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पुराना नियम · एस्तेर · अध्याय 4 / 10

एस्तेर 4

1जब मोर्दकै को इन सब कार्यवाहियों का पता चला तब उसने अपने वस्त्र फाड़ डाले और टाट ओढ़कर अपने ऊपर राख डाली, और नगर के मध्य जाकर जोर-जोर से रोने-चिल्लाने लगा।

2और वह राजभवन के फाटक तक गया, क्योंकि टाट पहने हुए किसी को राजभवन के फाटक के भीतर प्रवेश करने की आज्ञा नहीं थी।

3और प्रत्येक प्रान्त में जहां कहीं राजाज्ञा पहुंची वहां यहूदियों के मध्य बड़ा विलाप हुआ, और वे उपवास करने तथा रोने-पीटने लगे, और कई तो टाट ओढ़कर राख पर पड़े रहे।

4एस्तेर की सहेलियों और खोजों ने जाकर उसको बता दिया, तब रानी घोर व्यथा से भर गई और उसने मोर्दकै के पास वस्त्र भेजे कि वह टाट उतारकर उन्हें पहन ले, परन्तु उसने उन्हें नहीं लिया।

5तब एस्तेर ने राजा के खोजों में से हताक को जिसे राजा ने उसकी सेवा के लिए नियुक्त किया था, बुलाया और उसे आज्ञा दी कि वह मोर्दकै के पास जाकर पता लगाए कि यह सब क्या है? और इसका क्या कारण है?

6तब हताक राजभवन के फाटक के सामने नगर के चौक में मोर्दकै के पास गया।

7मोर्दकै ने जो कुछ उसके साथ हुआ था सब बता दिया, और यह भी कि यहूदियों के विनाश के लिए हामान ने कितनी चांदी राजकीय ख़जाने में जमा करने का वचन दिया है।

8उसने उस राजाज्ञा की एक नकल भी उसे दी जो उनके विनाश के लिए शूशन में निकाली गई थी, जिससे वह एस्तेर को दिखाए और बताए तथा यह आज्ञा पहुंचाए कि वह राजा के पास जाकर अपने लोगों के लिए गिड़गिड़ा कर विनती करे।

9हताक लौटकर आया और उसने एस्तेर को मोर्दकै की सब बातें बतला दी।

10तब एस्तेर ने हताक से बातें कीं और उसको मोर्दकै से यह कहने की आज्ञा दीः

11“राजा के सब कर्मचारी और राज्य के प्रान्तों के लोग यह जानते हैं कि कोई भी, चाहे स्त्री हो अथवा पुरुष, यदि बिना बुलाए राजा के भीतरी आंगन में प्रवेश करे तो उसके लिए एक ही कानून है, अर्थात् मृत्युदण्ड। इससे केवल वही बच सकता है जिसकी ओर राजा सोने का राजदण्ड बढ़ाए, और मैं तो इन तीस दिनों से राजा के पास नहीं बुलाई गई हू।”

12मोर्दकै को एस्तेर की ये बातें बताई गईं।

13तब मोर्दकै ने एस्तेर के पास यह उत्तर भेजाः “तू इस बात की कल्पना भी न कर कि मैं राजभवन में रहने के कारण अन्य सब यहूदियों में से बची रहूंगी।

14यदि तू इस समय चुपचाप रहे तो अन्य किसी न किसी उपाय से यहूदियों का छुटकारा और उद्धार हो ही जाएगा, परन्तु तू अपने पिता के घराने सहित नष्ट हो जाएगी। फिर क्या जाने तुझे ऐसे ही समय के लिए राजपद मिल गया हो?”

15तब एस्तेर ने मोर्दकै के पास यह कहलवा भेजाः

16“तू जाकर शूशन के समस्त यहूदियों को एकत्रित कर और तुम सब मेरे लिए उपवास करो। तीन दिन और तीन रात न तो कुछ खाओ और न पीयो, और मैं भी अपनी सहेलियों सहित ऐसा ही उपवास करूंगी। इस प्रकार मैं राजा के पास जाऊंगी, यघपि यह नियम के विरुद्ध है। और यदि मैं नष्ट हो गई तो हो गई।”

17तब मोर्दकै ने जाकर वही किया जिसकी आज्ञा एस्तेर ने दी थी।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)