पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 15 / 48
यहेजकेल 15
1तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा;
2“हे मनुष्य की सन्तान, दाखलता की लकड़ी वन के अन्य किसी भी वृक्ष की डाल की लकड़ी से उत्तम कैसे हो सकती है?
3क्या उसकी लकड़ी लेकर उससे कुछ बनाया जा सकता है? क्या उससे खूंटी बनाई जा सकती है कि उस पर बर्तन लटकाया जा सके?
4यदि उसे ईंधन के लिए आग में डालें और आग उसके दोनों सिरे भस्म कर दे तथा उसका मध्य भाग भी जल जाए तो क्या वह किसी काम की रहेगी?
5देख, जब साबुत लकड़ी से कुछ नहीं बनाया जा सकता है तो वह आग में जलकर भस्म होने के बाद और अधिक निरर्थक क्यों न ठहरेगी?
6इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता हैः जिस प्रकार वन के वृक्षों में अंगूर की लकड़ी को मैंने आग का ईंधन ठहरा दिया, उसी प्रकार मैंने यरूशलेम के लोगों को भी ईंधन होने के लिए ठहरा दिया है;
7और मैं उनकी हानि करना ठान लूंगा। यघपि वे आग से निकल आए हैं फिर भी आग उन्हें भस्म कर देगी। जब मैं उनकी हानि करना ठान लूंगा तब तुम जान लोगे कि मैं ही यहोवा हू।
8इस प्रकार मैं देश को उजाड़ दूंगा, क्योंकि उन्होंने विश्वासघात किया है,” प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)