पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 20 / 50
उत्पत्ति 20
1इब्राहीम वहां से नेगेव देश को गया और कादेश और शूर के बीच जा बसा। वह प्रवासी के रूप में गरार में रहने लगा।
2और इब्राहीम ने अपनी पत्नी सारा के विषय में कहा, “वह मेरी बहन है,” अतः गरार के राजा अबीमेलेक ने सारा को बुलवाकर अपने पास रख लिया।
3पर रात को स्वप्न में परमेश्वर ने अबीमेलेक के पास आकर कहा, “देख, जिस स्त्री को तूने रख लिया है उसके कारण तू मर जाएगा, क्योंकि वह विवाहित है।”
4परन्तु अबीमेलेक उसके पास न गया था, इसलिए उसने कहा, “प्रभु, क्या तू निर्दोष जाति को भी घात कर डालेगा?
5क्या उसने स्वयं मुझ से नहीं कहा, ‘वह मेरी बहन है’? और उस स्त्री ने भी स्वयं कहा था, ‘वह मेरा भाई है।’ यह कार्य मैंने अपने निर्दोष हृदय से बिना किसी दुर्भावना के किया है।”
6तब परमेश्वर ने स्वप्न में उससे कहा, “हां, मैं जानता हूं कि तूने निर्दोष हृदय से ही ऐसा किया है, और मैंने ही तुझे अपने विरुद्ध पाप करने से बचाया है; इसलिए मैंने तुझे उसे स्पर्श तक नहीं करने दिया।
7अतः अब उस पुरुष की पत्नी को उसे लौटा दे, क्योंकि वह नबी है, और वह तेरे लिए प्रार्थना करेगा आैर तू जीवित रहेगा। परन्तु यदि तू उसे न लौटाए तो जान ले कि तू और जितने भी तेरे लोग हैं निश्चय ही सब मर जाएंगे।”
8अबीमेलेक ने बड़े सवेरे उठकर अपने सब सेवकों को बुलाया और उनसे ये सब बातें कहीं, और वे लोग बहुत डर गए।
9तब अबीमेलेक ने इब्राहीम को बुलवाकर उससे कहा, “तूने हमारे साथ यह क्या किया है? मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था कि तूने मेरे और मेरे राज्य के ऊपर इतना बड़ा पाप मढ़ दिया है? तूने मेरे साथ वह काम किया है जिसे करना उचित नहीं था।”
10फिर अबीमेलेक ने इब्राहीम से पूछा, “तूने क्या समझकर ऐसा काम किया है?”
11इब्राहीम ने उत्तर दिया, “मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैंने यह सोचा कि निश्चय इस स्थान में किसी को भी परमेश्वर का भय नहीं है, इसलिए मेरी पत्नी के कारण ये लोग मुझे मार डालेंगे।
12इसके अतिरिक्त वह सचमुच मेरी बहन ही है, वह मेरे पिता की बेटी तो है, पर मेरी माता की बेटी नहीं, और वह मेरी पत्नी हो गई;
13और ऐसा हुआ कि जब परमेश्वर ने मुझे अपने पिता का घर छोड़कर निकलने की आज्ञा दी तब मैंने उससे कहा, ‘तू मुझ पर इतनी कृपा करना कि जहां कहीं भी हम जाएं तू मेरे विषय में कहना कि यह मेरा भाई है’।
14तब अबीमेलेक ने भेड़ें और बैल और दास-दासियां लेकर इब्राहीम को दीं और उसकी पत्नी सारा को भी उसे लौटा दिया।
15और अबीमेलेक ने कहा, “देख, मेरा देश तेरे सामने है; जहां चाहे वहां बस जा।” “
16और उसने सारा से कहा, “देख , मैंने तेरे भाई को चांदी के एक हजार सिक्के दिए हैं; इससे तू अपने लोगों की दृष्टि में निर्दोष प्रमाणित होगी और सबके सामने तू दोषमुक्त ठहरेगी।”
17तब इब्राहीम ने परमेश्वर से प्रार्थना की; और परमेश्वर ने अबीमेलेक की पत्नी तथा दासियों को चंगा किया जिससे उन्हें फिर सन्तान उत्पन्न होने लगी।
18क्योंकि यहोवा ने इब्राहीम की पत्नी सारा के कारण अबीमेलेक के घर की सब स्त्रियों की कोखें पूर्णतः बन्द कर दी थी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)