पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 8 / 40
निर्गमन 8
1तब यहोवा ने मूसा से यों कहा, “फि़रौन के पास जाकर कह, ‘यहोवा इस प्रकार कहता हैः मेरे लोगों को जाने दे कि वे मेरी उपासना करे।
2परन्तु यदि तू उन्हें भेजने से इनकार करेगा, तो देख, मैं मेंढकों को भेजकर तेरे पूरे देश को हानि पहुंचाऊंगा।
3और नील नदी मेंढकों से भर जाएगी। और वे तेरे भवन में, तेरे सोने के कमरे में, और तेरे बिछौने पर आ जाएंगे। वे तेरे कर्मचारियों के घरों में, तेरे लोगों पर, और तेरे तन्दूरों में और आटा गूंधने के पात्रों में भर जाएंगे।
4इसलिए मेंढक तुझ पर और तेरी प्रजा और तेरे सब कर्मचारियों पर चढ़ जाएंगे’।”
5तब यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून से कह, ‘अपनी लाठी के साथ अपना हाथ नदियों, नहरों, और झीलों पर बढ़ा, और मेंढकों को मिस्र देश पर चढ़ा ले आ’।”
6अतः हारून ने मिस्र के जल-स्त्रेतों पर अपना हाथ बढ़ाया और मेंढकों ने आकर मिस्र देश को ढँक लिया।
7और जादूगर भी अपनी जादूगरी के द्वारा मिस्र देश पर मेंढक चढ़ा ले आए।
8तब फि़रौन ने मूसा और हारून को बुलवा कर कहा, “यहोवा से विनती करो कि वह मेंढकों को मुझसे और मेरी प्रजा से दूर करे। और मैं इस प्रजा के लोगों को जाने दूंगा कि वे यहोवा के लिए बलिदान चढ़ाए।”
9और मूसा ने फि़रौन से कहा, “तू ही मुझे इतना बतला दे कि मैं तेरे और तेरे कर्मचारियों और तेरी प्रजा के लिए कब विनती करूं कि ये मेंढक तुझसे और तेरे घरों से दूर किए जाएं और केवल नील नदी में ही रहे।”
10तब उसने कहा, “कल।” अतः उसने कहा, “तेरे वचन के अनुसार हो जिससे कि तू जान ले कि हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कोई दूसरा नहीं हैं
11और मेंढक तेरे पास से, तेरे घरों में से, और तेरे कर्मचारियों और तेरी प्रजा के लोगों से दूर होकर केवल नील में ही रहेंगे।”
12तब मूसा और हारून फि़रौन के पास से चले गए और मूसा ने उन मेंढकों के विषय में जो यहोवा ने फि़रौन पर भेजे थे उसकी दुहाई दी।
13और यहोवा ने मूसा के कहने के अनुसार किया और घरों, आंगनों, और खेतों के सब मेंढक मर गए।
14तब लोेगों ने इकट्ठा करके उनके ढेर लगा दिए और देश में दुर्गन्ध फैल गई।
15परन्तु जब फि़रौन ने देखा कि अब चैन मिल गया है तो जैसा कि यहोवा ने कहा था उसने अपना हृदय कठोर किया और उनकी न सुनी।
16तब यहोवा ने मूसा से कहा, "हारुन से कह, ‘अपनी लाठी बढ़ाकर भूमि की धूल पर मार जिससे कि वह सारे मिस्र देश में मच्छर बन जाए’।"
17उन्होंने ऐसा ही किया, अर्थात् हारून ने अपनी लाठी लेकर अपना हाथ बढ़ाया और भूमि की धूल पर मारा। तब मनुष्य तथा पशुओं पर मच्छर आ गए और सम्पूर्ण मिस्र देश में भूमि की धूल मच्छर बन गई।
18तब जादूगरों ने भी अपनी जादूगरी से मच्छर ले आने का प्रयत्न किया, परन्तु वे न ला सके। अतः वहां मनुष्यों और पशुओं पर मच्छर बने रहे।
19तब जादूगरों ने फि़रौन से कहा, “इसमें तो परमेश्वर का हाथ है।” परन्तु जैसा कि यहोवा ने कहा था, फि़रौन का हृदय कठोर ही बना रहा और उसने उनकी न सुनी।
20तब यहोवा ने मूसा से कहा, भोर को उठ कर जैसे ही फि़रौन नदी की ओर जाए उसके सामने उपस्थित होकर उससे कहना, ‘यहोवा यों कहता हैः मेरे लोगों को जाने दे कि वे मेरी उपासना करें।
21क्योंकि यदि तू मेरे लोगों को जाने न दे तो देख, मैं तुझ पर और तेरे कर्मचारियों और तेरे लोगों और तेरे घरों पर झुंड के झुंड डाँस भेजूंगा और मिस्रियों के घर और जिस भूमि पर वे रहते हैं वह भी डाँसों के हाँ झुडों से भर जाएगी।
22परन्तु उस दिन मैं गोशेन देश को जिसमें मेरी प्रजा रहती है अलग करूंगा, और उसमें डाँसों के झुंड न रहेंगे, जिससे कि तू जान ले कि मैं यहोवा इस देश में उपस्थित हू।
23और मैं अपनी प्रजा और तेरी प्रजा में अन्तर ठहराऊंगाः यह चिह्न कल प्रकट होगा’।”
24तब यहोवा ने वैसा ही किया, और फिरौन के भवन, और उसके कर्मचारियों के घरों में डाँसों के झुंड भर गए, और सारा मिस्र देश डाँसों के कारण उजाड़ हो गया।
25तब फि़रौन ने मूसा और हारून को बुलवाकर कहा, “तुम जाकर इसी देश में अपने परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाओ।”
26परन्तु मूसा ने कहा, “ऐसा करना उचित नहीं, क्योंकि हम अपने यहोवा परमेश्वर के लिए ऐसे बलिदान करेंगे जो मिस्रियों के लिए घृणित है। यदि हम उनकी आंखों के सामने ही वे बलिदान चढ़ाएं जो मिस्रियों के लिए घृणित हैं तो क्या वे हमारा पथराव न करेंगे?
27हम अवश्य जंगल में तीन दिन की यात्रा करके ही अपने परमेश्वर यहोवा के लिए उसकी आज्ञानुसार बलिदान चढ़ाएगे।”
28और फि़रौन ने कहा, “मैं तुम लोगों को जाने दूंगा कि तुम जंगल में यहोवा अपने परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाओ-केवल बहुत दूर मत जाना। अब मेरे लिए विनती करो।”
29तब मूसा ने कहा, “देख, मैं तेरे पास से बाहर जाकर यहोवा से विनती करूंगा कि कल ही फि़रौन से, उसके कर्मचारियों से, और उसके लोगों से इन डाँसों के झुंड दूर हो जाए। केवल फि़रौन दुबारा कपट करके हमें यहोवा के लिए बलिदान करने को जाने से न रोके।”
30अतः मूसा ने फि़रौन के पास से जाकर यहोवा से विनती की।
31और यहोवा ने मूसा की प्रार्थना के अनुसार डँासों के झुंडो को फि़रौन से, और उसके कर्मचारियों और उसकी प्रजा से ऐसा दूर किया कि एक भी डाँस न रहा।
32तब फि़रौन ने इस बार भी अपने हृदय को कठोर किया और उन लोगों को जाने न दिया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)