पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 5 / 40
निर्गमन 5
1तब मूसा और हारून ने फि़रौन के पास जाकर कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इस प्रकार कहता है: ‘मेरी प्रजा को जाने दे कि वे मेरे लिए जंगल में एक पर्व मनाएं’।”
2परन्तु फि़रौन ने कहा, “यहोवा कौन है कि मैं उसकी बात मानकर इस्राएलियों को जाने दूं? मैं यहोवा को नहीं जानता और मैं इस्राएलियों को नहीं जाने दूंगा।”
3तब उन्होंने कहा, “इब्रानियों के परमेश्वर ने हमें दर्शन दिया है। कृपया, हमें जंगल में तीन दिन के मार्ग पर जाने दे कि हम अपने परमेश्वर यहोवा के लिए बलि चढ़ा सकें, ऐसा न हो कि वह महामारी अथवा तलवार द्वारा हम पर टूट पड़े।”
4परन्तु मिस्र के राजा ने उनसे कहा, “हे मूसा, हे हारून, तुम इन लोगों को इनके काम से क्यों हटवाते हो? अपने-अपने काम पर लग जाओ!”
5फि़रौन ने फिर कहा, “देखो, अब देश में ये लोग बहुत हो गए हैं, और तुम इन्हें इनके काम से अवकाश दिलाना चाहते हो।”
6अतः उसी दिन फि़रौन ने बेगार करानेवालों और उनके मुखियों को यह आज्ञा दीः
7“अब तक जो भूसा तुम उन्हें ईंट बनाने के लिए दिया करते थे वह आगे नहीं देना। वे स्वयं जाकर अपने लिए भूसा इकट्ठा किया करे।
8फिर भी जितनी ईंटें वे पहले बनाते थे उतनी ही बनाते रहें-इसमें कमी न होने पाए। वे लोग आलसी हैं, इसलिए चिल्लाते हैं, ‘हमें जाने दे कि हम अपने परमेश्वर के लिए बलि चढ़ाए।’
9उन मनुष्यों पर काम का बोझ और बढ़ा दिया जाए कि वे उसी काम में उलझे रहें, जिससे कि वे झूठी बातों पर ध्यान न दे।”
10अतः बेगार कराने वालों और उन पर नियुक्त मुखियों ने बाहर जाकर लोगों से कहा, “फि़रौन इस प्रकार कहता हैः ‘मैं तुम्हें भूसा नहीं दूंगा।
11तुम जाओ और स्वयं अपने लिए भूसा ले आओ चाहे जहां मिले-परन्तु तुम्हारा काम कुछ भी नहीं घटाया जाएगा।”
12इसलिए वे लोग मिस्र के समस्त मैदानों में फैल गए कि भूसे के बदले ठूंठी बटोरें।
13और बेगार कराने वाले उनको यह कहकर दबाने लगे, “तुम जिस प्रकार भूसे के होते हुए अपना काम पूरा करते थे उसी प्रकार अब भी अपना प्रतिदिन का काम पूरा करो।”
14यही नहीं, इस्राएलियों में से जो मुखिए फि़रौन के कर्मचारियों द्वारा नियुक्त किए गए थे उनको पीटा गया और उनसे पूछा गया, “क्या कारण है कि तुमने पहले की भांति ईंट बनवाने की ठहराई हुई गिनती का काम कल या आज पूरा नहीं किया?”
15तब इस्राएलियों के मुखिए फि़रौन के पास जाकर यह दुहाई देने लगे, “तू अपने दासों से ऐसा क्यों करता है?
16तेरे दासों को भूसा तो दिया नहीं जाता फिर भी वे कहते रहते हैं, ‘ईंटें बनाओ!’ और देख, तेरे दास पीटे जाते हैं, परन्तु दोष तो तेरे ही लोगों का है।”
17परन्तु उसने कहा, “तुम तो आलसी हो-आलसी! इसलिए कहते हो, ‘हमें जाने दे कि हम यहोवा के लिए बलि चढ़ाए।’
18अतः अब जाओ और काम करो, क्योंकि तुम्हें भूसा नहीं दिया जाएगा, फिर भी तुम्हें उतनी ही ईंटें बनानी पड़ेंगी।”
19इस्राएल के मुखियों ने देखा कि अब तो हम संकट में पड़ गए हैं, क्योंकि उनसे कहा गया था, “तुम जितनी ईंटें प्रतिदिन बनाते रहे हो उतनी ही तुम्हें बनानी पड़ेंगी।”
20जब वे फि़रौन की उपस्थिति से बाहर निकले तो उनकी भेंट मूसा और हारून से हुई, जो उन्हीं की प्रतीक्षा में थे।
21और उन्होंने उनसे कहा, “यहोवा तुम पर दृष्टि करके तुम्हारा न्याय करे, क्योंकि तुमने ही हमें फि़रौन और उसके कर्मचारियों की दृष्टि में घृणित ठहराकर हमें घात करवाने के लिए उनके हाथ में तलवार दे दी है।”
22तब मूसा नें यहोवा के पास लौटकर कहा, “हे यहोवा, तूने इन लोगों पर ऐसा दुख क्यों डाला? तूने मुझे यहां भेजा ही क्यों?
23जबसे मैं तेरे नाम से फि़रौन से बातें करने आया तब से उसने इन लोगों को हानि ही पहुँचाई है, और तूने अपनी प्रजा का कुछ भी छुटकारा नहीं किया।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)