी स्थापित की हुई मूर्ति को झुककर दण्डवत् करने को तैयार हो, तब तो ठीक है, पर यदि दण्डवत् न करो तो तुम्हें तत्काल आग की धधकती हुई भट्ठी में फेंक दिया जाएगा, फिर ऐसा कौन-सा देवता है जो तुम्हे मेरे हाथ से बचा सके?
16तब शद्रक, मेशक और अबेद-नगो ने राजा से कहा, “हे नबूकदनेस्सर, हमें इस सम्बन्ध में तुझे उत्तर देने की कोई आवश्यकता नहीं जान पड़ती।
17यदि ऐसा हुआ भी, तो हमारा परमेश्वर जिसकी हम उपासना करते हैं, हमें उस धधकती हुई आग की भट्ठी से बचा सकता है वरन् हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है।
18परन्तु यदि वह ऐसा न भी करे फिर भी हे राजा, तुझे यह मालूम हो कि हम न तो तेरे देवताओं की और न तेरी स्थापित की हुई सोने की मूर्ति को दण्डवत् करेंगे।”
19इस पर नबूकदनेस्सर का क्रोध भड़क उठा और शद्रक, मेशक और अबेद-नगो के प्रति उसके चेहरे का रंग बदल गया और उसने भट्ठी को सातगुणा और अधिक धधकाने की आज्ञा दे दी।
20और उसने अपनी सेना के कुछ शूरवीरों को आज्ञा दी कि शद्रक, मेशक और अबेद-नगो को बांधकर आग की धधकती हुई भट्ठी में फेंक दिया जाए।
21तब ये लोग अपने पायजामों, अंगरखों, बागों और अन्य वस्रों सहित आग की धधकती हुई उस भट्ठी में फेंक दिए गए।
22राजा की दृढ़ आज्ञा के कारण भट्ठी की आंच अत्यधिक तेज कर दी गई थी, इसलिए उस आग की ज्वाला से वे पुरफ़ष जो शद्रक, मेशक और अबेद-नगो को भट्ठी में डालने ले गए थे, जल मरे।
23पर ये तीनों अर्थात् शद्रक, मेशक और अबेद-नगो धधकती हुई भट्ठी के बीच बंधे हुए आ गिरे।
24तब नबूकदनेस्सर राजा घबराकर शीघ्र उठ खड़ा हुआ और अपने उच्चाधिकारियों से पूछने लगा, “क्या हमने उस आग में तीन ही पुरफ़ष बंधे हुए नहीं डलवाए?” उन्होंने राजा को उत्तर दिया, “हे राजा यह सच है।”
25तब उसने कहा, “देखो, मैं चार पुरफ़षों को आग में खुला हुआ और बिना किसी हानि के चलते-फिरते देखता हूं और चौथे का रूप देव-सम है।
26तब नबूकदनेस्सर ने आग से धधकती हुई भट्ठी के द्वार के पास जाकर कहा, “हे शद्रक, मेशक, और अबेद-नगो, हे परमप्रधान परमेश्वर के दासो, बाहर निकलकर यहां आओ!” तब शद्रक, मेशक और अबेद-नगो आग में से निकल आए।
27और अधिपतियों, हाकिमों, राज्यपालों और राजा के मंत्रियों ने एकत्र होकर इन पुरफ़षों की ओर देखा कि न तो उनकी देह पर आग का कोई प्रभाव हुआ, न उनके सिर का एक बाल भी झुलसा, और न उनके पायजामें झुलसे यहां तक कि उनमें जलने की कुछ गन्ध भी नहीं आई।
28नबूकदनेस्सर ने कहा, “शद्रक, मेशक और अबेद-नगो का परमेश्वर धन्य हो, जिसने अपना दूत भेजकर अपने उन दासों को छुड़ाया जिन्होंने उस पर भरोसा रखते हुए, राजा की आज्ञा नहीं मानी और अपने शरीरों को अर्पित कर दिया, जिससे कि अपने परमेश्वर के सिवाय न तो अन्य देवता की उपासना करें और न उसको दण्डवत् करे।
29इसलिए यह मेरी आज्ञा है कि जिस जाति या देश या भाषा के लोग शद्रक, मेशक और अबेद-नगो के परमेश्वर की निन्दा करेंगे उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएंगे और उनके घर घूरे के ढेर बना दिए जाएंगे क्योंकि ऐसा कोई दूसरा देवता नहीं है जो इस प्रकार छुटकारा दे सके।”
30तब राजा ने शद्रक, मेशक और अबेद-नगो को बेबीलोन प्रान्त में और भी ऊंचा पद दिया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)