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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 7 / 40

निर्गमन 7

1तब यहोवा ने मूसा से कहा, “देख, मैं तुझे फि़रौन के लिए परमेश्वर-सा ठहराता हूँ; और तेरा भाई हारून तेरा नबी होगा।

2जिन- जिन बातों को कहने की आज्ञा मेैं तुझे दूं तू वही कहना, और तेरा भाई हारून फि़रौन से कहेगा कि वह इस्राएलियों को अपने देश में से निकल जाने दे।

3परन्तु मैं फि़रौन के मन को कठोर करूंगा कि मिस्र देश में अपने बहुत-से चिह्न और अद्भुत्त-कार्य दिखलाऊ।

4जब फि़रौन तुम्हारी नहीं सुनेगा तो मैं मिस्र पर अपना हाथ बढ़ाऊंगा और अपनी सेनाओं को अर्थात् अपनी प्रजा इस्राएल को न्याय के महान् कार्यों द्वारा मिस्र देश से बाहर निकाल लाऊंगा।

5और जब मैं मिस्र पर अपना हाथ बढ़ाकर उनके बीच में से इस्राएलियों को निकाल ले आऊंगा तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हू।

6और मूसा और हारून ने यही किया; जैसा यहोवा ने उन्हें आज्ञा दी थी उन्होंने वैसा ही किया।

7जब उन्होंने फि़रौन से बातें कीं तब मूसा तो अस्सी वर्ष का और हारून तिरासी वर्ष का था।

8तब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

9“जब फि़रौन कहे, ‘अपना कोई चमत्कार दिखाओ,’ तब हारून से कहना, ‘अपनी लाठी फि़रौन के सामने डाल दे कि वह सर्प बन जाए’।”

10तब मूसा और हारून ने फि़रौन के पास जाकर यहोवा की आज्ञा अनुसार किया; और हारून ने अपनी लाठी को फिरोन और उसके कर्मचारियों के आगे डाल दिया और वह सर्प बन गई।

11तब फि़रौन ने भी पण्डितों और जादूगरों को बुलवाया, और उन्होंने भी अर्थात् मिस्र के जादूगरों ने अपनी जादूगरी से वैसा ही किया।

12हर एक ने अपनी लाठी डाल दी और वे सर्प बन गईं, परन्तु हारून की लाठी उनकी लाठियों को निगल गईं।

13फिर भी, जैसा यहोवा ने कहा था फि़रौन का हृदय कठोर बना रहा और उसने उनकी न सुनी।

14तब यहोवा ने मूसा से कहा, फ़िरोन का हृदय हठी है। वह इस प्रजा को जाने नहीं देता

15भोर के समय फि़रौन के पास जा जब वह जल की ओर जाता हो। तू वह लाठी जो सर्प बन गई थी हाथ में लिए हुए नील नदी के तट पर उससे भेंट करने को खड़ा रहना।

16और उससे कहना, ‘यहोवा जो इब्रानियों का परमेश्वर है उसने मुझे तेरे पास यह कहने को भेजा है कि मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे कि वे जंगल में मेरी उपासना करें, और देख, तूने अब तक मेरी नहीं सुनी।

17यहोवा यों कहता हैः “इससे तू जान लेगा कि मैं यहोवा हूँ: देख, मैं नील नदी के जल को अपने हाथ की लाठी से मारूंगा और वह लहू बन जाएगा।

18और जो मछलियां नील नदी में हैं वे मर जाएंगी, और नील नदी दुर्गन्ध देने लगेगी और नील नदी का पानी पीने के लिए मिस्रियों का जी न चाहेगा”।’”

19तब यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून से कह, ‘अपनी लाठी लेकर मिस्र देश के जल अर्थात् उसकी नदियों, नहरों, झीलों और तालाबों पर अपना हाथ बढ़ा जिससे कि जल लहू बन जाए। और सम्पूर्ण मिस्र देश में लकड़ी और पत्थर दोनों के पात्रों में लहू-ही-लहू हो जाए’।”

20तब मूसा और हारून ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार किया। और उसने लाठी को उठाकर फि़रौन और उसके कर्मचारियों के सामने ही नील नदी पर मारा, और नदी का सब पानी लहू बन गया।

21और नील नदी की मछलियां मर गईं, और नदी का पानी दुर्गन्ध देने लगा, जिससे मिस्री लोग नदी का पानी न पी सके। और सम्पूर्ण मिस्र देश में लहू-ही-लहू हो गया।

22तब मिस्र के जादूगरों ने भी अपनी जादूगरी से ऐसा ही किया; फिर भी, जैसा कि यहोवा ने कहा था, फि़रौन का हृदय कठोर बना रहा और उसने उनकी न सुनी।

23फि़रौन ने इस पर उनकी बात न मानी और वह मुंह फेरकर अपने घर चला गया।

24तब सब मिस्री लोगों ने पीने के जल के लिए नील नदी के आस-पास खोदा, क्योंकि वे नदी के जल में से नहीं पी सकते थे।

25जब यहोवा ने नील नदी को मारा था, तब से सात दिन बीत चुके थे। (

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)