पुराना नियम · एस्तेर · अध्याय 5 / 10
एस्तेर 5
1तीसरे दिन ऐसा हुआ कि एस्तेर राजकीय वस्त्र पहनकर राजभवन के भीतरी आंगन में राजनिवास के सम्मुख खड़ी हो गई, और राजनिवास में, राजमहल के प्रवेश-द्वार के सामने राजा अपने सिंहासन पर आसीन था।
2और ऐसा हुआ कि जब राजा ने एस्तेर रानी को भीतरी आंगन में खड़े देखा, तो उस पर कृपा-दृष्टि की, और उसने अपने हाथ में रखे हुए सोने के राजदण्ड को एस्तेर की ओर बढ़ाया, तब एस्तेर ने आगे बढ़कर राजदण्ड के सिरे को छुआ।
3राजा ने उससे पूछा, “हे एस्तेर रानी, तू क्या चाहती है? तेरा क्या निवेदन है? मैं तुझे आधा राज्य तक दे दूंगा।”
4तब एस्तेर ने उत्तर दिया, “यदि राजा को स्वीकार हो तो हामान के साथ राजा उस भोज में सम्मिलित हो जो मैंने आज राजा के लिए तैयार किया है।”
5तब राजा ने कहा, “हामान को शीघ्र बुलाओ कि हम एस्तेर के इच्छानुसार करे।” इस प्रकार राजा और हामान उस भोज में गए जिसे एस्तेर ने तैयार किया था।
6जब भोज में दाखमधु पीया जा रहा था, तब राजा ने एस्तेर से पूछा, तेरा अनुरोध क्या है? वह पूरा किया जाएगा। तेरा क्या निवेदन है? आधा राज्य तक तुझे दे दिया जाएगा।”
7तब एस्तेर ने उत्तर दिया, “मेरी मांग और मेरा निवेदन यह हैः
8यदि मुझ पर राजा की कृपा-दृष्टि हुई है और यदि राजा को मेरा यह निवेदन सुनना और जो मैं मांगूं उसे पूरा करना स्वीकार हो तो राजा और हामान मेरे उस भोज में पधारें जो मैं उनके लिए तैयार करूंगी, और कल मैं राजा के वचन के अनुसार करूंगी।”
9उस दिन हामान आनन्द से प्रफुल्लित होकर बाहर निकला, पर जब उसने मोर्दकै को राजभवन के फाटक पर देखा कि वह न तो खड़ा हुआ और न हटा, तब मोर्दकै के प्रति हामान क्रोध से भर गया।
10परन्तु हामान ने अपने आपको संयत किया, और घर जाकर अपने मित्रों और अपनी पत्नी जेरेश को बुलवाया।
11तब हामान ने उनसे अपने धन के वैभव का, अपने पुत्रों की बड़ी संख्या का तथा राजा ने उसे कब-कब पदोन्नत किया व किस प्रकार सब कर्मचारियों और अधिकारियों से ऊंचा पद दिया-इन सबका वर्णन किया।
12हामान ने उन्हें यह भी बताया, “रानी एस्तेर ने भी अपने भोज में मुझे छोड़ और किसी दूसरे को राजा के साथ नहीं बुलाया, और कल भी राजा के साथ मुझे निमंत्रित किया है।
13परन्तु जब-जब मैं उस यहूदी मोर्दकै को राजभवन के फाटक पर बैठा हुआ देखता हूं तो इन सबके होते हुए भी मुझे चैन नहीं मिलता।”
14तब उसकी पत्नी जेरेश और उसके सब मित्रों ने उससे कहा, “पचास हाथ ऊंचा फांसी का खम्भा बनवा ले, और प्रातःकाल राजा से कह कि उस पर मोर्दकै को लटका दिया जाए और तब राजा के साथ आनन्द से भोज में जा।” यह सलाह हामान को अच्छी लगी और उसने फांसी का एक खम्भा बनवाया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)