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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 24 / 48

यहेजकेल 24

1तब नवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा;

2“हे मनुष्य की सन्तान आज के दिन का नाम लिख ले, हां आज ही के दिन। बेबीलोन के राजा ने आज ही के दिन यरूशलेम पर घेरा डाला था।

3इस विद्रोही घराने से यह दृष्टान्त कहः प्रभु यहोवा यों कहता है कि हंडे को आग पर चढ़ाओ, और चढ़ाकर उसमें पानी भी भरो;

4उसमें रान, कन्धा और अच्छे-अच्छे टुकड़े डालो और उसमें चुनी हुई अच्छी हड्डियां भर दो।

5झुंड में से सबसे अच्छा पशु लो, हंडे के नीचे लकड़ियों को ढेर लगाओ। उसे खूब अच्छी तरह से उबालो और हड्डियों को भी उसमें पकाओ।”

6इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता हैः खूनी नगरी पर हाय और हाय उस हंडे पर जिसमें मोरचा लगा है, और उसका मोरचा छूटा नहीं है, उसमें से एक के बाद एक टुकड़ा निकालो, वे चुने न जाए।

7क्योंकि उसका रक्त उसके मध्य है उसने उसे खुली चट्टान पर रख दिया; उसने उसे धूल से ढांपने के लिए भूमि पर नहीं उंडेला।

8मैंने उसका रक्त खुली चट्टान पर रखा है, कि वह ढंक न जाए कि बदला लेने के लिए क्रोध भड़के।

9इसलिए, प्रभु यहोवा यों कहता हैः हाय उस खूनी नगरी पर! मैं भी ढेर को बहुत बड़ा करूंगा।

10लकड़ी का ढेर लगाकर आग धधकाओ, मांस अच्छी तरह पकाओ, उसमें मसाले मिलाओ, और हड्डियों को गल जाने दो।

11तब खाली हंडे को अंगारों पर रखो, जिससे वह गर्म हो जाए, उसका कांसा चमक उठे, उसका मैल उसमें पिघल जाए और उसका मोरचा जल जाए।

12उसने परिश्रम कराके मुझे थका दिया, फिर भी उसका भारी मोरचा नहीं छूटा; उसका मोरचा आग में डाल दो।

13तेरी अशुद्धता व्यभिचार की है मैं तुझे शुद्ध करना चाहता था, फिर भी तू शुद्ध नहीं हुई, जब तक मैं अपना क्रोध तुझ पर उंड़ेल कर शांत न कर लूं, तू अपनी अशुद्धता से फिर शुद्ध न की जाएगी।

14मुझ यहोवा ही ने ऐसा कहा है, ऐसा हो जाएगा और मैं ऐसा ही करूंगा, मैं द्रवित न होऊंगा, तरस भी न खाऊंगा, मुझे खेद भी न होगा, मैं तेरे आचरण और तेरे कामाें के अनुसार तेरा न्याय करूंगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।

15और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,

16“हे मनुष्य की सन्तान, देख, मैं तेरी आंखों की प्रिया को एक ही आघात में तुझ से ले लेने वाला हूं, परन्तु तू शोकित न होना, न रोना और न आंसू बहाना।

17चुपचाप आहें भरना, मृतक के लिए विलाप न करना। अपनी पगड़ी बांध लेना और पैरों में अपनी जूती पहन लेना, अपने होठों को मत ढांपना, और न मृतक-भोज खाना।

18अतः मैं सवेरे लोगों से बोला और सांझ को मेरी पत्नी मर गई। फिर सवेरे मैंने वैसा ही किया जैसी मुझे आज्ञा दी गई थी।

19और लोगों ने मुझसे कहा, “क्या तू हमें नहीं बताएगा कि जो कुछ तू कर रहा है उसका हमारे लिए क्या अर्थ है?”

20तब मैंने उनसे कहा कि यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः

21इस्राएल के घराने से कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः “देख, मैं अपने पवित्रस्थान को जो तुम्हारी शक्ति का गौरव, तुम्हारी आंखों की अभिलाषा और तुम्हारे हृदय का हर्ष है उसे अशुद्ध करने वाला हूं, और तुम्हारे पुत्र-पुत्रियां जिन्हें तुम पीछे छोड़ आए हो, सब तलवार से मारे जाएंगे।

22और जैसा मैंने किया है वैसा ही तुम भी करोगे, तुम अपना होंठ नहीं ढांपोगे और मृतक-भोज नहीं खाओगे।

23तुम्हारे सिर पर तुम्हारी पगड़ी और पैरों में जूते होंगे, तुम न तो शोक करोगे और न रोओगे; परन्तु तुम अपने अधर्म में सड़ जाओगे और एक-दूसरे को देखकर कराहोगे।

24इस प्रकार यहेजकेल तुम्हारे लिए चिह्न ठहरेगा और वह सब जो उसने किया, तुम भी ठीक वैसा ही करोगे। जब ऐसा हो जाएगा तब तुम जान लोगे कि मैं ही प्रभु यहोवा हू।”

25‘और हे मनुष्य की सन्तान, जिस दिन मैं उनके गढ़ से उनका आनन्द और घमंड, उनकी आंखों की अभिलाषा और उनके हृदय का आनन्द जो उनके बेटे-बेटियां हैं, ले लूंगा,

26उस दिन जो बच निकलेगा वह तेरे पास आकर तुझे समाचार सुनाएगा।

27उस दिन बच निकलने वाले के लिए तेरा मुंह खुल जाएगा और तू बोलेगा और फिर गूंगा न रहेगा। इस प्रकार तू उनके लिए चिह्न ठहरेगा, तब वे जान जाएंगे कि मैं यहोवा हू।’

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)