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पुराना नियम · एस्तेर · अध्याय 3 / 10

एस्तेर 3

1इन घटनाओं के पश्चात् क्षयर्ष राजा ने अगागी हम्मदाता के पुत्र हामान की पदोन्नति कर दी और उसे सम्मान देकर सब सहकर्मी अधिकारियों के ऊपर उच्च पद दिया।

2और राजा के सब कर्मचारी जो राजभवन के फाटक पर थे हामान के सामने झुक कर उसे दण्डवत् करते थे, क्योंकि उसके विषय में राजा की यही आज्ञा थी। पर मोर्दकै न तो झुकता और न दण्डवत् करता था।

3तब राजा के कर्मचारियों ने जो राजभवन के फाटक पर रहते थे, मोर्दकै से पूछा, “तू राजा की आज्ञा का उल्लंघन क्यों करता है?”

4जब वे प्रतिदिन उससे पूछते रहे और उसने न सुना तो उन्होंने हामान को बता दिया, यह देखने के लिए कि मोर्दकै की यह बात स्वीकार होगी या नहीं; क्योंकि मोर्दकै ने उनको बता दिया था कि मैं यहूदी हू।

5जब हामान ने देखा कि मोर्दकै न तो झुकता और न दण्डवत् करता है तो वह क्रोध से भर गया।

6परन्तु उसने केवल मोर्दकै पर ही हाथ उठाना अपनी मार्यादा के विपरीत समझा, क्योंकि उसे मोर्दकै की जाति बता दी गई थी, इसलिए हामान ने क्षयर्ष के राज्य में रहनेवाले सभी यहूदियों अर्थात् मोर्दकै की जाति के लोगों का नष्ट करने की युक्ति निकाली।

7क्षयर्ष राजा के राज्य के बारहवें वर्ष के पहले माह अर्थात् नीसान में हामान ने प्रत्येक दिन और प्रत्येक माह के नाम से पूर अर्थात् चिट्ठी डलवाई, और बारहवें माह अर्थात् अदार के नाम पर निकली।

8तब हामान ने राजा क्षयर्ष से कहा, “तेरे राज्य के समस्त प्रान्तों में एक जाति के लोग सब जातियों के मध्य यहां वहां फैले हुए है। उनके नियम अन्य सब जातियों से भिन्न हैं, और वे राजा के कानून का पालन नहीं करते, इसलिए उनका यहां रहना राजा के हित में नहीं है।

9यदि राजा को यह उचित जान पड़े तो उनका विनाश करने की एक राजाज्ञा निकाली जाए और मैं इस कार्य के करने वालों को दस हज़ार किक्कार चांदी दूंगा कि वे उसे राजा के ख़जाने में जमा करे।”

10तब राजा ने अपने हाथ से अंगूठी उतार कर अगागी हम्मदाता के पुत्र हामान को, जो यहूदियों का बैरी था, दे दी।

11और राजा ने हामान से कहा, “यह चांदी और वे लोग भी तुझे दिए जाते हैं, तू उनके साथ जो उचित समझे वही कर।”

12तब पहले महीने के तेरहवें दिन राजा के लिपिक बुलाए गए और हामान ने राजा के सब अधिपतियों और सब प्रान्तों के प्रधानों और देश देश के लोगों के उच्चाधिकारियों को जो आज्ञा दी, उसके अनुसार चिट्ठियां लिखी गईं, और प्रत्येक प्रांत की लिपि में तथा प्रत्येक देश की भाषा में क्षयर्ष राजा के नाम से पत्र लिखे गए, और उनमें राजा की अगूंठी की छाप अंकित की गई।

13और राजा के सब प्रान्तों में डाकियों के द्वारा चिट्ठियां भेजी गईं कि अदार नाम के बारहवें माह के तेरहवें दिन अर्थात् एक ही दिन में सब यहूदी चाहे जवान हों या बूढ़े, स्त्री हों या बालक, नष्ट कर दिए जाएं, मार डाले जाएं, और मिटा डाले जाएं, और उनकी धन-सम्पत्ति लूट ली जाए।

14इस राजाज्ञा की प्रतियां सब देशों के लोगों को भेजी गईं कि यह आज्ञा प्रत्येक प्रान्त में कानून के रूप में लागू की जाए और लोग उस दिन के लिए तैयार रहे।

15यह आज्ञा राजधानी शूशन में दी गई; और राजा की आज्ञा से डाकिए तुरन्त निकल गए। राजा और हामान तो दाखमधु पीने बैठ गए पर शूशन नगर में घबराहट फैल गई।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)