पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 14 / 40
निर्गमन 14
1यहोवा ने मूसा से कहा,
2“इस्राएलियों से कह कि वे पीछे हटकर मिगदोल और समुद्र के मध्य पी-हाहीरोत के सामने छावनी डाले; तुम समुद्र के तट पर ठीक बाल-सपोन के सामने छावनी डालना।
3क्योंकि फि़रौन इस्राएलियों के विषय में कहेगा, ‘वे तो भूमि पर इधर-उधर भटक रहे हैं; और वे जंगल में घिर गए है।’
4इस प्रकार मैं फि़रौन के हृदय को कठोर करूँगा, और वह फिर उनका पीछा करेगा। तब फि़रौन और उसकी सारी सेना के द्वारा मेरी महिमा होगी, और मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हू।” और उन्होंने वैसा ही किया।
5जब मिस्र के राजा को बताया गया कि वे लोग भाग गए हैं, तो फि़रौन व उसके कर्मचारियों का मन उन लोगों के विषय में पलट गया, और उन्होंने कहा, “हमने यह क्या किया कि इस्राएलियों को दासत्व से मुक्त करके जाने दिया?”
6अतः उसने अपना रथ जुतवाया और अपने लोगों को अपने साथ लिया;
7और वह छः सौ चुने हुए रथ और मिस्र की सेना के सारे अधिकारियों और अन्य सब रथों को साथ लेकर निकला।
8और यहोवा ने मिस्र के राजा फि़रौन का हृदय कठोर कर दिया, और जब इस्राएली निभर्य चले जा रहे थे तो उसने उनका पीछा किया।
9तब मिस्रियों ने फि़रौन के सब घोड़ों और रथों, उसके सवारों और उसकी सेना सहित उनका पीछा किया, और उन्हें पी-हाहीरोत के पास बाल-सपोन के सामने समुद्र के किनारे जहां उनकी छावनी थी, जा पकड़ा।
10जब फि़रौन निकट आया तो इस्राएलियों ने आँखे उठाकर देखा कि मिस्री हमारा पीछा किए चले आ रहे हैं, तब वे अत्यन्त डर गए; अतः इस्राएली चिल्लाकर यहोवा की दुहाई देने लगे।
11तब उन्होंने मूसा से कहा, “क्या मिस्र में कब्रें न थीं कि तू हमें यहां जंगल में मरने के लिए ले आया है? तूने हमारे साथ यह क्या किया कि हमें मिस्र से निकाल लाया?
12क्या हम मिस्र में तुझसे यही बात न कहते रहे कि हमें अकेला छोड़ दे कि हम मिस्रियों की सेवा करें? क्योंकि हमारे लिए जंगल में मरने से अच्छा होता कि हम मिस्रियों की सेवा करते।”
13परन्तु मूसा ने लोगों से कहा, “डरो मत! खड़े-खड़े यहोवा के उद्धार को देखो जो वह आज तुम्हारे लिए करेगा; क्योंकि जिन मिस्रियों को तुम आज देख रहे हो, उन्हें फिर कभी न देखोगे।
14यहोवा तुम्हारे लिए स्वयं लड़ेगा, बस तुम शान्त रहो।”
15तब यहोवा ने मूसा से कहा, “तू क्यों मेरी दुहाई दे रहा है? इस्राएलियों को आगे बढ़ने की आज्ञा दे।
16और तू अपनी लाठी उठा और अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाकर उसे दो भाग कर। तब इस्राएली समुद्र के मध्य से होकर सूखी भूमि पर से चले जाएंगे।
17और मैं मिस्रियों के मनों को कठोर करूँगा। कि वे वहां भी उनका पीछा करते जाएं;
18तब फि़रौन, उसके रथों, और उसके घुड़सवारों के द्वारा मेरी महिमा होगी, तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हू।”
19और परमेश्वर का दूत जो इस्राएली दल के आगे आगे चलता था, हटकर उनके पीछे आ गया; और बादल का खम्भा भी उनके आगे से हटकर उनके पीछे जा ठहरा।
20अतः वह मिस्र की छावनी और इस्राएल की छावनी के मध्य आ गया, और बादल के साथ अन्धकार तो था, फिर भी रात को उससे प्रकाश मिलता रहा। इस प्रकार रात भर वे एक दूसरे के पास न आए।
21तब मूसा ने समुद्र के ऊपर हाथ बढ़ाया, और यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाई और समुद्र को हटाकर उसे सूखी भूमि कर दिया। अतः जल दो भागों में विभाजित हो गया।
22तब इस्राएली समुद्र के मध्य सूखी भूमि से होकर गए और जल उनकी दाहिनी और बाईं ओर दीवार के समान था।
23तब मिस्रियों ने उनका पीछा किया और फि़रौन के सब घोड़े, रथ और घुड़सवार उनका पीछा करते हुए समुद्र के मध्य चले गए।
24रात्रि के अन्तिम पहर यहोवा ने अग्नि और बादल के खम्भे में से मिस्रियों की सेना पर दृष्टि डाली और उन्हें घबरा दिया।
25उसने उनके रथों के पहियों को टेढ़ा-मेढ़ा कर दिया जिससे उनका चलाना कठिन हो गया; अतः मिस्री कहने लगे, “आओ, हम इस्राएलियों के सामने से भाग जाएं, क्योंकि यहोवा उनकी ओर से मिस्रियों के विरुद्ध युद्ध कर रहा है।”
26तब यहोवा ने मूसा से कहा, “समुद्र के ऊपर अपना हाथ बढ़ा कि जल मिस्रियों, उनके रथों और घुड़सवारों पर लौट आए।”
27अतः मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया और भोर होते-होते, जबकि मिस्री ठीक समुद्र के बीच में से भाग ही रहे थे, समुद्र ज्यों-का-त्यों हो गया। और यहोवा ने उन्हें समुद्र के मध्य फेंक दिया।
28जल अपने स्थान पर लौट आया और रथ और घुड़सवार तथा फि़रौन की समस्त सेना, जो समुद्र में उनका पीछा करते हुए आई थी, उसमें डूब गई, यहां तक कि उनमें से एक भी न बचा।
29परन्तु इस्राएली समुद्र के मध्य सूखी भूमि पर होकर चले गए और जल उनके दाहिने और बाएं दीवार के समान खड़ा रहा।
30इस प्रकार उस दिन यहोवा ने इस्राएलियों को मिस्रियों के हाथ से छुड़ाया और इस्राएलियों ने मिस्रियों को समुद्र तट पर मरे पड़े देखा।
31जब इस्राएलियों ने मिस्रियों के विरुद्ध यहोवा के महासामर्थी भुजबल को देखा तब उन्होंने यहोवा का भय माना और उन्होंने यहोवा पर और उसके दास मूसा पर विश्वास किया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)