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पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 22 / 34

व्यवस्थाविवरण 22

1“तू अपने जाति-भाई के बैल या भेड़ को भटकती देखकर अनदेखी मत करना। तू उसको निश्चय अपने भाई के पास पहुँचा देना।

2यदि तेरा वह भाई तेरे समीप न रहता हो अथवा यदि तू उसे न जानता हो तो पशु को अपने घर ले आना और वह उस समय तक तेरे पास रहे जब तक तेरा भाई उसकी खोज करने न आए, तब तू उसे लौटा देना।

3तू उसके गदहे और उसके वस्त्र वरन् अपने भाई की किसी भी खोई हुई वस्तु के साथ जिसे तूने पाया हो ऐसा ही करना। तू उनकी अनदेखी न करना।

4“तू अपने भाई के गदहे या बैल को मार्ग पर गिरा हुआ देख कर अनदेखी मत करना, तू उसको उठाने में उसकी सहायता अवश्य करना।

5“पुरफ़ष का पहरावा स्री न पहने और न स्री का पहरावा पुरफ़ष पहने क्योंकि ऐसा काम करने वाला तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में घृणित है।

6“यदि तू मार्ग पर जाते हुए किसी वृक्ष पर या भूमि पर किसी पक्षी का घोंसला देखे जिसमें बच्चे या अण्डे हों, और बच्चों या अण्डों पर मां बैठी हो तो तू बच्चों के साथ मां को मत ले जाना।

7तू मां को तो निश्चय छोड़ देना, परन्तु बच्चों को अपने लिए ले लेना जिससे तेरा भला हो और तू दीर्घायु हो।

8“जब तू नया घर बनाए तो अपने घर की छत पर मुण्डेर बनाना, ऐसा न हो कि कोई छत पर से गिर पड़े और तू अपने घराने पर खून का दोष लाए।

9“तू अपनी दाख की बारी में दो प्रकार के बीज मत बोना, ऐसा न हो कि उसकी सम्पूर्ण उपज, अर्थात् जो बीज तूने बोया है वह तथा दाख की बारी की उपज, दोनों अपवित्र हो जाए।

10तू बैल और गदहे को एक साथ जोतकर हल मत चलाना।

11ऊन और सूत के मिश्रण से बने वस्त्र न पहनना।

12“तू अपने ओढ़ने की चादर के चारों कोनों पर झालर लगाया करना।

13“यदि कोई पुरफ़ष किसी स्री को ब्याह ले तथा उसके पास जाए और बाद में उससे घृणा करे

14तथा उस पर लज्जाजनक कार्यों का दोष लगाए और यह कहकर उसे बदनाम करे कि मैंने इससे विवाह किया, परन्तु इसके पास आने पर इसे कुँवारी नहीं पाया,

15तब नगर-फाटक पर कन्या के माता-पिता नगर के प्राचीनों के सामने इस कन्या के कौमार्य का प्रमाण दे।

16कन्या का पिता प्राचीनों से कहे, ‘मैंने अपनी पुत्री इस पुरफ़ष को इसकी पत्नी होने के लिए दी, परन्तु उसने उससे घृणा की।

17और देखो, इसने यह कहकर कि मैंने तुम्हारी पुत्री को कुँवारी नहीं पाया, इस पर लज्जाजनक कार्यों का दोष लगाया है। परन्तु मेरी पुत्री कौमार्य का प्रमाण यह है।’ तब वे उस चादर को नगर के प्राचीनों के सामने फैला दे।

18फिर नगर के प्राचीन उस पुरफ़ष को प्रताड़ित करें,

19और वे उस पर चांदी के सौ शेकेल का दण्ड लगाएं, तथा कन्या के पिता को दें क्योंकि उस पुरफ़ष ने इस्राएल की एक कुँवारी को बदनाम किया है। कन्या उसी की पत्नी बनी रहे। उस कन्या को वह जीवन पर्यन्त न त्यागे।

20परन्तु यदि यह बात सच हो कि लड़की कुँवारी नहीं पाई गई,

21तो उस लड़की को उसके पिता के घर के पफ़ाटक के बाहर लाया जाए तथा उसके नगर के लोग पथराव करके उसको मार डालें क्योंकि उसने अपने पिता के घर में रहते हुए वेश्या के समान काम करके इस्राएल में मूर्खता की है। इस प्रकार तू अपने मध्य से ऐसी बुराई को मिटा डालना।

22“यदि कोई पुरफ़ष दूसरे पुरफ़ष की विवाहिता स्री के साथ सोता हुआ पकड़ा जाए तो जो पुरफ़ष उस स्री के साथ सोया था उसे और उस स्री, दोनों को मार डाला जाए। इस प्रकार तू इस बुराई को इस्राएल में से मिटा डालना।

23“यदि किसी कुँवारी कन्या की सगाई किसी पुरफ़ष से हो चुकी हो और कोई अन्य पुरफ़ष उसे नगर में पाकर उससे कुकर्म करे

24तो तुम उन दोनों को उस नगर के फाटक के बाहर ले जाना तथा दोनों को पथराव करके मार डालना। लड़की को इसलिए कि वह नगर में रहते हुए भी नहीं चिल्लाई तथा लड़के को इसलिए कि उसने अपने पड़ोसी की पत्नी का शील भंग किया है। इस प्रकार तू अपने मध्य से ऐसी बुराई को मिटा डालना।

25परन्तु उस लड़की को जिसकी सगाई हो चुकी हो यदि कोई पुरफ़ष मैदान में उससे बलात्कार करे तो केवल वह पुरफ़ष मार डाला जाए जिसने उससे बलात्कार किया हो।

26परन्तु तू उस लड़की से कुछ न कहना। उस लड़की का मृत्यु-दण्ड के योग्य कोई पाप नहीं है क्योंकि यह वैसा ही है मानो कोई व्यक्ति अपने पड़ोसी पर आक्रमण करके उसे मार डाले।

27जब उसने उस लड़की को जिसकी सगाई हो चुकी थी मैदान में पाया तब लड़की ने शोर तो मचाया, परन्तु उसको बचाने वाला वहां कोई न था।

28“यदि कोई पुरफ़ष किसी कुँवारी कन्या को पाए जिसकी सगाई नहीं हुई है, और उसे पकड़कर उससे कुकर्म करे तथा वे पकड़े जाएं,

29तो जिस पुरफ़ष ने उस कन्या से कुकर्म किया हो वह उस कन्या के पिता को पचास शेकेल चांदी दे तथा वह कन्या उसकी पत्नी हो जाए क्योंकि उसने उसका शील भंग किया है। वह अपने जीवन भर उसको त्यागने न पाए।

30“कोई पुरफ़ष अपने पिता की पत्नी से विवाह करके अपने पिता का तन न उघाड़े।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)