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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 6 / 40

निर्गमन 6

1तब यहोवा ने मूसा से कहा, “अब तू देखेगा कि मैं फि़रौन से क्या करूँगा; वह विवश होकर उन्हें जाने देगा; वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकालेगा।”

2परमेश्वर ने मूसा से फिर बातें कीं और कहा, “मैं यहोवा हू।

3मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन दिया, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रकट न हुआ।

4और मैंने उनके साथ अपनी वाचा भी बांधी है कि वह कनान देश जिसमें वे परदेशी होकर रहे, उन्हें दे दूंगा।

5और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना सुनकर मैंने अपनी वाचा को स्मरण किया है।

6इसलिए इस्राएलियों से कहः ‘मैं यहोवा हूं, और मैं तुमको मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा। मैं तुमको उनके दासत्व से छुड़ाऊंगा। मैं अपनी भुजा बढ़ाकर और न्याय के महान् कार्य करके तुम्हें छुड़ा लूंगा।

7तब मैं तुमको अपनी प्रजा बनाने के लिए अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया।

8और मैं तुम्हें उस देश में पहुंचाऊंगा जिसे देने की शपथ मैंने इब्राहीम, इसहाक और याकूब से खाई थी और मैं उसे तुम्हारी मीरास होने को दे दूंगा; मैं यहोवा हूं’।”

9मूसा ने इस्राएलियों को ये बातें बता दीं, परन्तु उन्होंने निराशा और कठोर दासत्व के कारण उसकी न सुनी।

10तब यहोवा ने मूसा से कहा,

11“मिस्र के राजा फि़रौन के पास जाकर कह कि इस्राएलियों को अपने देश में से निकल जाने दे।”

12परन्तु मूसा ने यहोवा से कहा, “देख, इस्राएलियों ने मेरी नहीं सुनी; तब फि़रौन मेरी क्यों सुनेगा, जब कि मैं कुशल वक्ता नहीं?”

13तब यहोवा ने मूसा और हारून से बातें कीं और उन्हें इस्राएलियों और मिस्र के राजा फि़रौन के लिए आज्ञा दी कि वे मिस्र देश से इस्राएलियों को निकाल ले जाए।

14उनके पूर्वजों के घरानों के मुखिए ये है। इस्राएल के पहलौठे रूबेन के पुत्र हनोक, पल्लू, हेस्रोन, और कर्म्मी-इन्हीं से रूबेन के घराने निकले।

15और शमौन के पुत्रः यमूएल, यामीन, ओहद, याकिन, सोहर, तथा एक कनानी स्त्री का पुत्र शाऊल-इन्हीं से शमौन के घराने निकले।

16और उनकी वंशावली के अनुसार लेवी के पुत्रों के नाम ये हैं; गेर्शोन, कहात, और मरारी। और लेवी की पूरी आयु एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई।

17गेर्शोन के पुत्र, अपने-अपने घराने के अनुसारः लिबनी और शिमी।

18कहात के पुत्रः अम्राम, यिसहार, हेब्रोन और उज्जीएल। कहात की पूरी आयु एक सौ तैंतीस वर्ष की हुई।

19मरारी के पुत्रः महली और मूशी। लेवियों के घराने उनकी वंशावली के अनुसार ये ही है।

20अम्राम ने अपने पिता की बहन योकेबेद से विवाह किया। उससे हारून और मूसा उत्पन्न हुए। अम्राम की पूरी अवस्था एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई।

21यिसहार के पुत्रः कोरह नेपेग और जिक्री थे।

22उज्जीएल के पुत्रः मीशाएल, एलसापन और सित्री थे।

23हारून ने अम्मीनादाब की बेटी, नहशोन की बहन एलीशेबा से विवाह किया। उससे नादाब, अबीहू, एलीआज़ार और इतामार उत्पन्न हुए।

24कोरह के पुत्रः अस्सीर, एलकाना और अबीआसाप थे। इन्हीं से कोरहियों के घराने निकले।

25हारून के पुत्र एलीआजार ने पूतीएल की एक बेटी से विवाह किया और उससे पीनहास उत्पन्न हुआ। कुल के अनुसार लेवियों के पूर्वजों के घरानों के मुखिए ये ही है।

26ये ही वे हारून और मूसा हैं जिनसे यहोवा ने कहा था, “इस्राएलियों को उनके दलों के अनुसार मिस्र देश में से निकाल ले आओ।”

27इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले जाने के लिए इन्होंने ही मिस्र के राजा फि़रौन से बातें की। ये मूसा और हारून ही थे।

28ऐसा हुआ कि जिस दिन यहोवा ने मूसा से मिस्र में बातें कीं,

29तो यहोवा ने मूसा से कहा, “मैं यहोवा हू। जो कुछ मैं तुझसे कहूं वह सब मिस्र के राजा फि़रौन से कहना।”

30परन्तु मूसा ने यहोवा को उत्तर दिया, “देख, मैं तो कुशल वक्ता नहीं हूं-तब फि़रौन मेरी क्यों सुनेगा?”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)