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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 31 / 48

यहेजकेल 31

1ऐसा हुआ कि ग्यारहवें वर्ष के तीसरे महीने के पहले दिन यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः

2“हे मनुष्य की सन्तान, मिस्र के राजा फि़रौन और उसकी विशाल भीड़ से कहः वैभव में कौन तेरे तुल्य है?

3देख, अश्शूर तो लेबनोन का देवदार था जो अत्यधिक ऊंचा था। उसकी शाखाएं सुन्दर और छायादार थी। उसकी फुनगियां बादलों तक पहुंचती थी।

4जल ने उसे उगाया, गहरे सोतों ने उसे बढ़ाया। इनकी धाराएं उसके रोपण स्थल के चारों ओर निरन्तर बहती थी। इनकी जल-धाराएं मैदान के सब वृक्षों तक पहुंचती थी।

5इस कारण उसकी ऊंचाई वन के अन्य सब वृक्षों से अधिक हो गई। जल की बहुतायत के कारण उसकी शाखाएं अनेक, और डालें लम्बी होकर बहुत फैल गईं।

6उसकी डालों पर आकाश के सब प्रकार के पक्षी बसेरा करते थे उसकी शाखाओं के नीचे मैदान के सब प्रकार के पशु बच्चे देते थे, और उसकी छाया में सब बड़ी जातियां निवास करती थी।

7इस प्रकार वह अपनी ऊंचाई और डालियों की लम्बाई के कारण सुन्दर था क्योंकि जड़ों के पास बहुत जल था।

8परमेश्वर के उघान के देवदार भी उसकी बराबरी नहीं कर सकते थे, सनौवर के वृक्ष उसकी डालों की तुलना में कुछ न थे, चिनार वृक्ष उसकी डालों के समान न थे। परमेश्वर के उघान का कोई भी वृक्ष सुन्दरता में उसके तुल्य न था।

9मैंने घनी डालियों से उसे सुन्दर बनाया था, यहां तक कि परमेश्वर की अदन की बारी के सब वृक्ष भी उससे ईर्ष्या करते थे।

10“इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता हैः क्योंकि वह ऊंचाई में बड़ा है, और उसकी फुनगी बादलों तक पहुंची है और ऊंचाई के कारण उसका हृदय घमंडी हो गया है,

11इसलिए मैं उसे एक तानाशाह जाति के हाथ में कर दूंगा। वह उससे अच्छी तरह निपट लेगी। उसकी दुष्टता के कारण मैंने उसे निकाल दिया है।

12क्रूर विदेशी जातियों ने उसे काट कर छोड़ दिया है। उसकी डालें पर्वतों पर और सब तराइयों में गिरी पड़ी हैं, और उसकी शाखाएं देश के सब नालों में टूटी पड़ी है। और पृथ्वी के सब लोग उसकी छाया छोड़ कर चले गए है।

13उस गिरे हुए वृक्ष पर आकाश के सब पक्षी बसेरा करेंगे और उसकी टूटी हुई शाखाओं पर मैदान के पशु रहेंगे,

14जिससे कि जल के किनारे के सब वृक्ष ऊंचाई में अधिक न बढ़ें और न अपनी फुनगियों को बादलों तक पहुंचाएं, और न भरपूर जल पाकर अपने सिर उठाएं, क्याेंकि वे सबके सब कब्र में पड़े मनुष्यों के समान मृत्यु अर्थात् अधोलोक के अधीन कर दिए गए है।

15“प्रभु यहोवा यों कहता हैः जिस दिन वह अधोलोक में उतर गया मैंने विलाप करवाया। मैंने गहरे जल को ढाँप दिया और नदियों को रोक दिया। उसके जल की बहुतायत को रोक दिया गया। मैंने लेबनोन से उसके लिए विलाप करवाया, और उसके कारण मैदान के सब वृक्ष मुर्झा गए।

16जब मैंने उसे गड्हे में जाने वालों के साथ अधोलोक में पटक दिया तो उसके गिरने की आवाज से मैंने जाति-जाति को कँपा दिया। तब अदन के भरपूर जल पाने वाले वृक्षों तथा लेबनोन के सर्वोत्तम वृक्षों को अधोलोक में चिर-शान्ति मिली।

17वे, हां, वे भी जो उसका बल थे और उसकी छाया में जाति-जाति के मध्य रहते थे, उसके साथ तलवार से घात किए हुओं के पास अधोलोक में उतर गए।

18“अतः महिमा और वैभव में अदन का कौन-सा वृक्ष तेरे तुल्य है? फिर भी तू अदन के वृक्षों के साथ अधोलोक में उतर जाएगा, तू ख़तनारहिताें के मध्य, हां, तलवार से घात किए हुओं के मध्य पड़ा रहेगा। फि़रौन और उसकी सेनाओं के साथ भी ऐसा ही होगा। प्रभु यहोवा की यही वाणी है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)