पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 16 / 48
यहेजकेल 16
1तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा;
2“हे मनुष्य की सन्तान, यरूशलेम पर उसके घृणित कार्य प्रकट करके
3कह कि प्रभु यहोवा यरूशलेम से यों कहता है; तेरी उत्पत्ति और तेरा जन्म कनान देश में हुआ, तेरा पिता एमोरी और माता हित्ती थी।
4तेरा जन्म ऐसा हुआः जिस दिन तेरा जन्म हुआ तेरा नाल न काटा गया और न तू शुद्ध होने के लिए जल से नहलाई गई, न तुझ पर नमक मला गया और न तुझे कपड़े में लपेटा गया।
5इनमें से कुछ भी करने के लिए किसी ने तुझ पर दयादृष्टि नहीं की और न कुछ करुणा की, वरन् तेरे जन्म के दिन ही तुझे घृणित वस्तु समझकर खुले मैदान में फेंक दिया गया।
6“जब मैं तेरे पास से होकर निकला और तुझे रक्त में छटपटाते देखा, तो जबकि तू रक्त में ही थी मैंने तुझसे कहा, ‘जीवित रह!’ हां, जब तू रक्त में लोट रही थी, मैंने तुझसे कहा, ‘जीवित रह।’
7मैंने तुझे खेत के पौधों के समान बढ़ाया। तब तू बढ़कर ऊंची हो गई और सर्वोत्तम आभूषण बन गई; तेरी छातियां सुडौल हुईं और तेरे बाल बढ़े। परन्तु तू नंगी और निर्वस्त्र थी।
8“तब मैं तेरे पास से होकर निकला और मैंने तुझ पर दृष्टि की और देखा, तू तो प्रेम करने योग्य व्यस्क हो गई थी; अतः मैंने अपना बागा तुझे ओढ़ा दिया और तेरी नग्नता ढांप दी। मैंने तुझसे शपथ खाकर और वाचा बांध कर तुझे अपना लिया। यहोवा की यही वाणी है।
9तब मैंने तुझे जल से नहलाकर तुझ पर से रक्त साफ कर दिया और तेरी देह पर तेल मला।
10मैंने तुझे बूटेदार वस्त्र भी पहनाए तथा सुइसों की खाल की जूतियां पहनाईं, तुझे महीन मलमल से लपेटा और रेशमी कपड़ा ओढ़ाया।
11मैंने तुझे आभूषणों से सजाया, हाथों में चूड़ियां और गले में हार पहनाया,
12तेरी नाक में नथ, कानों में बालियां पहनाईं तथा तेरे सिर पर सुन्दर मुकुट रखा।
13इस प्रकार तू सोने-चांदी, महीन मलमल, रेशम, और बूटेदार वस्त्रों से सजाई गई। तेरा भोजन मैदा, मधु और तेल था; अतः तू अत्यन्त सुन्दर वरन् रानी होने के योग्य हो गई।
14तब सौंदर्य के कारण तेरी कीर्ति जाति-जाति में फैल गई क्योंकि उस भव्यता के कारण जो मैंने तुझे दी तेरा सौन्दर्य सिद्ध हो गया।” प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
15“परन्तु तूने अपनी सुन्दरता पर भरोसा किया और अपनी कीर्ति के कारण व्यभिचार किया और प्रत्येक इच्छुक पथिक के साथ कुकर्म किया।
16और तूने अपने सुन्दर वस्त्र लेकर अपने लिए रंग-बिरंगे ऊंचे स्थान बना लिए और वहां ऐसी वेश्यावृत्ति की जैसी न कभी हुई और न होनी चाहिए।
17और तूने मेरे दिए हुए सोने-चांदी के बने अपने सुन्दर आभूषण भी लेकर उनसे अपने लिए पुरुषों की मूर्तियां बनाईं कि उनके साथ व्यभिचार करे।
18तब तूने अपने बेल बूटेदार वस्त्र लेकर उनको ढांप दिया और मेरा तेल और धूप उनके सामने चढ़ाया।
19और मेरी रोटी भी जो मैंने तुझे दी; मैदा, तेल और मधु जो मैं तुझे खिलाता था उसे लेकर तूने उनके सामने सुखदायक सुगन्ध करके चढ़ाया; ऐसा ही हुआ है,” प्रभु यहोवा की यह वाणी है।
20“इसके अतिरिक्त तूने अपने पुत्र-पुत्रियों को लेकर जिन्हें तूने मेरे लिए जन्म दिया, खा जाने के लिए मूर्तियों के आगे बलिदान कर दिया। क्या तेरा यह व्यभिचार छोटी बात है?
21तूने मेरे बच्चों को घात किया और उन्हें मूर्तियों के लिए आग में होमबलि किया।
22और अपने सब घृणित कार्यों और व्यभिचार के अतिरिक्त तूने अपनी जवानी के दिनों को स्मरण न किया जब तू निर्वस्त्र और नंगी अपने रक्त में छटपटा रही थी।
23“तब तेरी सारी कुटिलता के पश्चात् क्या हुआ? प्रभु यहोवा की यह वाणी है, हाय, तुझ पर हाय कि
24तूने प्रत्येक चौक में अपने लिए मन्दिर और वेदी बनवा ली।
25प्रत्येक गली के सिरे पर तूने अपने लिए ऊंचा स्थान बनवाया और अपनी सुन्दता को घृणित कर लिया, और अपना व्यभिचार बढ़ाने के लिए प्रत्येक पथिक के सामने अपने पैर फैलाए।
26तूने अपने कामुक मिस्री पड़ोसियों के साथ भी व्यभिचार किया और मुझे क्रोध दिलाने के लिए अपनी कामुकता को अत्यधिक बढ़ाया।
27इसलिए अब देख, मैंने अपना हाथ तेरे विरुद्ध बढ़ाया है और तेरी रसद कम कर दी है। और मैंने तुझे उन पलिश्ती स्त्रियों की इच्छा पर छोड़ दिया है जो तुझसे घृणा करतीं और तेरी लम्पटता से लजाती है।
28तूने अश्शूरियों से भी व्यभिचार किया क्योंकि तेरी पिपासा शान्त न हुई, हां, उनसे व्यभिचार करके भी तेरी पिपासा शान्त न हुई।
29तूने अपना व्यभिचार व्यापारी कसदियों के देश तक बढ़ाया, फिर भी तेरी पिपासा शान्त न हुई।
30“प्रभु यहोवा की यह वाणी हैः तेरा हृदय कैसा चंचल है कि तू निर्लज्ज वेश्या के समान ये सब कार्य करती है।
31हर गली के सिरे पर वेदी और हर चौक में ऊंचा स्थान बनाकर तूने कमाई को तुच्छ जाना इसलिए तू वेश्या भी न रही।
32हे व्यभिचारिणी पत्नी, तू तो अपने पति के बदले पर-पुरुष से सहवास करती है।
33पुरुष तो सब वेश्याओं को भेंट देते हैं, परन्तु तू अपने प्रेमियों को लुभाने के लिए स्वयं भेंट देती है कि वे चारों ओर से वेश्यागमन के लिए तेरे पास आए।
34इसलिए तू अपनी वेश्यावृत्ति में दूसरी स्त्रियों से भिन्न है, तेरी जैसी वेश्यावृति और कोई नहीं करती, क्योंकि तू स्वयं धन देती है जबकि तुझे कोई धन नहीं देता, इस प्रकार तू भिन्न है।
35“इसलिए हे व्यभिचारिणी, अब यहोवा का वचन सुन।
36प्रभु यहोवा यों कहता हैः तूने अपने सब प्रेमियों और सब घृणित मूर्तियों के साथ व्यभिचार करके तथा देवताओं को अपने पुत्रों का रक्त चढ़ाकर, अपनी निर्लज्जता प्रकट की और तू निर्वस्त्र हुई,
37इस कारण अब देख, मैं तेरे सब प्रेमियों को जिनके साथ तूने भोग-विलास किया उन्हें इकट्ठा करूंगा, हां जिनसे तूने प्रेम किया और जिनसे तूने घृणा की उन सबको मैं सब दिशाओं से एकत्र करूंगा, और तुझे नग्न करूंगा कि वे तेरी सारी नग्नता देखे।
38मैं तेरा न्याय वैसा ही करूंगा जैसा व्यभिचारिणी या हत्यारी स्त्रियों का न्याय किया जाता है और मैं तुझे क्रोध और जलन से दण्ड दूंगा।
39मैं तुझे तेरे प्रेमियों के हाथ सौंप भी दूंगा, और वे तेरी वेदियों को गिरा देंगे, ऊंचे स्थानों को ढा देंगे, तुझे निर्वस्त्र कर देंगे, तेरे आभूषण छीन लेंगे, और तुझे नंगी और वस्त्रहीन छोड़ देंगे।
40वे तेरे विरुद्ध भीड़ को भड़का देंगे, वे तेरा पथराव करके तलवार से टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगे।
41वे तेरे घरों को आग लगाकर फूंक देंगे तथा बहुत सी स्त्रियों के सामने तुझे दण्ड देंगे। तब मैं तुझे वेश्यावृत्ति करने से रोक दूंगा और तू व्यभिचार का दाम देती न रहेगी।
42इस प्रकार मैं अपना क्रोध शान्त करूंगा और मेरी जलजलाहट तुझसे दूर हो जाएगी, तथा मैं शान्त हो जाऊंगा और फिर क्रोध न करूंगा।
43क्योंकि तूने अपनी युवावस्था के दिन स्मरण न रखे वरन् इन सब बातों के कारण मेरा क्रोध भड़काया है, इसलिए देख, तेरा आचरण मैं तेरे ही सिर पर लौटा दूंगा, जिससे तू अपने अन्य घृणित कार्यों से बढ़कर और कोई कुकर्म न करे। प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
44“देख, कहावत कहने वाले तेरे विषय में यह कहावत कहेंगे, ‘जैेसी मां, वैसी बेटी।’
45तू अपनी मां की बेटी है जो अपने पति और बच्चों से घृणा करती है। तू अपनी बहनों की बहन है जो अपने पतियों और बच्चों से घृणा करती थी। तेरी माता हित्ती और पिता एमोरी था।
46तेरी बड़ी बहन सामरिया है जो तेरे उत्तर में अपनी पुत्रियों के साथ रहती है; और तेरी छोटी बहन सदोम है जो दक्षिण में अपनी पुत्रियों के साथ रहती है।
47परन्तु तू न केवल उनके मार्ग पर चली बल्कि तूने उनके समान ही घृणित कार्य किए वरन् इनको बहुत ही छोटी बात जानकर तूने अपने सारे आचरण में उनसे भी अधिक भ्रष्टता की।
48प्रभु यहोवा की यह वाणी है मेरे जीवन की शपथ, तेरी बहन सदोम और उसकी पुत्रियों ने वैसा नहीं किया जैसा तू और तेरी पुत्रियों ने किया है।
49देख, तेरी बहन सदोम का अधर्म यह था कि वह अपनी पुत्रियों सहित अहंकार, पेटू और सुख-विलास की प्रेमी थी, परन्तु उसने दीन-दरिद्रों की सुधि न ली।
50वे अहंकारी थीं और उन्होंने मेरे सम्मुख घृणित कार्य किए, अतः यह देखकर मैंने उन्हें निकाल दिया।
51इसके अतिरिक्त सामरिया ने तेरे पापों के आधे पाप भी न किए क्योंकि तूने उनसे कई गुणा अधिक घृणित कार्य किए इस प्रकार जितने घृणित कार्य तूने किए उनके सामने तेरी बहनें धर्मी दिखाई पड़ती हैं।
52इसलिए अपनी लज्जा को भी सह, तूने न्याय को अपनी बहनों के पक्ष में कर दिया। तेरे पापों के कारण जिसमें तूने अधिक घृणित आचरण किया है वे तेरी अपेक्षा कम दोषी है। हां, तू लज्जित भी हो और अपनी निन्दा सह क्योंकि तूने अपनी बहनों को धर्मी दिखाई देने वाली ठहराया है।
53“फिर भी मैं उनको दासत्व से फेर लाऊंगा, अर्थात् सदोम और उसकी पुत्रियों को तथा सामरिया और उसकी पुत्रियों को और उनके साथ तेरे बन्धुवों को भी बन्धुवाई से लौटा लाऊंगा।
54जिससे कि तू अपना अपमान सहती रहे और जो कुछ तूने किया है उसके कारण लज्जित होती रहे क्योंकि तू उनके लिए सांत्वना का कारण ठहरी है,
55तथा तेरी बहनें, सदोम और सामरिया अपनी-अपनी पुत्रियों सहित अपनी पहली दशा को पहुंचेंगी और तू भी अपनी पुत्रियों सहित अपनी पहली दशा में पहुंचेगी
56तेरे गौरव के समय अर्थात् तेरी दुष्टता के प्रकट होने से पहले जैसे तेरी बहन सदोम का नाम तेरे मुख से कभी नहीं सुना गया,
57वैसे ही अब एदोम की पुत्रियां और उसकी सब पड़ोसिनें तथा पलिश्तियों की पुत्रियां-वे सब जो तेरे आस-पास हैं, तेरा तिरस्कार करती है।
58तू अपने कुकर्म और घृणित कार्यों का दण्ड भोग रही है,” यहोवा की यही वाणी है।
59प्रभु यहोवा यों कहता है, “जैसा तूने किया है वैसा ही मैं भी तेरे साथ करूंगा” क्योंकि तूने वाचा तोड़कर शपथ को तुच्छ जाना है।
60“फिर भी मैं तेरी जवानी के समय की अपनी वाचा को स्मरण करूंगा और तेरे साथ सदैव की वाचा बान्धूंगा।
61जब तू अपनी दोनों बहनों, अर्थात् छोटी और बड़ी बहन को ग्रहण करेगी तब अपने चाल-चलन को स्मरण करके लज्जित होगी। मैं उन्हें तुझे तेरी पुत्रियों के रूप में दूंगा परन्तु तेरी वाचा के कारण नही।
62इस प्रकार मैं तेरे साथ अपनी वाचा दृढ़ करूंगा, तब तू जान जाएगी कि मैं ही यहोवा हूं,
63जिससे तू स्मरण करके लज्जित हो और अपमान के कारण कभी अपना मुंह न खोले। यह तब होगा जब मैं वह सब जो तूने किया है क्षमा कर दूंगा।” प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)