पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 23 / 34
व्यवस्थाविवरण 23
1“जिस पुरफ़ष के अण्ड कुचले गये या लिंग काट डाला गया हो वह यहोवा की मंडली में आने न पाए।
2कोई भी जारज सन्तान यहोवा की मंडली में प्रवेश न करे, वरन् दसवीं पीढ़ी तक उसके वंशजों में से भी कोई व्यक्ति यहोवा की मंडली में प्रवेश न करे।
3कोई अम्मोनी या मोआबी यहोवा की मंडली में प्रवेश न करे, वरन् उसके वंशजों में से उनकी दसवीं पीढ़ी तक कोई व्यक्ति यहोवा की मंडली में कभी प्रवेश न करने पाए,
4क्योंकि जब तुम मिस्र से निकलकर आ रहे थे तो उन्होंने रोटी-पानी लेकर तुमसे भेंट नहीं की, और इसलिए कि उन्होंने बओर के पुत्र बिलाम को तुझे शाप देने के लिए मेसोपोटामिया के पतोर से भाड़े पर बुलाया था।
5तो भी तेरे परमेश्वर यहोवा ने बिलाम की सुनने से इनकार किया और तेरे परमेश्वर यहोवा ने शाप को तेरे लिए आशीष में बदल दिया क्योंकि परमेश्वर यहोवा तुझसे प्रेम करता आया है।
6तू जीवन भर उनकी शान्ति और समृद्धि की कामना न करना।
7“तू किसी एदोमी से घृणा न करना क्योंकि वह तेरा भाई है। किसी मिस्री से भी घृणा मत करना क्योंकि तू उसके देश में परदेशी होकर रह चुका है।
8जो लोग उनकी तीसरी पीढ़ी में उत्पन्न हों वे यहोवा की मंडली में प्रवेश करने पाए।
9“जब तू सेना के साथ अपने शत्रुओं से युद्ध करने को जाए तो सब प्रकार की बुराई से बचे रहना।
10यदि तुम्हारे मध्य कोई पुरफ़ष रात्रि में वीर्यपात से अशुद्ध हो गया हो, तो वह छावनी के बाहर चला जाए वह छावनी के भीतर न आए।
11परन्तु ऐसा हो कि जब संध्या होने लगे तब वह जल से स्नान करे, तथा सूर्यास्त होने पर छावनी के भीतर लौट आए।
12तुम छावनी के बाहर एक स्थान ठहराना और शौच के लिए वहीं जाया करना।
13अपने अन्य साज-सामान के साथ एक बेलचा भी रखना। जब तू शौच के लिए बैठे तो उस से खोदना और फिर मल को ढाँप देना।
14क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तेरा छुटकारा करने तथा तेरे शत्रुओं को तेरे हाथ कर देने के लिए तेरी छावनी के मध्य घूमता-फिरता है इसलिए तेरी छावनी पवित्र रहे। वह तेरे मध्य किसी प्रकार की अशुद्धता न देखे ऐसा न हो कि वह तुझे छोड़कर चला जाए।
15“जो दास अपने स्वामी के पास से भागकर तेरी शरण ले उसे उसके स्वामी के हाथ न सौंपना।
16वह तेरे मध्य तेरे नगरों में से जिस नगर को चुन ले उसी में तेरे साथ रहे, तू उसके साथ दुर्व्यवहार न करना।
17“इस्राएल कन्याओं में से कोई देवदासी न बने और न कोई इस्राएल पुरफ़ष ऐसा करे।
18तू न तो वेश्यापन की कमाई और न किसी कुत्ते की कमाई को अपने परमेश्वर यहोवा के भवन में अपनी किसी मन्नत को पूरी करने के लिए लाना क्योंकि वे दोनों तेरे परमेश्वर यहोवा के सामने घृणित है।
19अपने जाति-भाइयों से रफ़पये, भोजन-वस्तु अथवा अन्य किसी वस्तु पर जो ब्याज पर दी जा सकती है ब्याज न लेना।
20तू परदेशी से ब्याज ले सकता है, परन्तु अपने जाति-भाई से ब्याज मत लेना जिससे तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसे तू अधिकार में करने के लिए प्रवेश करने पर है तेरे उन सब कामों में आशीष दे जिन पर तू हाथ लगाएगा।
21“जब तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिए मन्नत माने तो उसको पूरा करने में विलम्ब न करना क्योंकि वह तेरे लिए पाप ठहरेगा, और तेरा परमेश्वर यहोवा निश्चय इसका तुझसे लेखा लेगा।
22परन्तु यदि तू मन्नत न माने तो यह तेरे लिए पाप नहीं ठहरेगा।
23तेरे होंठों से जो कुछ निकले उसे अपने मुँह के वचन के अनुसार पूरा करने में चौकसी करना। जैसा कि तूने स्वेच्छा से अपने परमेश्वर यहोवा के लिए मन्नत मानी है।
24“जब तू अपने पड़ोसी की दाख की बारी में जाए तो जी भर के अंगूर खाना, परन्तु टोकरी में एक भी न रखना।
25जब तू अपने पड़ोसी की खड़ी फसल के खेत में जाए तो अपने हाथ से बालें तोड़ सकता है, परन्तु अपने पड़ोसी की खड़ी फसल पर हँसिया न लगाना।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)