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पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 16 / 40

निर्गमन 16

1तब उन्होंने एलीम से कूच किया और मिस्र देश से बाहर निकलने के बाद दूसरे महीने के पन्द्रहवें दिन को इस्राएल की समस्त मण्डली एलीम और सीनै पर्वत के बीच सीन नामक जंगल में आ पहुँची।

2समस्त इस्राएली जनसमूह जंगल में मूसा और हारून पर कुड़कुड़ाने लगा।

3इस्राएलियों ने उनसे कहा, “भला होता कि हम यहोवा के हाथ से मिस्र में ही मार डाले जाते जब हम मांस की हांडियों के पास बैठकर जी भरकर रोटी खाते थे। तुम तो हमको इस जंगल में इसीलिए ले आए हो कि इस जन-समुदाय को भूखा मार डालो”

4तब यहोवा ने मूसा से कहा, “देखो, मैं तुम लोगों के लिए आकाश से रोटी बरसाऊँगा और लोग प्रतिदिन बाहर जाकर दिन भर के लिए बटोरें। इससे मैं उनको परखूँगा कि वे मेरी व्यवस्था के अनुसार चलेंगे कि नही।

5ऐसा होगा कि वे प्रतिदिन जितना बटोरते हैं, छठवें दिन उसका दुगुना लाकर तैयार करे।”

6अतः मूसा और हारून ने सब इस्राएलियों से कहा, “संध्या को तुम जान लोगे कि यहोवा ही है जो तुमको मिस्र देश से निकाल लाया है।

7प्रातःकाल तुम यहोवा की महिमा को देखोगे, क्योंकि यहोवा ने अपने विरुद्ध तुम्हारा कुड़कुड़ाना सुना है। हम कौन हैं कि तुम हम पर कुड़कुड़ाते हो?”

8और मूसा ने कहा, “यह तब होगा जब यहोवा तुम्हें संध्या के समय खाने के लिए मांस और प्रातःकाल भरपेट रोटी देगा; क्योंकि तुम्हारा कुड़कुड़ाना हमारे विरुद्ध नहीं, परन्तु यहोवा के विरुद्ध है।”

9तब मूसा ने हारून से कहा, “समस्त इस्राएली मंडली से कह, ‘यहोवा के सम्मुख निकट आओ, क्योंकि उसने तुम्हारा कुड़कुड़ाना सुना है’।”

10जब हारून समस्त इस्राएली मंडली से यह कह ही रहा था तो उन्होंने जंगल की ओर दृष्टि की, और देखो, यहोवा का तेज बादल में प्रकट हुआ।

11तब यहोवा ने मूसा से कहा,

12“मैंने इस्राएलियों के कुड़कुड़ाने को सुना है; तू उनसे यह कह, गोधूलि के समय तुम मांस खाओगे और प्रातःकाल तुम रोटी से तृप्त किए जाओगे, और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूँ।”

13तब ऐसा हुआ कि संध्या के समय बटेरों ने आकर छावनी को ढक लिया, और प्रातःकाल छावनी के चारों और ओस पड़ी।

14जब ओस की तह सूख गई तो देखो, जंगल की धरती पर छोटे-छोटे छिलके पाले के किनकों के समान भूमि पर पड़े थे।

15जब इस्राएलियों ने देखा तो आपस में कहने लगे, “यह क्या है?” क्योंकि वे तो न जानते थे कि यह क्या है। और मूसा ने उनसे कहा, “यह तो वह रोटी है जो यहोवा ने खाने के लिए तुम्हें दी है।

16यहोवा की यह आज्ञा हैः प्रत्येक जन अपनी आवश्यकता के अनुसार खाने के लिए बटोर ले; तुम्हारे तम्बू में रहने वाले व्यक्तियों की गिनती के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति पीछे एक ओमेर बटोरना।”

17और इस्राएलियों ने ऐसा ही किया; किसी ने अधिक तो किसी ने कम बटोरा।

18जब उन्होंने उसे ओमेर से नापा, तो न अधिक बटोरने वाले का अधिक, और न कम बटोरने वाले का कम निकला। प्रत्येक मनुष्य ने अपने खाने के अनुसार ही बटोरा।

19मूसा ने उनसे कहा, “कोई भी व्यक्ति भोर तक इसमें से कुछ न रख छोड़े।”

20परन्तु उन्होंने मूसा की बात न मानी, वरन् कुछ ने उसमें से भोर के लिए रख छोड़ा, अतः उसमें कीड़े पड़ गए और वह सड़ गया। इस पर मूसा उन पर क्रोधित हुआ।

21और वे भोर को अपने-अपने खाने के अनुसार प्रतिदिन बटोर लेते थे; परन्तु धूप तेज होते ही वह गल जाता था।

22फिर ऐसा हुआ कि छठवें दिन उन्होंने प्रत्येक मनुष्य के लिए दुगुना अर्थात् प्रत्येक के लिए दो ओमेर बटोर लिया, और मण्डली के सब प्रधानों ने आकर मूसा को बता दिया।

23उसने उनसे कहा, “अब यहोवा यह कहता है: कल विश्राम का विशेष दिन अर्थात् यहोवा के लिए पवित्र सब्त है। जो तुम्हें पकाना हो उसे पकाओ और जो उबालना हो उसे उबाल लो, और जितना बच जाए उसे अपने लिए प्रातःकाल के लिए रख लो।” ­

24जब उन्होंने उसे मूसा की आज्ञानुसार प्रातःकाल तक रख छोड़ा, तब न तो वह सड़ा और न ही उसमें कीड़े पड़े।

25मूसा ने कहा, “आज उसी को खाओ, क्योंकि आज यहोवा का सब्त है; आज तुम्हें मैदान में कुछ नहीं मिलेगा।

26छः दिन तुम उसे बटोरा करो, परन्तु सातवें दिन अर्थात् सब्त को वह तुम्हें नहीं मिलेगा।”

27और ऐसा हुआ कि सातवें दिन कुछ लोग बटोरने के लिए बाहर गए, परन्तु उन्हें कुछ न मिला।

28तब यहोवा ने मूसा से कहा, “कब तक तुम लोग मेरी आज्ञाओं और व्यवस्था को मानने से इनकार करते रहोगे?

29देखो, यहोवा ने तुम्हें सब्त का दिन दिया है, इसलिए वह तुम्हें छठवें दिन दो दिन का खाना देता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति अपने ही यहां रहेः सातवें दिन कोई अपने स्थान से बाहर न निकले।”

30अतः सातवें दिन लोगों ने विश्राम किया।

31और इस्राएल के घराने ने उसका नाम मन्ना रखा। वह धनिये के बीज के समान श्वेत था। उसका स्वाद शहद के बने पुए के समान था।

32मूसा ने कहा, “यहोवा की आज्ञा यह हैः एक ओमेर मन्ना अपनी समस्त भावी पीढ़ियों के लिए रख लो जिससे वे जानें कि मैं तुम्हें मिस्र देश से निकाल कर जंगल में कैसी रोटी खिलाता था।”

33तब मूसा ने हारून से कहा, “एक पात्र लेकर उसमें एक ओमेर मन्ना डालकर उसे यहोवा के सामने रख दे कि वह तुम्हारी समस्त पीढ़ियों के लिए रखा रहे।”

34जैसी आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी थी, उसी के अनुसार हारून ने उसको साक्षी के सन्दूक के आगे रख दिया कि वह वहीं रखा रहे।

35जब तक इस्राएली बसे हुए देश में नहीं पहुँचे, चालीस वर्ष तक मन्ना खाते रहे। जब तक वे कनान देश की सीमा तक न पहुँचे, वे मन्ना खाते रहे।

36एक ओमेर माप एपा का दसवां भाग होता है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)