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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 9 / 40

निर्गमन 9

1तब यहोवा ने मूसा से कहा, “फि़रौन के पास जा और उससे कह, ‘इब्रानियों का परमेश्वर यहोवा यों कहता हैः मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे कि वे मेरी उपासना करे।

2क्योंकि यदि तू उन्हें जाने न दे और रोके रहे,

3तो देख, तेरे पशु अर्थात् घोड़े, गदहे, ऊंट, गाय-बैल, और भेड़-बकरियां जो मैदान में हैं उन पर यहोवा का हाथ भयानक महामारी के साथ आ पड़ेगा।

4परन्तु यहोवा इस्राएलियों के पशुओं में और मिस्रियों के पशुओं में ऐसा अन्तर करेगा कि जो इस्राएलियों के हैं उनमें से कोई भी न मरेगा’।”

5फिर यहोवा ने यह कहकर एक निश्चित समय ठहरायाः “मैं यहोवा यह काम इस देश में कल करूंगा।”

6अतः यहोवा ने दूसरे दिन ऐसा ही किया, और मिस्र के तो सब पशु मर गए, परन्तु इस्राएलियों का एक भी पशु न मरा।

7और फि़रौन ने लोगों को भेजा, पर इस्राएलियों के पशुओं में से एक भी नहीं मरा। फिर भी फि़रौन का हृदय कठोर हो गया, और उसने उस प्रजा को जाने नहीं दिया।

8तब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, अपनी-अपनी मुट्ठी में भट्ठी से राख ले लो और मूसा उसे फ़िरौन के सामने आकाश की ओर उड़ा दे।

9तब सारे मिस्र देश पर वह महीन धूल बनकर फैल जाएगी और मिस्र भर में मनुष्यों और पशुओं पर फफोले बन जाएगी।”

10इसलिए वे भट्ठी की राख लेकर फि़रौन के सामने खड़े हुए और मूसा ने उसे आकाश की ओर उड़ा दिया। और वह मनुष्यों और पशुओं दोनों पर फोड़े और फफोले बन गई।

11और जादूगर उन फोड़ों के कारण मूसा के सामने खड़े न रह सके, क्योंकि वे फोड़े जैसे मिस्रियों पर वैसे ही जादूगरों पर भी निकले थे।

12परन्तु यहोवा ने फि़रौन के मन को कठोर कर दिया और जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था, उसने उनकी एक न सुनी।

13तब यहोवा ने मूसा से कहा, सवेरे तड़के उठकर फि़रौन के सामने खड़ा हो और उससे कह, ‘इब्रानियों का परमेश्वर यहोवा याें कहता हैः मेरी प्रजा के लोगों को मेरी उपासना करने के लिए जाने दे,

14नहीं तो इस बार मैं तुझ पर और तेरे कर्मचारियों और तेरी प्रजा पर अपनी सब विपत्तियां डालूंगा, जिससे कि तू जान ले कि सारी पृथ्वी पर मेरे तुल्य कोई दूसरा नहीं है।

15क्योंकि यदि मैंने अब तक हाथ बढ़ाकर तुझे और तेरी प्रजा को महामारी से मारा होता तो तेरा पृथ्वी पर से सर्वनाश हो गया होता।

16परन्तु मैंने सचमुच इसी कारण से तुझे बनाए रखा है, कि तुझे अपना सामर्थ्य दिखाऊं और कि सारी पृथ्वी पर मेरे नाम की चर्चा हो।

17तू तो अब तक अपने-आपको बड़ा बनाकर मेरी प्रजा का विरोध करता है और उन्हें जाने नहीं देता।

18देख, कल इसी समय मैं ऐसे भारी ओले गिराऊंगा जैसे मिस्र की नींव पड़ने के दिन से लेकर अब तक कभी नहीं पड़े।

19इसलिए अब तू अपने पशुओं और जो कुछ मैदान में है सबको भीतर करवा ले, क्योंकि जितने मनुष्य और पशु मैदान में रह जाएं अर्थात् घर में न लाए जाएं, उन पर ओले पड़ेंगे और वे मर जाएंगे’।”

20फि़रौन के कर्मचारियों में से जो-जो यहोवा के वचन का भय मानता था वह अपने सेवकों और पशुओं को घर में भगा ले आया।

21परन्तु जिस जिसने यहोवा के वचन पर ध्यान नहीं दिया उसने अपने सेवकों और पशुओं को मैदान में ही रहने दिया।

22तब यहोवा ने मूसा से कहा, “अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ा कि सारे मिस्र देश में मनुष्यों, पशुओं और मैदान के सब पौधों पर जो मिस्र देश में हैं, ओले गिरे।”

23तब मूसा ने अपनी लाठी आकाश की ओर उठाई, और यहोवा ने गर्जन और ओले भेजे, और पृथ्वी पर आग गिरती रही। और यहोवा ने मिस्र देश पर ओले बरसाए।

24अतः ओले गिरे और ओलों के साथ आग मिली हुई थी, और ऐसी भंयकर ओला-वृष्टि हुई जैसी कि मिस्र देश के बसने से लेकर उस समय तक कभी नहीं हुई थी।

25और सारे मिस्र देश के मैदान में जितने मनुष्य और पशु थे-सब ओलों से मारे गए। और ओलों से सब पौधे मार गए और मैदान के सब पेड़ टूट गए।

26केवल गोशेन देश में जहां इस्राएली रहते थे, ओले नहीं गिरे।

27तब फि़रौन ने मूसा और हारून को बुलवा भेजा और उनसे कहा, “इस बार मैंने पाप किया, यहोवा तो धर्मी है और मैं तथा मेरी प्रजा अधर्मी है।

28यहोवा से विनती करो, क्योंकि भयंकर गर्जन और ओलों का बरसना बहुत हो चुका; और मैं तुमको जाने दूंगा, तुम अब रूके न रहोगे।”

29तब मूसा ने उससे कहा, “नगर से निकलते ही मैं अपना हाथ यहोवा की ओर फैलाऊंगा, तब बादल का गरजना रुक जाएगा और फिर ओले न गिरेंगे जिससे कि तू जान ले कि पृथ्वी यहोवा ही की है।

30परन्तु मैं जानता हूँ कि अभी भी न तो तू और न तेरे कर्मचारी ही यहोवा परमेश्वर का भय मानते है।”

31सन और जौ तो ओलों से नष्ट हो गए, क्योंकि जौ की बालें निकल चुकी थीं और सन में कलियां लगी थी।

32पर गेहूँ और कठिया गेहूँ मारे न गए, क्योंकि वे बढ़े न थे।

33अतः मूसा ने फि़रौन के पास से नगर के बाहर जाकर यहोवा के आगे हाथ फैलाए। तब बादल का गरजना और ओलों का बरसना रुक गया, फिर भूमि पर और पानी न बरसा।

34परन्तु जब फि़रौन ने देखा कि वर्षा और ओला-वृष्टि और बादल का गरजना रुक गया है तो उसने और उसके कर्मचारियों ने फिर पाप कियाः उन्होंने अपने हृदय को कठोर बना लिया।

35अतः फि़रौन का हृदय कठोर हो गया और जैसा कि यहोवा ने मूसा के द्वारा कहलाया था उसने इस्राएलियों को जाने न दिया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)