पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 25 / 34
व्यवस्थाविवरण 25
1“यदि लोगों के बीच कोई झगड़ा हो, और वे न्यायालय जाएं, और न्यायाधीश उनके मामले का निर्णय करके धर्मी को निर्दोष तथा दुष्ट को दोषी ठहराए,
2तब ऐसा हो कि यदि दोषी कोड़े लगने का दण्ड पाए तो न्यायाधीश उसे लिटाकर उसके अपराध के अनुसार गिन-गिनकर अपने सामने कोड़े लगवाए।
3वह उसे चालीस कोड़े तक लगवा सकता है, इससे अधिक नही। ऐसा न हो कि वह अधिक कोड़े लगवाए और तेरा भाई तेरी दृष्टि में तुच्छ ठहराया जाए।
4“दांवते समय बैल का मुंह न बांधना।
5“जब कई भाई रहते हों और उनमें से कोई एक निस्सन्तान मर जाए तो मृतक की पत्नी का विवाह परिवार से बाहर किसी अन्य पुरफ़ष से न हो। उसके पति का भाई उसके पास जाकर उसे अपनी पत्नी बना ले, तथा उसके साथ पति के भाई का कर्त्तव्य पूरा करे।
6तब ऐसा हो कि उस स्री का पहलौठा पुत्र मृतक भाई के नाम का कहलाए जिससे उस भाई का नाम इस्राएल में से मिट न जाए।
7यदि वह पुरफ़ष अपने भाई की पत्नी को ग्रहण करना न चाहे तो उसके भाई की पत्नी फाटक पर प्राचीनों के पास जाकर कहेः ‘मेरे पति का भाई इस्राएल में अपने भाई का नाम बनाए रखने से इनकार करता है। वह मुझसे पति के भाई का कर्त्तव्य पूरा करना नहीं चाहता।’
8तब नगर के प्राचीन उसे बुलाकर उससे बातचीत करे। तब यदि वह अपनी बात पर अडिग रहकर कहेः ‘मैं उसे पत्नी बनाना नहीं चाहता।’
9तो उसके भाई की पत्नी प्राचीनों के देखते उसके पास जाकर उसके पांव से उसकी जूती उतारे और उसके मुँह पर थूक दे। फिर स्री यह कहेः ‘जो पुरफ़ष अपने भाई के वंश को चलाना न चाहे, उस पुरफ़ष के साथ ऐसा ही किया जाता है।’
10तब इस्राएल में उस पुरफ़ष का यह नाम पड़ जाएगाः ‘जूती उतारे हुए पुरफ़ष का घराना।’
11“यदि दो पुरफ़ष अर्थात् जाति-भाई आपस में हाथापाई कर रहे हों और यदि एक की पत्नी मारने वाले के हाथ से अपने पति को छुड़ाने के लिए समीप आए तथा अपना हाथ बढ़ाकर उस मारने वाले के गुप्तांग को पकड़ ले,
12तो तू उसके हाथ को काट डालना, तू उस पर तनिक भी दया न करना।
13“तू अपनी थैली में एक ही वजन के छोटे-बड़े बाट मत रखना।
14तू अपने घर में भी एक ही माप के छोटे-बड़े नपुए मत रखना।
15तेरे बाट और तेरे नपुए दोनों, पूरे-पूरे और सही हों जिससे कि जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देने पर है उसमें तू बहुत दिन रहने पाए।
16क्योंकि जो कोई इस प्रकार के कुटिल कार्य करता है वह तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में घृणित है।
17“स्मरण रख कि जब तू मिस्र से निकलकर आ रहा था तो अमालेक ने मार्ग में तेरे साथ क्या किया
18अर्थात् मार्ग में वह तुझसे मिला और जब तू थका-मांदा था, तब पिछड़ गए लोगों पर उसने आक्रमण किया। उसने परमेश्वर का तनिक भी भय नहीं माना।
19इसलिए ऐसा करना कि जब तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे चारों ओर के शत्रुओं से उस देश में जो वह तुझे अधिकार में करने के लिए उत्तराधिकार में दे रहा है, तुझे विश्राम दे तो तू आकाश के नीचे से अमालेक की स्मृति तक मिटा डालना। तू इसे कदापि न भूलना।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)