पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 22 / 50
उत्पत्ति 22
1इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि परमेश्वर ने इब्राहीम की परीक्षा ली और उससे कहा, “इब्राहीम।” उसने कहा, “देख, मैं यहां हू।”
2और उसने कहा, “अपने पुत्र, हां, अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिससे तू प्रेम करता है, साथ लेकर मोरिय्याह देश को जा; वहां एक पहाड़ पर, जिसे मैं तुझे बताऊंगा, उसे होमबलि करके चढ़ाना।”
3अतः इब्राहीम बड़े सवेरे उठा और अपने गदहे पर काठी कसकर उसने दो सेवकों और अपने पुत्र इसहाक को साथ लिया, और होमबलि के लिए लकड़ी चीरी और उठकर उस स्थान के लिए प्रस्थान किया जिसके विषय में परमेश्वर ने उससे कहा था।
4तीसरे दिन इब्राहीम ने अपनी दृष्टि उठाई तो उस स्थान को दूर से देखा।
5इब्राहीम ने अपने सेवकों से कहा, “तुम गदहे के पास यहीं ठहरो, और मैं और यह लड़का वहां जाकर आराधना करेंगे और फिर तुम्हारे पास लौट आएंगे।”
6और इब्राहीम ने होमबलि की लकड़ी अपने पुत्र इसहाक के ऊपर लादी, और आग और छुरी अपने हाथ में ले ली। और वे दोनों साथ -साथ आगे चल दिए।
7इसहाक ने अपने पिता इब्राहीम से कहा, “पिताजी” उसने कहा, “हां, बेटा?” वह बोला, “देख, आग और लकड़ी तो है पर होमबलि के लिए मेमना कहां है?”
8इब्राहीम ने कहा, “बेटा, होमबलि के लिए मेमने का प्रबन्ध परमेश्वर स्वयं ही करेगा।” अतः वे दोनों साथ-साथ आगे बढ़े।
9जब वे उस स्थान पर पहुंचे जिसके विषय में परमेश्वर ने उसे बताया था तो इब्राहीम ने वहां एक वेदी बनाई और उस पर लकड़ियां रख दीं तथा अपने पुत्र इसहाक को बांधकर वेदी पर लकड़ियों के ऊपर रख दिया।
10तब इब्राहीम ने अपने बेटे को बलि चढ़ाने के लिए अपना हाथ बढ़ाकर छुरी उठा ली।
11तब यहोवा के दूत ने स्वर्ग से उसे पुकारकर कहा, “इब्राहीम, हे इब्राहीम!” उसने उत्तर दिया, “देख, मैं यहां हू।”
12उसने कहा, “उस लड़के की ओर हाथ न बढ़ा, और न ही उसे कोई हानि पहुंचा। मैं अब जान गया हूं कि तू परमेश्वर से डरता है, क्योंकि तूने मेरे लिए अपने पुत्र अर्थात् एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा।
13तब इब्राहीम ने आंखें उठाकर पीछे देखा कि एक मेढ़ा अपने सींगों से झाड़ी में फंसा हुआ है; इब्राहीम ने जाकर मेढ़े को पकड़ा और अपने पुत्र के स्थान पर उसको होमबलि चढ़ाया।
14और इब्राहीम ने उस स्थान का नाम यहोवा यिरे रखा। इसलिए आज तक यह कहा जाता है कि यहोवा के पर्वत पर उपाय किया जाएगा।
15इसके बाद यहोवा के दूत ने स्वर्ग से इब्राहीम को दुबारा पुकार कर कहा,
16“यहोवा यह कहता हैः क्योंकि तूने यह काम किया है कि अपने पुत्र वरन् अपने एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा, इस कारण मैं अपनी शपथ खाकर कहता हूं कि
17मैं तुझे निश्चय ही बड़ी आशीष दूंगा। मैं तेरे वंशजों को आकाश के तारागण और समुद्रतट के रेत-कणों के समान असंख्य कर दूंगा, और तेरे वंशज अपने शत्रुओं के नगरों पर अधिकार कर लेंगे।
18और तेरे वंशजों के कारण पृथ्वी की सारी जातियां आशीष पाएंगीः क्योंकि तूने मेरी आज्ञा का पालन किया है।”
19तब इब्राहीम अपने सेवकों, के पास लौट आया, और वे सब एक साथ बेर्शेबा को गए, और इब्राहीम बेर्शेबा में रहने लगा।
20इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि इब्राहीम को यह संदेश मिला, “देख, मिल्का को तेरे भाई नाहोर से भी सन्तान उत्पन्न हुई हैं;
21मिल्का के पुत्र ये थेः उसका जेठा पुत्र ऊस और उसका भाई बूज़ और अराम का पिता कमूएल,
22और केसेद, हजो, पिल्दाश, यिद्लाप और बतूएल।”
23बतूएल से रिबका उत्पन्न हुई। इब्राहीम के भाई नाहोर के ये आठ पुत्र मिल्का से उत्पन्न हुए।
24और नाहोर के रूमा नामकी एक रखैल भी थी, जिससे तेबह, गहम, तहश और माका उत्पन्न हुए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)