पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 15 / 40
निर्गमन 15
1तब मूसा और इस्राएलियों ने यहोवा के लिए यह गीत गया, और कहाः “मैं यहोवा के लिए गीत गाऊँगा, क्योंकि वह महाप्रतापी ठहरा है; घोड़ों को सवारों सहित उसने समुद्र में पटक दिया है।
2याह मेरा बल और गीत है, और वह मेरा उद्धार भी ठहरा है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उसकी स्तुति करूँगा; मेरे पूर्वजों का परमेश्वर मैं उसको सराहूँगा।
3यहोवा शूरवीर हैः उसका नाम यहोवा है।
4उसने फि़रौन के रथों और उसकी सेना को समुद्र में फेंक दिया उसके महारथी लाल समुद्र में डूब गए।
5गहरे जल ने उन्हें ढांप लिया; वे पत्थर की तरह गहरे तल में चले गए।
6हे यहोवा, तेरा दाहिना हाथ सामर्थ्य से पराक्रमी है। हे यहोवा, तेरा दाहिना हाथ शत्रुओं के टुकड़े-टुकड़े कर डालता है।
7तू तो अपने वैभव में महान् है, और उनको जो तेरे विरुद्ध उठ खड़े होते हैं, तू पराजित कर देता है। तू उन पर अपनी क्रोधाग्नि भड़काता है, और वे भूसे के समान भस्म हो जाते है।
8तेरे नथनों की फुफकार से जल एकत्र हो गया, जलधाराएं ढेर बनकर खड़ी हो गईं, समुद्र के मध्य गहरा जल ठहर गया।
9शत्रु ने कहा, ‘मैं पीछा करूँगा, मैं जा पकड़ूँगा, मैं लूट के माल को बांट लूँगा; उनके सर्वनाश से मेरा जी ठण्डा होगा; मैं अपनी तलवार खींचूंगा, मेरे ही हाथ से उनका विनाश होगा।’
10तूने अपने श्वास की आंधी चलाई, और समुद्र ने उन्हें ढांप लिया। वे महाजलराशि में सीसे की तरह डूब गए।
11हे यहोवा, देवताओं में तेरे तुल्य कौन है? तेरे सदृश पवित्रता में महाप्रतापी, महिमामय भययोग्य और अद्भुत कार्य करने वाला कौन है?
12तूने अपना दाहिना हाथ बढ़ाया, तो धरती ने उनको निगल लिया।
13अपनी करुणा में तूने अपनी छुड़ाई हुई प्रजा का मार्गदर्शन किया है। अपने सामर्थ्य में तू उसे अपने पवित्र निवासस्थान को ले चला।
14जातियां सुनकर कांप उठीं; पलिश्तियों को प्राणों के लाले पड़ गए है।
15तब एदोम के प्रधान व्याकुल हो गए, मोआब के शूरवीर थरथरा गए, कनान के सब निवासियों के दिल बैठ गए।
16हे प्रभु, जब तक कि तेरी प्रजा पार न उतर जाए, जब तक कि तेरी मोल ली हुई प्रजा पार न उतर जाए, आतंक और भय उन पर छाया हुआ है, तेरे बड़े भुजबल से वे पत्थर सदृश निर्जीव हो गए है।
17हे यहोवा, अपनी मीरास के पर्वत पर, अर्थात् उस स्थान पर जिसे तूने अपने निवास के लिए बनाया है, हाँ, उस पवित्रस्थान में, हे यहोवा, जिसे तेरे हाथों ने स्थापित किया है, तू अपनी प्रजा को पौधे के समान रोपेगा।
18यहोवा सदा सर्वदा राज्य करता रहेगा।”
19जब रथों और घुड़सवारों सहित फि़रौन के घोड़े समुद्र में जा पड़े और यहोवा उनके ऊपर समुद्र का जल लौटा ले आया, और इस्राएली समुद्र के मध्य सूखी भूमि पर होकर पार चले गए,
20तब हारून की बहन मरियम नामक नबिया ने हाथ में डफली ली, और सब स्त्रियां भी हाथ में डफली लिए नाचती हुईं उसके पीछे हो ली।
21और मरियम उनके गाने के उत्तर में यह गाती थीं: यहोवा के लिए गीत गाओ, क्योंकि वह महाप्रतापी ठहरा है, घोड़ों को सवारों सहित उसने समुद्र में फेंक दिया है।
22तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया और वे शूर नामक जंगल में आ गए। वे तीन दिन तक जंगल में चलते रहे, परन्तु उन्हें कहीं पानी न मिला।
23और जब वे मारा में पहुँचे तो वे वहां का पानी न पी सके क्योंकि वह कड़वा थाः इसलिए उसका नाम मारा पड़ा।
24अतः लोग मूसा के विरुद्ध कुड़कुड़ा कर कहने लगे, ‘हम क्या पीएं?”
25तब उसने यहोवा की दुहाई दी और यहोवा ने उसे एक वृक्ष दिखलाया। उसने उसे पानी में डाल दिया और पानी मीठा हो गया। वहां यहोवा ने उनके लिए एक विधि और नियम ठहराया; और वहीं उसने उनकी परीक्षा की।
26और उसने कहा, “यदि तू अपने यहोवा परमेश्वर की वाणी ध्यानपूर्वक सुने और जो कार्य मेरी दृष्टि में ठीक है उसे करे, मेरी आज्ञाओं पर कान लगाए और मेरी सब विधियों का पालन करे, तो जितने रोग मैंने मिस्रियों पर भेजे थे, उनमें से एक भी तुझ पर न भेजूँगा, क्योंकि मैं यहोवा तुम्हारा चंगा करने वाला हूं।”
27तब वे एलीम में आए जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के वृक्ष थे। वहां उन्होंने जल के पास पड़ाव डाला।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)