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पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 25 / 50

उत्पत्ति 25

1तब इब्राहीम ने एक दूसरी स्त्री से विवाह किया जिसका नाम कतूरा था।

2और उससे जिम्रान, योक्षान, मदान, मिघान, यिशबाक और शूह उत्पन्न हुए।

3तथा योक्षान के शबा और ददान भी उत्पन्न हुए। और ददान के वंशज थे अश्शूरी, लतूशी और लुम्मी लोग।

4और मिघान के पुत्र एपा, एपेर, हनोक, अबीदा और एल्दा हुए। ये सब कतूरा के वंशज है।

5इब्राहीम ने अपनी सारी सम्पत्ति इसहाक को दे दी,

6पर अपनी रखेलियों के पुत्रों को अपने जीते जी इब्राहीम ने दान आदि देकर इसहाक के पास से पूर्वी देश में भेज दिया।

7इब्राहीम की सम्पूर्ण आयु एक सौ पचहत्तर वर्ष की हुई।

8तब इब्राहीम दीर्घायु होकर अपनी पूर्ण वृद्धावस्था में मर गया। वह सन्तुष्ट जीवन बिताकर अपने लोगों में जा मिला।

9तब उसके पुत्र इसहाक और इश्माएल ने हित्ती सोहर के पुत्र एप्रोन की मम्रे के सामने वाली भूमि में अर्थात् मकपेला की गुफ़ा में उसे मिट्टी दी।

10यह वही भूमि थी जो इब्राहीम ने हित्तियों से मोल ली थी। वहीं इब्राहीम को अपनी पत्नी सारा के साथ मिट्टी दी गई।

11और ऐसा हुआ कि इब्राहीम की मृत्यु के पश्चात् परमेश्वर ने उसके पुत्र इसहाक को आशीष दी, और इसहाक बेर-लहै-रोई नामक कुएं के पास रहता था।

12इब्राहीम के पुत्र इश्माइल की, जो सारा की दासी हाजिरा मिस्री से इब्राहीम द्वारा उत्पन्न हुआ था, वंशावली यह है।

13इश्माएल के पुत्रों के नाम उनके जन्म के अनुसार यह हैं: नबायोत अर्थात् इश्माएल का जेठा पुत्र, फिर केदार, अदबेल, मिबसाम

14मिश्मा, दूमा, मस्सा,

15हदद, तेमा, यतूर, नापीश, और केदमा।

16इश्माएल के पुत्र ये ही हुए और इन्हीं के नामों के अनुसार इनके गांवों और छावनियों के नाम भी पड़े और ये ही बारह अपने-अपने कुल के प्रधान हुए।

17और इश्माएल की आयु एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई तब उसके प्राण छूट गए और वह अपने लोगों में जा मिला।

18और वे हवीला से शूर तक जो मिस्र के पूर्व में और अश्शूर के मार्ग में है बस गए। उसके सब भाई-बन्धुओं के साथ उसकी शत्रुता बनी रही।

19इब्राहीम के पुत्र इसहाक की वंशावली यह हैः इब्राहीम से इसहाक उत्पन्न हुआ।

20इसहाक ने चालीस वर्ष की आयु में रिबका को ब्याह लिया जो पद्दन-अराम के अरामी बतूएल की बेटी और अरामी लाबान की बहन थी।

21इसहाक की पत्नी बांझ थी इसलिए उसने उसके लिए यहोवा से प्रार्थना की। यहोवा ने उसको उत्तर दिया और उसकी पत्नी रिबका गर्भवती हुई।

22परन्तु बच्चे उसके गर्भ ही में झगड़ने लगे। तब उसने कहा, “यदि ऐसा है तो मैं जीवित कैसे रह सकती हूं?” अतः वह यहोवा से पूछने गई।

23और यहोवा ने उससे कहा, “तेरे गर्भ में दो जातियां हैं, और तेरी कोख से निकलते ही अलग अलग दो राज्य हो जाएंगे। एक राज्य दूसरे से अधिक शक्तिशाली होगा, और बड़ा तो, छोटे के अधीन होगा।”

24जब उसके प्रसव के दिन पूरे हुए तो मालूम हुआ कि उसके गर्भ में जुड़वां बच्चे है।

25पहला जो उत्पन्न हुआ वह लाल था और उसका सारा शरीर रोएंदार वस्त्र के समान था अतः उन्होंने उसका नाम एसाव रखा।

26इसके बाद उसका भाई अपने हाथ से एसाव की एड़ी पकड़े हुए उत्पन्न हुआ, इसलिए उसका नाम याकूब रखा गया। और जब रिबका ने उनको जन्म दिया तब इसहाक साठ वर्ष का था।

27जब वे लड़के बड़े हुए तो एसाव जंगल का निपुण शिकारी बन गया, परन्तु याकूब तो तम्बुओं में रहने वाला शान्तिप्रिय व्यक्ति था।

28इसहाक तो शिकार के मांस का शौकीन था इसलिए वह एसाव से प्रीति रखता था, परन्तु रिबका याकूब से प्रीति रखती थी।

29एक बार याकूब ने कुछ दाल पका रखी थी और एसाव जंगल से थका-मांदा घर आया।

30तब एसाव ने याकूब से कहा, “यह जो लाल वस्तु है इसमें से मुझे कुछ खिला दे, क्योंकि मैं थका-मांदा हू।” इसी कारण उसका नाम एदोम भी पड़ा।

31परन्तु याकूब ने कहा, “पहले मुझे अपने पहलौठेपन का अधिकार बेच दे।”

32एसाव ने कहा, “देख, मैं तो मरने पर हूं: मेरे पहलौठेपन के अधिकार से मुझे क्या लाभ?”

33पर याकूब ने कहा, “पहले मुझ से शपथ खा।” इसलिए उसने शपथ खाई और अपने पहलौठेपन का अधिकार याकूब को बेच दिया।

34तब याकूब ने एसाव को रोटी और मसूर की पकी हुई दाल दी, और उसने खाया-पीया और उठकर चला गया इस प्रकार एसाव ने अपने पहलौठेपन के अधिकार को तुच्छ जाना।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)