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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 10 / 40

निर्गमन 10

1तब यहोवा ने मूसा से कहा, “फि़रौन के पास जा, क्योंकि मैंने ही उसके हृदय और उसके कर्मचारियों के हृदय को कठोर कर दिया है, जिससे कि मैं अपने ये चिह्न उनके मध्य दिखाऊं,

2और तुम अपने पुत्रों और अपने पोतों के कान में यह कह सको कि किस प्रकार मैंने मिस्रियों का ठट्ठा उड़ाया और कैसे मैंने उनके मध्य चिह्न दिखाए, जिससे कि तुम जान लो कि मैं ही यहोवा हू।”

3तब मूसा और हारून ने फि़रौन के पास जाकर उससे कहा, “इब्रानियों का परमेश्वर यहोवा यों कहता हैः तू कब तक मेरे सम्मुख दीन होने से इन्कार करेगा? मेरे लोगों को जाने दे कि वे मेरी उपासना करें,

4क्योंकि यदि तू मेरी प्रजा को जाने देने से इनकार करे, तो देख, कल मैं तेरे देश में टिड्डियां ले आऊंगा।

5वे भूमि की सतह को ऐसे ढँंक लेंगी कि भूमि को कोई देख भी न सकेगा, और जो शेष रह गया है अर्थात् ओलों से तुम्हारे लिए जो कुछ बचा है उसे भी वे चट कर जाएंगी, तथा मैदान में तुम्हारे जितने भी वृक्ष लगे हैं, उन्हें भी वे चट कर जाएंगी।

6तब वे तेरे सब घरों और तेरे सब कर्मचारियों के घरों यहां तक कि सब मिस्रियों के घरों में भर जाएंगी-ऐसा न तो तेरे बाप-दादों ने और न तेरे पूर्वजों ने जबसे वे पृथ्वी पर थे तबसे लेकर आज तक कभी देखा।” और वह मुड़कर फि़रौन के पास से चला गया।

7तब फि़रौन के कर्मचारियों ने उससे कहा, “यह मनुष्य कब तक हमारे लिए फन्दा बना रहेगा? उन पुरुषों को जाने दे कि वे अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना करे। क्या तुझे मालूम नहीं कि मिस्र नष्ट हो गया है?”

8अतः मूसा और हारून फि़रौन के पास फिर लाए गए, और उसने उनसे कहा, “जाओ, अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना करो! लेकिन जाने वाले कौन-कौन हैं?”

9मूसा ने कहा, “हम अपने जवानों और बूढ़ों, अपने पुत्रों और पुत्रियों, अपनी भेड़-बकरियों, और अपने गाय-बैलों सहित जाएंगे, क्योंकि हमें अपने यहोवा के लिए पर्व मनाना है।”

10तब उसने उनसे कहा, “यदि मैं तुम्हें बच्चों सहित जाने दूं, तो यहोवा ही तुम्हारा भला करे। सावधान, तुम्हारे मन में बुराई है!

11नहीं, ऐसा नहीं होगा! केवल पुरुष ही जाकर यहोवा की उपासना करें, क्योंकि यही तो तुम चाहते हो।” और वे फि़रौन की उपस्थिति से निकाल दिए गए।

12तब यहोवा ने मूसा से कहा, “मिस्र देश पर अपना हाथ बढ़ा, कि टिड्डियां मिस्र की भूमि पर आकर भूमि के प्रत्येक पौधे को, यहां तक कि जो कुछ ओलों से बचा है उसे भी चट कर जाए।”

13अतः मूसा ने अपनी लाठी को मिस्र देश पर बढ़ाया, और यहोवा ने पूरे दिन और रात भर देश पर पूर्वी हवा चलाई, और जब भोर हुआ तो पूर्वी हवा अपने साथ टिड्डियां ले आई।

14और समस्त मिस्र देश में टिड्डियां छा गईं और मिस्र देश के प्रत्येक स्थान में फैल गईं। वे तो संख्या में अनगिनत थी। न तो इससे पूर्व टिड्डियां आईं और न इसके पश्चात् आएंगी।

15क्योंकि उन्होंने तो समस्त भूमि की सतह को ऐसा ढँंक लिया था कि देश में अन्धकार छा गया। और उन्होंने उस देश के सब पौधों को तथा वृक्षों के सब फलों को जो ओलों से बचे थे, खा लिया। इस प्रकार समस्त मिस्र देश में न तो वृक्षों पर हरियाली रही और न खेत में कोई पौधा ही बचा।

16तब फि़रौन ने फुर्ती से मूसा और हारून को बुलवाया और उसने कहा, “मैंने तो तुम्हारे परमेश्वर यहोवा और तुम्हारे विरुद्ध पाप किया है।

17इसलिए केवल इस बार मेरा पाप क्षमा करो और अपने परमेश्वर यहोवा से विनती करो कि वह केवल इस मृत्यु को मुझ पर से दूर कर दे।”

18अतः उसने फि़रौन के पास से निकलकर यहोवा से विनती की।

19और यहोवा ने हवा की दिशा बदलकर प्रचण्ड पश्चिमी हवा बहाई जिसने टिड्डियों को उड़ाकर लाल समुद्र में डाल दिया और मिस्र के किसी भी क्षेत्र में एक भी टिड्डी न रह गई।

20परन्तु यहोवा ने फि़रौन के हृदय को कठोर कर दिया, और उसने इस्राएलियों को जाने नहीं दिया।

21तब यहोवा ने मूसा से कहा, "अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ा कि मिस्र देश पर अन्धकार छा जाए, वरन् ऐसा अन्धकार जिसे टटोला जा सके।"

22अतः मूसा ने अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ाया और समस्त मिस्र देश में तीन दिन तक सघन अन्धकार छाया रहा।

23तीन दिन तक वे एक दूसरे को न देख सके और न ही कोई अपने स्थान से हिला, परन्तु सब इस्राएलियों के घरों में उजियाला था।

24तब फि़रौन ने मूसा को बुलवाकर कहा, “जाओ, यहोवा की उपासना करो, केवल तुम्हारी भेड़-बकरियां और गाय-बैल यहीं रहें-तुम्हारे बाल-बच्चे भी तुम्हारे साथ जा सकते है।”

25परन्तु मूसा ने कहा, “तुझको हमारे हाथ मेलबलि और होमबलि के पशु भी देने पड़ेगें कि हम उन्हें यहोवा अपने परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाए।

26इसलिए हमारे पालतू पशु भी हमारे साथ जाएंगे। उनका एक खुर भी पीछे छोड़ा न जाएगा, उन्हीं में से हमको अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना के लिए कुछ लेना होगा। और जब तक हम वहां पहुंच न जाएं हम स्वयं नहीं जानते कि क्या-क्या लेकर यहोवा की उपासना करनी होगी।”

27परन्तु यहोवा ने फि़रौन का हृदय कठोर कर दिया जिससे उसने उन्हें जाने न दिया।

28और फि़रौन ने उससे कहा, “मुझसे दूर हो जा! सावधान! तूमेरे सम्मुख फिर मत आना, क्योंकि जिस दिन तू मेरे सम्मुख आएगा तू मर जाएगा।”

29तब मूसा ने कहा, “तू ठीक कहता हैः मैं तेरे सम्मुख फिर कभी न आऊंगा!”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)