पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 26 / 50
उत्पत्ति 26
1उस देश में अकाल पड़ा। यह उस पहले अकाल से भिन्न था जो इब्राहीम के समय में पड़ा था। इसलिए इसहाक, पलिश्तियों के राजा अबीमेलेक के पास, गरार नगर गया।
2वहां यहोवा ने उसे दर्शन दिया और कहा, “मिस्र देश को न जाना। जो देश मैं तुझे बताऊंगा उसी में ठहरा रह।
3तू इसी देश में रह और मैं तेरे साथ रहूंगा और तुझे आशीष दूंगा, क्योंकि मैं तुझे और तेरे वंश को ये सब दूंगा, तथा जो शपथ मैंने तेरे पिता इब्राहीम से खाई थी उसे पूरी करूंगा।
4मैं तेरे वंश को आकाश के तारागणों के समान बढ़ाऊंगा, और तेरे वंश को ये सारे देश दूंगा, तथा पृथ्वी की सब जातियां तेरे वंश के कारण अपने को धन्य मानेंगी,
5क्योंकि इब्राहीम ने मेरी बात मानी और जो दायित्व मैंने उसे सौंपा था उसे पूरा किया तथा मेरी विधियों, आज्ञाओं और व्यवस्था का पालन किया।”
6अतः इसहाक गरार में रहने लगा।
7जब उस स्थान के लोगों ने उसकी पत्नी के विषय में पूछा, तो उसने कहा, “यह मेरी बहन है।” उसने यह सोचकर ऐसा कहा, क्योंकि उसे भय था कि यदि मैं उसे अपनी पत्नी कहूंगा तो ये लोग रिबका के कारण मुझे मार डालेंगे क्योंकि वह सुन्दर है।
8जब उसको वहां रहते हुए बहुत दिन बीत गए तो ऐसा हुआ कि पलिश्तियों के राजा अबीमेलेक ने खिड़की से झांका तो देखा कि इसहाक अपनी पत्नी रिबका के साथ प्रेमालाप कर रहा है।
9तब अबीमेलेक ने इसहाक को बुलाकर कहा, “देख, वह तो निश्चय ही तेरी पत्नी है! फिर तूने ऐसा क्यों कहा, ‘वह मेरी बहन है’?” इसहाक ने उसे उत्तर दिया, “मैंने तो ऐसा सोचा कि कहीं मैं उसके कारण मार डाला न जाऊ।”
10अबीमेलेक ने कहा, “तूने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? सम्भव था कि प्रजा में से किसी ने तेरी पत्नी के साथ सहवास कर लिया होता, और तू हम को पाप में फंसाता।”
11इसलिए अबीमेलेक ने यह कहकर सब लोगों को चेतावनी दी, “यदि कोई इस मनुष्य या इसकी पत्नी को छूएगा तो वह निश्चय ही मार डाला जाएगा।
12इस प्रकार इसहाक ने उस देश की भूमि में बोआई की और उसी वर्ष उसने सौ गुणा फसल काटी। और यहोवा ने उसको आशीष दी,
13और वह धनी हो गया और निरन्तर धनी होता गया यहां तक कि वह अति सम्पन्न हो गया;
14क्योंकि उसके पास भेड़-बकरी, गाय-बैल और बहुत से दास-दासियां हो गए थे, इसलिए पलिश्ती उससे ईर्ष्या करने लगे।
15तब पलिश्तियों ने वे सब कुएं जो उसके पिता इब्राहीम के दासों ने इब्राहीम के समय में खोदे थे, मिट्टी से भर दिए।
16तब अबीमेलेक ने इसहाक से कहा, “हमारे पास से चला जा, क्योंकि तू हमसे अधिक सामर्थी हो गया है।
17इसलिए इसहाक वहां से चला गया और गरार की घाटी में डेरा डालकर वहीं रहने लगा।
18तब इसहाक ने पानी के उन कुओं को फिर से खुदवाया जो उसके पिता इब्राहीम के दिनों में खोदे गए थे और जिन्हें पलिश्तियों ने इब्राहीम की मृत्यु के बाद भरवा दिया था, और उसने उनके फिर वही नाम रखे जो उसके पिता ने रखे थे।
19परन्तु जब इसहाक के दासों ने घाटी में खुदाई की तो उन्हें बहते जल का एक सोता मिला।
20तब गरार के चरवाहे इसहाक के चरवाहों से यह कहकर झगड़ने लगे, “यह पानी हमारा है!” इसलिए उसने उस कुएं का नाम एसेक रखा, क्योंकि उन्होंने उससे झगड़ा किया।
21तब उन्होंने दूसरा कुआं खोदा और उसके लिए भी उन्होंने झगड़ा किया, इसलिए उसने उसका नाम सित्ना रखा।
22वह वहां से दूर चला आया और उसने एक और कुआं खोदा। उन्होंने उस पर झगड़ा नहीं किया; इसीलिए उसने उसका नाम रहोबोत रखा, क्योंकि उसने कहा, “अन्ततः यहोवा ने हमें बहुत स्थान प्रदान किया, और हम इस देश में फूले-फलेंगे”।
23तब वह वहां से बेर्शेबा की ओर गया।
24उसी रात यहोवा ने उसे दर्शन देकर कहा, “मैं तेरे पिता इब्राहीम का परमेश्वर हू। मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हू। मैं अपने दास इब्राहीम के कारण तुझे आशीष दूंगा, और तेरे वंश को बहुत बढ़ाऊंगा।”
25तब उसने वहां एक वेदी बनाई, और यहोवा से प्रार्थना की, तथा अपना तम्बू वहीं खड़ा किया, और इसहाक के दासों ने वहां एक कुआं खोदा।
26तब अबीमेलेक अपने सलाहकार अहुज्जत और अपने सेनापति पीकोल के साथ गरार से उसके पास आया।
27इसहाक ने उनसे कहा, “तुम तो मुझसे बैर करते हो, और तुमने अपने बीच से मुझे निकाल दिया था। अब मेरे पास क्यों आए हो?”
28उन्होंने कहा, “हमने स्पष्ट देखा है कि यहोवा तेरे साथ है, इसलिए हमने सोचा, क्यों न हमारे मध्य, हां तेरे और हमारे बीच यह शपथ ली जाए, तथा हम तेरे साथ यह वाचा बांधें,
29कि जिस प्रकार हमने तुझे नहीं छुआ वरन् भलाई को छोड़ और कुछ न किया तथा तुझे शान्ति से विदा किया, जिससे अब यहोवा का अनुग्रह तुझ पर है, उसी प्रकार तू भी हमें कोई हानि न पहुंचाए?”
30तब उसने उन्हें भोज दिया और उन्होंने खाया-पिया।
31प्रातःकाल तड़के उठकर उन्होंने आपस में शपथ ली, तब इसहाक ने उन्हें विदा किया और वे शान्तिपूर्वक चले गए।
32उसी दिन ऐसा हुआ कि इसहाक के दासों ने उसके पास आकर उस कुएं के विषय में बताया जो उन्होंने खोदा था, और उससे कहा, “हमें पानी मिला है।”
33इसलिए उसने उसका नाम शिबा रखा। इसी कारण आज तक उस नगर का नाम बेर्शेबा है।
34जब एसाव चालीस वर्ष का हुआ तो उसने हित्ती बेरी की बेटी यहूदीत, और हित्ती एलोन की बेटी बासमत को ब्याह लिया,
35और इन बहुओं के कारण इसहाक और रिबका को दुख हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)