पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 17 / 50
उत्पत्ति 17
1जब अब्राम निन्यानवे वर्ष का हुआ, तब यहोवा ने अब्राम पर प्रकट होकर उससे कहा, “मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूं; तू मेरे सम्मुख चल और सिद्ध होता जा।
2मैं अपने और तेरे बीच अपनी वाचा बाँधूंगा, और मैं तुझे अत्यन्त ही बढ़ाऊँगा।”
3तब अब्राम मुंह के बल गिरा, और परमेश्वर उससे यह कहकर बातें करने लगा,
4“देख, मेरी वाचा तो तेरे साथ है, और तू कई जातियों का मूल पिता होगा।
5तेरा नाम अब से अब्राम न रहेगा, परन्तु तेरा नाम इब्राहीम होगा; क्योंकि मैं तुझे बहुत-सी जातियों का पिता ठहराऊंगा।
6मैं तुझेे अत्यधिक फलवन्त करूंगा, मैं तुझसे अनेक जातियां बनाऊंगा और तुझसे राजा उत्पन्न होंगे।
7मैं अपने और तेरे बीच अपनी वाचा बांधूंगा, तथा तेरे पश्चात् तेरे वंश और उनकी पीढ़ी से पीढ़ी के साथ सदाकाल की वाचा इस आशय से बाँधूंगा, कि मैं तेरा तथा तेरे पश्चात् तेरे वंश का भी परमेश्वर ठहरू।
8मैं तुझे और तेरे पश्चात् तेरे वंश को यह सारा कनान देश जिसमें तू प्रवासी होकर रहता है, युग-युग के लिए दे दूंगा; और मैं उनका परमेश्वर होऊंगा।”
9फिर परमेश्वर ने इब्राहीम से कहा, “तू तो मेरी वाचा का पालन करना तथा तेरे बाद तेरे सब वंशज, पीढ़ी से पीढ़ी तक उसका पालन करे।
10जो वाचा मेरे और तेरे बीच तथा तेरे पश्चात् तेरे वंशज के बीच है और जो तुम माना करोगे वह यह है कि तुम में से प्रत्येक पुरुष का ख़तना किया जाएगा।
11तुम्हारी खलड़ी का ख़तना किया जाए; यह मेरे और तुम्हारे मध्य बाँधी गई वाचा का चिह्न होगा।
12और तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी तक तुम्हारे मध्य आठ दिन के प्रत्येक लड़के का ख़तना किया जाए, चाहे वह तुम्हारे घर में उत्पन्न हुआ हो अथवा किसी परदेशी से धन देकर मोल लिया गया हो और तुम्हारे वंश का न हो।
13जो दास तेरे घर में उत्पन्न हुआ हो अथवा तेरे धन से मोल लिया गया हो उसका ख़तना अवश्य किया जाए; इस प्रकार मेरी वाचा का यह चिह्न युग युग तक तुम्हारी देह में बना रहेगा।
14पर जो पुरुष ख़तना रहित रहे, और जिसकी खलड़ी का ख़तना नहीं किया गया हो वह पुरुष अपने लोगों में से नष्ट किया जाए उसने मेरी वाचा को तोड़ा है।”
15फिर यहोवा ने इब्राहीम से कहा, “तू अपनी पत्नी सारै को, सारै कहकर न पुकारना, वरन् उसका नाम सारा होगा।
16और मैं उसे आशीष दूंगा, और निश्चय तुझे उसके द्वारा एक पुत्र दूंगा। और मैं उसे आशीष दूंगा और वह जाति-जाति की जननी होगी; और उससे राज्य-राज्य के राजा उत्पन्न होंगे।”
17तब इब्राहीम मुंह के बल गिरकर हंसा और मन में सोचने लगा, “क्या सौ वर्ष के वृद्ध पुरुष के सन्तान हो सकती है? और क्या सारा जो नब्बे वर्ष की है पुत्र उत्पन्न कर सकेगी?”
18और इब्राहीम ने परमेश्वर से कहा, “इश्माएल तेरी दृष्टि में बना रहे, यही बहुत है।”
19परन्तु परमेश्वर ने कहा, “नहीं, तेरी पत्नी सारा ही तेरे लिए पुत्र उत्पन्न करेगी, और तू उसका नाम “इसहाक रखना; और मैं उसके साथ ऐसी वाचा बाँधूंगा जो उसके पश्चात् उसके वंश के लिए युग-युग तक रहेगी।
20इश्माएल के विषय में भी मैंने तेरी प्रार्थना सुनी है। देख, मैं उसे भी आशीष दूंगा, उसे फलवन्त करूंगा और अत्यधिक बढ़ाऊंगा। वह बारह प्रधानों का पिता होगा और मैं उसे एक बड़ा राष्ट्र बनाऊंगा।
21परन्तु इसहाक ही के साथ मैं अपनी वाचा बांधूंगा, जो सारा से अगले वर्ष के इसी नियुक्त समय में उत्पन्न होगा।”
22तब परमेश्वर अपनी वार्ता समाप्त करके इब्राहीम के पास से ऊपर चला गया।
23तब इब्राहीम ने अपने पुत्र इश्माएल को तथा उसके घर में उत्पन्न हुए सब लोगों को तथा जिन्हें उसने धन देकर मोल लिया था, अर्थात् उसके घर में जितने पुरुष थे, उन सभों को ले जाकर उसी दिन परमेश्वर के वचनानुसार उनकी खलड़ी का ख़तना किया।
24जब इब्राहीम की खलड़ी का ख़तना हुआ तब वह निन्यानबे वर्ष का था।
25और जब इश्माएल की खलड़ी का ख़तना हुआ तब उसकी आयु तेरह वर्ष की थी।
26इब्राहीम और उसके पुत्र इश्माएल दोनों का एक ही दिन ख़तना हुआ।
27उसके साथ ही उसके घर के सब पुरुषों का जो घर में उत्पन्न हुए तथा जो परदेशियों के हाथ से मोल लिए गए थे, ख़तना हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)