पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 24 / 34
व्यवस्थाविवरण 24
1“यदि कोई पुरफ़ष किसी स्री से विवाह कर ले, और बाद में ऐसा हो कि उसमें कोई लज्जाजनक बात पाकर वह उसकी दृष्टि में अप्रिय लगे तब वह त्याग-पत्र लिखकर उसके हाथ में दे दे, और उसे अपने घर से बाहर निकाल दे,
2और वह स्त्री घर त्यागकर चली जाए तथा दूसरे पुरुष की पत्नी बन जाए,
3फिर यदि उसका दूसरा पति भी उससे घृणा करने लगे और त्यागपत्र लिखकर उस स्त्री के हाथ में दे और उसे अपने घर से निकाल दे, अथवा वह दूसरा पति मर जाए जिसने उसे अपनी पत्नी बनाया था,
4तो स्री के पहले पति को जिसने उसे निकाल-बाहर किया था अनुमति नहीं है कि वह उसे पुनः पत्नी बनाए क्योंकि वह स्री भ्रष्ट की जा चुकी है। यह यहोवा के सामने घृणित बात है और तुम उस देश पर जो तेरा यहोवा परमेश्वर तुझे उत्तराधिकार में देता है, पाप मत लाना।
5“नव-विवाहित पुरफ़ष सेना के साथ युद्ध में न जाए, और न उसे कोई कार्यभार सौंपा जाए; वह वर्ष भर अपने घर में छुट्टी पर रहे तथा अपनी विवाहिता को प्रसन्न करता रहे।
6“कोई मनुष्य चक्की या उसके ऊपरी पाट को बन्धक न रखे क्योंकि वह तो मानो प्राण को ही बन्धक रखना है।
7“यदि कोई मनुष्य अपने किसी इस्राएल भाई का अपहरण करता हुआ पकड़ा जाए और उसके साथ क्रूरता का व्यवहार करे या बेच डाले तो ऐसा चोर मार डाला जाए। इस प्रकार तुम ऐसी बुराई को अपने मध्य से मिटा डालना।
8“कुष्ठ रोग के प्रति चौकस रहना कि लेवीय याजक जो कुछ तुम्हें सिखाएं उसका यत्न से पालन करो तथा उसी के अनुसार चलो। जो आज्ञा मैंने उनको दी है तुम वैसा ही करने की चौकसी करना।
9स्मरण रखना कि जब तुम मिस्र से निकलकर आ रहे थे तब तेरे परमेश्वर यहोवा ने मार्ग में मरियम से क्या किया।
10“जब तू अपने पड़ोसी को किसी भी प्रकार का कर्ज दे, तब बन्धक लेने के लिए उसके घर में प्रवेश न करना।
11तू बाहर ही रहना। जिस मनुष्य को तूने कर्ज दिया है वह स्वयं बन्धक की वस्तु तेरे पास बाहर ले आए।
12यदि वह मनुष्य कंगाल हो तो उसका बन्धक अपने पास रखे हुए न सोना।
13सूर्यास्त होते ही तू उसका बन्धक उसको अवश्य लौटा देना कि वह अपना ओढ़ना ओढ़कर सो सके तथा तुझे आशीर्वाद दे। यह तेरे परमेश्वर यहोवा के सामने तेरे लिए धार्मिकता गिनी जाएगी।
14“तू किसी दीन-दरिद्र मजदूर को मत सताना, चाहे वह तेरे जाति-भाइयों में से, चाहे तुम्हारे देश के फाटकों के भीतर रहने वाले परदेशियों में से हो।
15तू उसकी मजदूरी उसी दिन सूर्यास्त से पहले दे देना क्योंकि वह दरिद्र है तथा उसका मन उसी पर लगा रहता है, कहीं ऐसा न हो कि वह तेरे विरफ़द्ध यहोवा की दुहाई दे और यह तेरे लिए पाप ठहरे।
16“न तो पुत्र के कारण पिता, और न पिता के कारण पुत्र मार डाला जाए। प्रत्येक अपने ही पाप के कारण मारा जाए।
17“किसी परदेशी या अनाथ का न्याय न बिगाड़ना, न किसी विधवा का वस्र बन्धक रखना।
18परन्तु स्मरण रखना कि तू मिस्र में दास था और कि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे वहां से छुड़ा लाया। इसीलिए मैं तुझे ऐसा करने की आज्ञा दे रहा हूँ।
19“जब तू अपने खेत की फसल काटे और कोई पूला खेत में भूल जाए तो उसे लेने के लिए फिर न जाना। वह किसी परदेशी या अनाथ या विधवा के लिए हो कि तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे हाथ के सब कामों पर तुझे आशीष दे।
20जब तू अपने जैतून-वृक्ष को झाड़े तो उसकी डालियों को दूसरी बार मत झाड़ना। वह परदेशी, अनाथ और विधवा के लिए रह जाए।
21जब तू अपनी दाख की बारी से अंगूर तोड़े तो दूसरी बार वहां फल तोड़ने न जाना। वह परदेशी, अनाथ और विधवा के लिए हो।
22स्मरण रखना कि तू मिस्र में दास था। इसीलिए मैं तुझे ऐसा करने की आज्ञा दे रहा हूँ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)