पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 12 / 34
व्यवस्थाविवरण 12
1“जब तक तुम पृथ्वी पर जीवित रहो तब तक उन विधियों और नियमों को, उस देश में जिसे तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने तुम्हे अधिकार में करने के लिए दिया है, मानने की चौकसी करना।
2जिन जातियों को तुम खदेड़ दोगे, वे जिन ऊंचे पहाड़ों और पहाड़ियों पर तथा हरे वृक्षों के नीचे अपने देवताओं की पूजा करते हैं, उन सब स्थानों को पूर्णतः नष्ट कर देना।
3तुम उनकी वेदियों को ढा देना, उनके पवित्र स्तम्भों को तोड़ डालना, तथा उनकी अशेराओं को जला डालना, उनके देवताओं की खुदी हुई मूर्तियों को काटकर गिरा देना, और उस स्थान से उनका नाम तक मिटा डालना।
4तुम अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना इस प्रकार मत करना।
5परन्तु तुम उसी स्थान में अपने यहोवा को खोजना जिसे तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे सब गोत्रों में से अपने निवास के लिए चुन लेगा कि वहां अपना नाम बनाए रखे और तुम वहीं जाया करना।
6वहीं तुम अपने-अपने होमबलि, बलिदान, दशमांश, उठाई हुई भेंट, मन्नत की वस्तुएं, स्वेच्छाबलि, तथा भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के पहलौठे ले जाया करना।
7वहीं तुम अपने परमेश्वर यहोवा के सामने अपने-अपने घराने समेत भोजन भी करना तथा जिन सब कामों पर तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आशीष दी है, उन सब के लिए आनन्द मनाना।
8जैसा कि आज हम कर रहे हैं कि िजसको जो भाता है वही करता है, वैसा तुम बिल्कुल न करना,
9क्योंकि तुम अभी तक उस विश्रामस्थान और उत्तराधिकार के भाग में नहीं पहुंचे हो जिसे तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हें दे रहा है।
10जब तुम यरदन पार कर उस देश में बस जाओ जिसे तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारा उत्तराधिकार होने के लिए तुम्हें दे रहा है, और वह तुम्हारे चारों ओर के सब शत्रुओं से तुम्हें विश्राम दे जिससे तुम निडर रहने लगो,
11तब जिस स्थान को तुम्हारा परमेश्वर यहोवा अपने निवास के लिए चुन लेगा, उस स्थान में वह सब ले जाया करना जिसकी मैं आज्ञा देता हूं अर्थात् अपने-अपने होमबलि, बलिदान, दशमांश, उठाई हुई भेंट, तथा वे सब उत्तम-उत्तम वस्तुएं जिन्हें देने की मन्नत तुम यहोवा से मानोगे।
12और तुम, अपने पुत्र-पुत्रियों, दास-दासियों तथा उस लेवी के साथ जो तुम्हारे फाटकों के भीतर रहता हो, जिसका तुम्हारे साथ कोई उत्तराधिकार या भाग न हो, वह भी अपने परमेश्वर यहोवा के सामने आनन्द मनाए।
13सावधान रहना कि जो भी पूजा-स्थल तेरे देखने में आए वहीं तू अपने होमबलि न चढ़ा दे।
14परन्तु यहोवा जिस स्थान को तेरे गोत्रों में से चुन ले, वहीं तू अपने होमबलि चढ़ाना और वह सब करना जिसकी आज्ञा मैं तुझे देता हू।
15“परन्तु तू अपने किसी भी फाटक के भीतर अपनी इच्छा और परमेश्वर यहोवा की दी हुई आशीषों के अनुसार पशु-वध करके जितना मन चाहे मांस खा सकता है। शुद्ध और अशुद्ध व्यक्ति दोनों ही इसे चिकारे और हिरन के मांस के समान खा सकते है।
16परन्तु तू केवल लहू मत खाना; तुम उसे जल के समान भूमि पर उंडेल देना।
17अपने अन्न, या नए दाखमधु, या तेल का दशमांश, अपने गाय-बैलों या भेड़-बकरियों के पहलौठे, अपनी मानी हुई मन्नतों की वस्तुएं, अपने स्वेच्छाबलि, अथवा अपने हाथ की उठाई हुई भेंटें, तुझे अपने फाटकों के भीतर उन्हें खाने की अनुमति नही है।
18परंतु तू उन्हें अपने परमेश्वर यहोवा के सामने उसी स्थान में खाना जिसे तेरा परमेश्वर यहोवा चुनेगा, अपने पुत्र-पुत्रियों, अपने दास-दासियों तथा उस लेवी के साथ जो तेरे फाटकों के भीतर रहता हो। तू अपने हाथ के सब कार्योर्ं के लिए अपने परमेश्वर यहोवा के सामने आनन्द मनाना।
19सावधान रहना, जब तक तू अपनी भूमि पर जीवित रहे, तब तक लेवीय को त्याग न देना।
20“जब यहोवा तेरा परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार तेरी सीमा को बढ़ाए, और तू कहे, ‘मैं मांस खाऊंगा,’ इसलिए कि तेरी मांस खाने की प्रबल इच्छा है तो जो तेरा जी चाहे वह मांस खा सकता है।
21तेरा परमेश्वर यहोवा जो स्थान अपना नाम बनाए रखने के लिए चुन ले वह यदि तुझसे दूर हो तो यहोवा ने जो गाय-बैल और भेड़-बकरियां तुझे दी हों उनमें से जो कुछ तेरा मन चाहे उसे तू मेरी आज्ञा के अनुसार मारकर अपने फाटकों के भीतर खा सकता है।
22जैसे चिकारे और हिरन का मांख खाया जाता है वैसे ही तू इसे भी खाना; शुद्ध और अशुद्ध व्यक्ति दोनों इसमें से खा सकते है।
23केवल यह ध्यान रहे कि तू लहू न खाए क्योंकि लहू प्राण है, और तू मांस के साथ प्राण कभी न खाना।
24तू इसे मत खाना, इसे जल के समान भूमि पर उंडेल देना।
25तू इसे मत खाना, क्योंकि ऐसा करके तू वही करेगा जो यहोवा की दृष्टि में उचित है। इससे तेरा, और तेरे पश्चात् तेरी सन्तान का भला होगा।
26परन्तु केवल वे ही पवित्र वस्तुएं जो तेरे पास हों तथा अपनी मन्नतों की वस्तुएं लेकर उसी स्थान को जाना जिसको यहोवा चुन लेगा।
27तू अपने होमबलियों के मांस और लहू को यहोवा अपने परमेश्वर की वेदी पर चढ़ाना; तेरे बलिदानों का लहू तेरे परमेश्वर यहोवा की वेदी पर उंडेल दिया जाए और तू मांस को खा लेना।
28जिन-जिन बातों की आज्ञा मैं तुझे देता हूं, उन्हें ध्यान से सुनना जिससे तेरे तथा तेरे पश्चात् तेरी सन्तान का सर्वदा भला हो, क्योंकि इस प्रकार तू वही करेगा जो तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और उचित है।
29“जब तेरा परमेश्वर यहोवा उन जातियों को जिनको तू खदेड़ने जा रहा है तेरे सामने से नष्ट कर डाले, तथा जब तू उनको खदेड़कर उनकी भूमि पर रहने लगे,
30तब सावधान रहना कि कहीं ऐसा न हो कि उनके नष्ट हो जाने के पश्चात् तू भी उनके पीछे-पीछे चलकर फंदे में फंस जाए, और तू उनके देवताओं के विषय में यह कहकर पूछताछ करने लगे कि ये जातियां अपने देवताओं की उपासना किस प्रकार करती हैं कि मैं भी वैसा ही करू।
31तुम अपने परमेश्वर यहोवा के साथ ऐसा व्यवहार मत करना, क्योंकि जितने घृणित कार्यों से यहोवा बैर रखता है उन सबको उन्होंने अपने देवताओं के लिए किया है, यहां तक कि वे अपने पुत्र-पुत्रियों को भी अपने देवताओं के लिए होम करते है।
32“मैं जो कुछ भी आज्ञा देता हूं, उसका पालन करने में चौकसी करना। तुम इसमें न तो कुछ जोड़ना और न घटाना।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)