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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 17 / 48

यहेजकेल 17

1तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,

2“हे मनुष्य की सन्तान, इस्राएल के घराने से यह पहेली बुझा और दृष्टान्त कह कि,

3प्रभु यहोवा यों कहता हैः एक बड़ा उकाब था। उसके विशाल डैने, लम्बे पर और रंग-बिरंगे घने पंख थे। वह लेबनोन जाकर देवदार की फुगनी नोच ले गया।

4वह उस फुगनी की सबसे ऊपर की पतली टहनियों को तोड़कर व्यापारियों के देश में ले गया। उसने उन्हें लेन-देन करने वालों के नगर में लगा दिया।

5उसने देश से कुछ बीज भी ले जाकर उपजाऊ भूमि में बो दिया। उसने उसे वहां बोया जहां बहुत जल था। उसने उसे मजनूं वृक्ष की भांति लगाया।

6उसमें से अंकुर फूट निकला, और वह नीचे फैलने वाली दाखलता बन गई। उसकी टहनियां उसी की ओर झुक गईं, पर जड़ उसके नीचे ही रही। तब वह दाखलता हो गई, उसमें काेंपलें और डालियां फूट निकली।

7“पर एक अन्य बड़ा उकाब था जिसके बड़े डैने और घने पंख थे; और देखो, यह दाखलता अपनी क्यारी से जहां वह रोपी गई थी उसकी ओर अपनी जड़ फैलाने और डालियां झुकाने लगी कि वह उसे सींचे।

8वह तो उपजाऊ भूमि में बहुत जल के समीप इसीलिए रोपी गई थी कि उसमें शाखाएं फूटें, उसमें फल लगें, और वह एक उत्तम दाखलता बने।

9अब तू कह कि प्रभु यहोवा याें कहता हैः क्या वह पनपेगी? क्या वह उसको जड़ से नहीं उखाड़ेगा और उसको फल रहित न करेगा कि वह सूख जाए, और उसकी कोंपलें मुर्झा जाएं जिससे उसको उखाड़ने में न तो बड़े सामर्थ्य और न बहुत लोगों की आवश्यकता पड़े?

10देखो, यदि वह रोपी जाए तो क्या फिर पनपेगी? जब पुरवाई चले तो क्यारी में जहां वह रोपी गई थी क्या बिल्कुल सूख न जाएगी?”

11फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः

12“उस विद्रोही घराने से कहः ‘क्या तू नहीं जानता कि इन बातों का क्या अर्थ है? उससे कह कि बेबीलोन का राजा यरूशलेम आकर उसके राजा और प्रधानों को अपने साथ लेकर बेबीलोन गया।

13और उसने राजघराने के एक जन को लेकर उससे वाचा बांधी तथा उसको शपथ खिलाई। वह देश के शूरवीरों को भी ले गया

14कि राज्य उसके अधीन रहे और अपना सिर न उठा सके और वाचा का पालन करता रहे कि वह स्थिर बना रहे।

15परन्तु उसने उससे विद्रोह करके अपने दूत मिस्र भेजे कि घोड़े और बहुत-से योद्धा प्राप्त करे। क्या वह सफल होगा? क्या ऐसा करने वाला बच निकलेगा? क्या वह सचमुच, वाचा भंग करके भी बच निकलेगा?

16प्रभु यहोवा यों कहता है, मेरे जीवन की शपथ, जिस राजा ने उसे गद्दी पर बैठाया और जिसकी शपथ का उसने तिरस्कार किया तथा जिसकी वाचा को उसने भंग किया, निश्चय, उसी के देश अर्थात् बेबीलोन में ही वह नष्ट हो जाएगा।

17जब युद्ध में बहुत-से प्राणियों को नष्ट करने के लिए टीले और घेराबन्दी की दीवारें बनाईं जाएं तो फि़रौन भी अपनी विशाल सेना और असंख्य योद्धाओं के द्वारा उसकी सहायता नहीं कर सकेगा।

18उसने वाचा भंग करने के द्वारा शपथ का तिरस्कार किया है, और देखो, वचन देकर भी उसने यह सब किया है, इसलिए वह नहीं बचेगा।

19अतः प्रभु यहोवा याें कहता है, “मेरे जीवन की सौगन्ध, मेरी शपथ जिसकी उसने अवहेलना की है और मेरी वाचा जिसको उसने भंग किया है, उनको मैं उसी के सिर पर मढ़ दूंगा।

20मैं अपना जाल उस पर फैलाऊंगा और वह मेरे फंदे में फँस जाएगा। तब मैं उसे बेबीलोन ले आऊंगा और विश्वासघात का जो कार्य उसने मेरे विरुद्ध किया है, उसका वहां न्याय करूंगा।

21और उसकी सारी सेना के सब शूरवीर तलवार से नष्ट होंगे और शेष लोग चारों ओर तितर-बितर कर दिए जाएंगे। तब तुम जानोगे कि मुझ यहोवा ने ऐसा कहा है।”

22प्रभु यहोवा यों कहता है, “मैं भी देवदार की ऊंची फुनगी से एक कोंपल लूंगा और उसे रोपूंगा। मैं उसकी सबसे ऊंची टहनियों में से एक कोमल टहनी लेकर उसे अत्यन्त ऊंचे पर्वत पर लगाऊंगा।

23मैं उसे इस्राएल के ऊंचे पर्वत पर रोपूंगा जिससे उसमें शाखाएं फूट निकलें और फल लगें तथा वह विशाल देवदार बन जाए। उसमें हर प्रकार के पक्षी घोंसला बनाकर उसकी डालियों की छाया में बसेरा करेंगे।

24तब मैदान के सब वृक्ष जान जाएंगे कि मैं यहोवा हू। मैं ही ऊंचे वृक्ष को नीचा और नीचे को ऊंचा करता हूँ, हरे वृक्ष को सुखा देता और सूखे वृक्ष को हरा-भरा कर देता हू। मैं यहोवा हूं; मैंने कहा है, मैं ही पूरा भी करूंगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)