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पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 21 / 50

उत्पत्ति 21

1तब यहोवा ने अपने वचन के अनुसार सारा की सुधि ली, और यहोवा ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार सारा के लिए किया।

2अतः सारा गर्भवती हुई और इब्राहीम के लिए उसके बुढ़ापे में, ठीक उसी समय पर जिसके विषय में परमेश्वर ने इब्राहीम से कहा था, उसने एक पुत्र को जन्म दिया।

3और इब्राहीम ने अपने पुत्र का नाम इसहाक रखा जो उससे उत्पन्न हुआ था, अर्थात् जिसे सारा ने उसके लिए जन्म दिया था।

4जब इब्राहीम का पुत्र इसहाक आठ दिन का हो गया तो इब्राहीम ने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार उसका ख़तना किया।

5जब उसका पुत्र इसहाक उससे उत्पन्न हुआ तब इब्राहीम सौ वर्ष का था।

6और सारा ने कहा, “परमेश्वर ने मुझे प्रफुल्लित किया; और इसे सुननेवाले मेरे साथ आनन्दित होंगे।”

7फिर उसने कहा, “क्या कोई इब्राहीम से कह सकता था कि सारा बच्चों को दूध पिलाएगी? फिर भी उसके बुढ़ापे में मुझसे उसके लिए एक पुत्र उत्पन्न हुआ है।”

8और वह बालक बढ़ा और उसका दूध छुड़ाया गया, और जिस दिन इसहाक का दूध छुड़ाया गया उसी दिन इब्राहीम ने एक बड़ा भोज दिया।

9तब सारा ने मिस्री हाजिरा के पुत्र को जो इब्राहीम से उसको उत्पन्न हुआ था, उपहास करते देखा।

10अतः वह इब्राहीम से बोली, “इस दासी को इसके पुत्र सहित निकाल दे; क्योंकि इस दासी का पुत्र मेरे पुत्र इसहाक के साथ उत्तराधिकारी न होगा।”

11अपने पुत्र के कारण इब्राहीम की इस बात से गहरा आघात पहुंचा।

12परन्तु परमेश्वर ने इब्राहीम से कहा, “अपनी दासी और लड़के के कारण व्यथित न हो। जो कुछ सारा तुझसे कहे, उसकी सुन, क्योंकि इसहाक ही के वंश से तेरा नाम चलेगा,

13और दासी के पुत्र से भी मैं एक जाति उत्पन्न करूंगा, क्योंकि वह तेरा वंशज है।”

14अतः इब्राहीम ने बड़े सवेरे उठकर पानी से भरी चमड़े की थैली और रोटी ली और उन्हें हाजिरा को देकर उसके कंधे पर रखी और उसका लड़का उसे देकर विदा किया। वह विदा होकर चली गई और बेर्शेबा के जंगल में भटकती फिरी।

15जब थैली का पानी समाप्त हो गया तो उसने लड़के को एक झाड़ी के नीचे डाल दिया।

16तब वह तीर गिरने के टप्पे की दूरी पर जाकर उसके सामने बैठ गई, क्योंकि उसने कहा, “कहीं मुझे लड़के की मृत्यु न देखनी पड़े।” और वह उसके सामने बैठी हुई चिल्ला-चिल्ला कर रोने लगी।

17परमेश्वर ने लड़के का रोना सुना; और परमेश्वर के स्वर्गदूत ने स्वर्ग से हाजिरा को पुकारकर कहा, “हाजिरा, तुझे क्या हुआ है? मत डर, क्योंकि जहां लड़का है, वहीं से परमेश्वर ने उसकी आवाज सुनी है।

18अब उठ, लड़के को उठा और उसे अपने हाथ से सम्भाल; क्योंकि मैं उससे एक बड़ी जाति बनाऊंगा।”

19तब परमेश्वर ने उसकी आंखें खोलीं, और उसने पानी का एक कुँआ देखा; और उसने जाकर थैली को पानी से भर लिया और लड़के को पिलाया।

20परमेश्वर तो उस लड़के के साथ था, और वह बड़ा हुआ तथा जंगल में रहते हुए एक धनुर्धारी बना।

21वह पारान नामक जंगल में रहता था; और उसकी मां ने मिस्र देश से उसके लिए एक पत्नी मंगवा ली।

22उन दिनों में ऐसा हुआ कि अबीमेलेक और उसके सेनापति पीकोल ने इब्राहीम से कहा, “जो कुछ तू करता है उसमें परमेश्वर तेरे साथ है;

23इसलिए अब तू मुझसे यहां परमेश्वर की शपथ खा कि न तो तू मुझसे, न मेरी सन्तान से, और न मेरी भावी पीढ़ियों से छलपूर्ण व्यवहार करेगा, परन्तु जैसी करुणा मैंने तेरे ऊपर की है, वैसी ही तू मुझ पर और इस देश पर भी जिसमें तूने प्रवास किया है, करता रहेगा।”

24इब्राहीम ने कहा, “मैं यह शपथ खाता हू।”

25परन्तु इब्राहीम ने पानी के एक कुएं के कारण जिस पर अबीमेलेक के दासों ने अधिकार कर लिया था, अबीमेलेक को झिड़का।

26तब अबीमेलेक ने कहा, “मुझे नहीं मालूम किसने यह काम किया; न तो तूने ही मुझे बताया, और न मैंने आज से पहले इसके विषय में कुछ सुना।”

27तब इब्राहीम ने भेड़-बकरी और गाय-बैल लेकर अबीमेलेक को दिए, और उन दोनों ने आपस में वाचा बान्धी।

28तब इब्राहीम ने झुण्ड में से सात मादा मेमनों को अपने लिए अलग कर रखा।

29अबीमेलेक ने इब्राहीम से कहा, “इन सात मादा मेमनों को अलग कर रखने का क्या अर्थ है?”

30और उसने कहा, “इन सात मादा मेमनों को तू मेरे हाथ से ले कि ये इस बात की साक्षी ठहरें कि यह कुआं मैंने खोदा है।”

31इसलिए उसने उस स्थान का नाम बेर्शेबा रखा, क्योंकि वहां उन दोनों ने शपथ खाई थी।

32इस प्रकार उन्होंने बेर्शेबा में वाचा बांधी; और अबीमेलेक और उसका सेनापति पीकोल दोनों उठकर पलिश्तियों के देश को लौट गए।

33तब इब्राहीम ने बेर्शेबा में झाऊ का एक वृक्ष लगाया, और वहां उसने यहोवा से, जो अनन्तकाल का परमेश्वर है प्रार्थना की।

34और इब्राहीम पलिश्तियों के देश में बहुत दिनों तक प्रवासी होकर रहा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)