पुराना नियम · निर्गमन · अध्याय 28 / 40
निर्गमन 28
1“फिर तू इस्राएलियों में से अपने भाई हारून को तथा उसके पुत्रों-नादाब, अबीहू, एलीआजार, और ईतामार को अपने पास ले आना कि वे मेरे लिए याजक का काम करे।
2फिर तू अपने भाई हारून के लिए वैभव और शोभा के निमित्त पवित्र वस्त्र बनाना।
3और तू उन सब कार्यकुशल लोगों से बातचीत करना जिन्हेें मैंने बुद्धि की आत्मा से परिपूर्ण किया है कि वे हारून के लिए वस्त्र बनाएं कि वह पवित्र होकर मेरे लिए याजक का काम करे।
4उन्हें ये वस्त्र बनाने होंगेः एक सीनाबन्द, एपोद, चोगा, चारखाने का अंगरखा, पगड़ी और कमरबन्द, और वे तेरे भाई हारून और उसके पुत्रों के लिए पवित्र वस्त्र बनाएं कि वह मेरे लिए याजक का काम करे।
5और वे सोने की जरी का तथा नीले, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा और महीन मलमल ले।
6“वे एपोद को सोने का तथा नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े का, और बटी हुई महीन मलमल का बनाएं जो कुशल कारीगर के हाथ का काम हो।
7वह इस तरह जोड़ा जाए कि उसके कंधे के दोनों सिरे आपस में मिले रहे।
8और इसके ऊपर निपुणता से काढ़ा हुआ पटुका इसी के समान अर्थात् सोने का, और नीले, बैंजनी, और लाल रंग तथा बटे हुए महीन मलमल का बना हो।
9फिर दो सुलैमानी मणि लेकर उन पर इस्त्रएल के पुत्रों के नाम खोदना।
10उनके नामों में से छः तो एक मणि पर और शेष छः दूसरे मणि पर उनके जन्म के अनुसार खोदना।
11जैसे जौहरी मुद्रा पर नक्काशी करता है वैसे ही तू भी दो मणियों को इस्राएल के पुत्रों के नामों के अनुसार खोदना और उनको सोने की ज़री में जड़ देना।
12और उन दोनों मणियों को एपोद के कंधों पर लगाना, वे इस्राएलियों का स्मरण दिलाने वाले होंगे। हारून उनके नाम अपने दोनों कंधों पर यहोवा के आगे स्मरण के लिए धारण किए रहे।
13फिर तू सोने की जरी के खांचे और
14चोखे सोने की दो गुथी हुई जंजीरें बनाना और गुथी हुई इन जंजीरों को उन खांचों में जड़ना।
15“फिर तू न्याय का सीनाबन्द बनाना। वह कुशल कारीगर के हाथ का काम हो। उसे एपोद के समान सोने का, तथा नीले, बैंजनी, और लाल रंग और महीन मलमल का बनाना।
16वह वर्गाकार और दोहरा हो, और उसकी लम्बाई और चौड़ाई एक-एक बित्ते की हो।
17और उसमें चार पंक्तियों में मणि जड़ना, पहली पंक्ति में माणिक्य, पुखराज और पन्ना हो;
18दूसरी पंक्ति में मरकत, नीलमणि और हीरा,
19तीसरी पंक्ति में लशम, सूर्यकान्त और नीलम;
20और चौथी पंक्ति में फीरोजा, सुलैमानी मणि और यशब हों, ये सब सोने की जरी में जड़े जाए।
21और ये मणि इस्राएल के पुत्रों के नामों के अनुसार हों, अर्थात् उनके नामों की गिनती के अनुसार बारह नाम खुदें; बारहों गोत्रों में से एक-एक का नाम एक-एक मणि पर मोहर की नक्काशी के समान खोदा जाए।
22फिर सीनाबन्द पर डोरियों के समान गुथे हुए शुद्ध सोने की जंजीर लगाना।
23और सीनाबन्द में सोने की दो कड़ियां लगाना और दोनों कड़ियों को सीनाबन्द के दोनों सिरों पर लगाना।
24तू सोने की दोनों गूंथी जंजीरों को सीनाबन्द के सिरे पर की दोनों कड़ियों से लगाना
25और जंजीरों के अन्य दोनों सिरों को जरी के दोनों खांचों के किनारों से लगाकर एपोद के कंधों के बन्धनों पर उसके सामने की ओर लगाना।
26तू सोने की दो कड़ियां बनाकर सीनाबन्द के दोनों सिरों पर उस किनारे की ओर लगाना जो एपोद के भीतर की ओर है।
27तू सोने की दो कड़ियां बनाकर एपोद के दोनों कंधों के बन्धनों के नीचे से उसके सामने जोड़ों के पास एपोद के निपुणता से बुने हुए पटुके के ऊपर लगाना।
28और वे सीनाबन्द को इसके कड़ियों से एपोद की कड़ियों को नीले फीते से ऐसे बांधें कि वह एपोद के कढ़े हुए पट्टे के ऊपर हो और सीनाबन्द एपोद से अलग न हो।
29और जब हारून पवित्रस्थान में प्रवेश करे तब वह अपने हृदय के ऊपर न्याय के सीनाबन्द पर इस्राएलियों के नामों को ले जाए जिससे कि यहोवा के सामने उनका स्मरण सदा बना रहे।
30और तू न्याय के सीनाबन्द में उरीम और तुम्मीम को रखना, और जब हारून यहोवा के सामने जाए तो वे हारून के हृदय पर हों, और हारून इस्राएलियों के न्याय को अपने हृदय के ऊपर यहोवा के सामने नित्य धारण किए रहे।
31“और एपोद के पूरे चोगे को नीले रंग का बनाना।
32उसका ऊपरी भाग बीच में खुला रहे, और उस खुले भाग के चारों ओर कवच के खुले भाग के समान बुनाई का बन्धन हो जिससे कि वह फटने न पाए।
33फिर उसके चारों ओेर के किनारों में नीले, बैंजनी, और लाल रंग के अनार बनाना, तथा उनके बीच-बीच में चारों ओर सोने की घण्टियां लगानाः
34चोगे के चारों ओर के किनारों में क्रम से एक सोने की घण्टी, फिर अनार; एक सोने की घण्टी, फिर अनार।
35इस चोगे को हारून सेवा के समय पहना करे, और पवित्रस्थान में यहोवा के सामने प्रवेश करते तथा वहां से निकलते समय घण्टियों की ध्वनि सुनाई देती रहे कि वह मर न जाए।
36“फिर तू चोखे सोने की एक पट्टिका बनाना, और उस पर मुहर के समान ये शब्द खोदनाः ‘यहोवा के लिए पवित्र’।
37तब उसे नीले फीते से पगड़ी पर ऐसा बांधना कि वह पगड़ी के सामने रहे।
38यह हारून के माथे पर रहे, और जिन पवित्र वस्तुओं को इस्राएली समर्पित करते तथा पवित्र भेंट चढ़ाते हैं उन सब का दोष हारून अपने ऊपर उठाए। वह नित्य उसके माथे पर रहे कि वे यहोवा के सामने ग्रहण किए जाए।
39तू चोगे को महीन बुने हुए मलमल के चारखाने का बनाना, और पगड़ी को मलमल का बनाना। फिर एक कमरबन्द बनाना जिस पर बेलबूटे कढ़े हुए हो।
40“तब हारून के पुत्रों के लिए अंगरखे बनाना। साथ ही कमरबन्द और टोपियां भी उनकी महिमा और शोभा के लिए बनाना।
41तब तू अपने भाई हारून और उसके पुत्रों को इन्हें पहनाना, और उनका अभिषेक करना, तथा उनको पवित्र करना कि वे मेरे लिए याजकीय सेवा करे।
42उनके खुले अंगों को ढकने के लिए मलमल के जांघिये बनाना जो कमर से जांघ तक हो।
43हारून और उसके पुत्र जब-जब मिलापवाले तम्बू में प्रवेश करें या पवित्रस्थान में सेवकाई के लिए वेदी के समीप जाएं, तब-तब वे जांघियों को पहने रहें, ऐसा न हो कि वे दोषी ठहर कर मर जाए। यह उसके लिए तथा उसके बाद उसके वंशजों के लिए सर्वदा की विधि ठहरे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)