पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 11 / 40
निर्गमन 11
1फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “एक और विपत्ति मैं फि़रौन और मिस्र पर डालूंगा, इसके बाद वह तुम्हें यहां से जाने देगा। जब वह तुम्हें जाने देगा तो सचमुच पूरी रीति से तुम्हें भगा देगा।
2अब तू मेरी प्रजा के कान में यह बात डाल दे कि हर एक पुरुष अपने पड़ोसी से और हर एक स्त्री अपनी पड़ोसिन से सोने-चांदी की वस्तुएं मांग ले।”
3और यहोवा ने अपनी प्रजा के प्रति मिस्रियों को दयालु किया। इसके अतिरिक्त वह व्यक्ति मूसा मिस्र देश में फि़रौन के कर्मचारियों और प्रजा के लोगों, दोनों ही की दृष्टि में अति प्रतिष्ठित था।
4तब मूसा ने कहा, “यहोवा यह कहता हैः आधी रात के लगभग मैं मिस्र देश के बीच में से होकर निकलूंगा,
5और सिंहासन पर विराजने वाले फि़रौन के पहलौठे से लेकर चक्की पीसने वाली दासी के पहलौठे तक, वरन् पशुओं के भी अर्थात् मिस्र देश के सब पहलौठे मर जाएंगे।
6और सारे मिस्र देश में बड़ा हाहाकार मचेगा, यहां तक कि उसके समान न तो कभी हुआ और न होगा।
7परन्तु इस्राएलियों के विरुद्ध चाहे वह मनुष्य हों या उनके पशु कोई कुत्ता भी न भौंकेगा जिससे कि तुम जान लो कि मिस्रियों और इस्राएलियों में मैं यहोवा कैसा भेद करता हू।
8और तेरे ये सब कर्मचारी मेरे पास आकर मुझे दण्डवत् करके कहेंगे, ‘तू अपने सब अनुयायियों समेत निकल जा। और उसके पश्चात् मैं निकल जाऊंगा’।” और वह बड़े क्रोध में फि़रौन के पास से निकल गया।
9तब यहोवा ने मूसा से कहा, “फि़रौन तुम्हारी न सुनेगा, जिससे कि मिस्र देश में मेरे अद्भुत कार्य और भी अधिक हो।”
10मूसा और हारून ने फि़रौन के सामने ये सब अद्भुत कार्य दिखाए, फिर भी यहोवा ने फि़रौन के हृदय को कठोर कर दिया और उसने इस्राएलियों को अपने देश से बाहर न जाने दिया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)