Loading account

पुराना नियम · सभोपदेशक · अध्याय 8 / 12

सभोपदेशक 8

1बुद्धिमान के समान कौन है? किसी बात का अर्थ कौन बता सकता है? मनुष्य की बुद्धिमानी उसके मुख को प्रदीप्त कर देती, तथा उसके कठोर मुख को चमका देती है।

2मैं कहता हूं, “परमेश्वर की शपथ के कारण राजा की आज्ञा को मान।

3उसकी उपस्थिति से दूर होने में उतावली मत कर। किसी बुरी बात में साथ मत दे, क्योंकि वह जो करना चाहेगा वही करेगा।”

4इसलिए कि राजा का वचन अधिकारपूर्ण होता है, उससे कौन कह सकता है, “यह तू क्या करता है?”

5जो राजाज्ञा का पालन करता है वह विपत्ति में नहीं पड़ता, क्योंकि बुद्धिमान मनुष्य उचित समय और कार्य-विधि को जानता है।

6प्रत्येक आनन्द के लिए उचित समय और विधान होता है, यघपि मनुष्य का दुख उससे ऊंचा रहता है।

7जब कोई जानता ही नहीं कि क्या होगा तो वह कैसे बता सकता है कि कब होगा?

8जैसे वायु को कोई नहीं रोक सकता वैसे ही मृत्यु के दिन पर किसी का अधिकार नहीं कि उसे रोक सके, युद्ध के समय किसी को सेवामुक्त नहीं किया जाता, बुराई करने वाले को उसकी बुराई नहीं छुड़ा सकती।

9इन बातों को मैंने देखा है, और सूर्य के नीचे जो भी काम किया गया है उस पर अपना मन लगाया, जहां मनुष्य ने दूसरे पर अधिकार जमा कर अपनी ही हानि की है।

10फिर मैंने दुष्टों को गाड़े जाते देखा है, उनको जो पवित्रस्थान में आते-जाते थे, और वे शीघ्र अपने ही नगर में भुला दिए गए जहां वे यह सब किया करते थे। यह भी व्यर्थ है!

11इसलिए कि बुरे कार्य का दण्ड शीघ्र नहीं दिया जाता, उनके बीच रहने वालों का मन बुराई करने में पूर्णतः लिप्त रहता है।

12यघपि पापी सैकड़ों दुष्कर्म करते हुए अपना जीवन-काल बढ़ा ले, फिर भी मैं जानता हूं कि जो परमेश्वर का भय मानते, हां, जो प्रकट रूप से भय मानते हुए चलते हैं उनका भला ही होगा।

13परन्तु दुष्ट मनुष्य का भला नहीं होगा, और वह अपने दिन छाया के समान नहीं बढ़ा सकेगा, क्योंकि वह परमेश्वर का भय नहीं मानता।

14एक व्यर्थ बात है जो पृथ्वी पर होती है, अर्थात् कुछ धर्मी मनुष्य हैं जिनको दुष्टों के कार्यों के अनुसार फल मिलता है, तो दूसरी ओर, कुछ बुरे लोग हैं जिनको धर्मी व्यक्तियों के कामों के अनुसार फल मिलता है। मैं कहता हूं कि यह भी व्यर्थ है।

15अतः मैंने सुख-विलास की सराहना की, क्योंकि सूर्य के नीचे मनुष्य के लिए इससे अच्छा और कुछ नहीं कि वह खाए-पीए और आनन्द करे। क्योंकि सूर्य के नीचे परमेश्वर ने उसे जीवन के जितने दिन दिए हैं, उतने दिन उसके परिश्रम में उसके साथ यही बना रहेगा।

16जब मैंने बुद्धिमानी को जानने तथा उन कामों को देखने के लिए मन लगाया जो पृथ्वी पर बिना आंख झपकाए किए गए हैं,

17तब मैंने परमेश्वर के प्रत्येक काम को देखा। मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मनुष्य उन कामों का भेद नहीं जान सकता जो सूर्य के नीचे किए गए है। चाहे मनुष्य उसकी खोजबीन कितने ही परिश्रम से करे, वह भेद नहीं जान सकता; और चाहे बुद्धिमान कितना ही कहे, “मैं जानता हूं,” वह भेद नहीं पा सकता।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)