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पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 38 / 50

उत्पत्ति 38

1उन दिनों में ऐसा हुआ कि यहूदा अपने भाइयों से विदा होकर एक अदुल्लामवासी के यहां गया जिसका नाम हीरा था।

2वहां यहूदा ने शूआ नाम एक कनानी की पुत्री को देखा। उसने उससे विवाह किया और उसके पास गया।

3वह गर्भवती हुई और उसने एक पुत्र को जन्म दिया और यहूदा ने उसका नाम एर रखा।

4वह फिर गर्भवती हुई। उसने एक और पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम ओनान रखा।

5फिर उसने एक और पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम शेलाह रखा गया; और यह उस समय हुआ जब वे कजीब में थे।

6यहूदा अपने पहलौठे पुत्र एर के लिए पत्नी लाया, जिसका नाम तामार था।

7परन्तु यहूदा का पहलौठा एर यहोवा की दृष्टि में दुष्ट था, इसलिए यहोवा ने उसका प्राण ले लिया।

8तब यहूदा ने ओनान से कहा, “अपने भाई की पत्नी के पास जा, और उसके प्रति अपने देवर होने का कर्त्तव्य निभा और अपने भाई के लिए सन्तान उत्पन्न कर।”

9ओनान तो जानता था कि यह वंश मेरा अपना नहीं होगा, इसलिए ऐसा हुआ जब वह अपने भाई की पत्नी के पास गया तब उसने अपना वीर्य भूमि पर गिरा दिया, जिससे कि उसके भाई का वंश न चले।

10परन्तु जो उसने किया वह यहोवा की दृष्टि में बुरा था, इसलिए यहोवा ने उसका भी प्राण ले लिया।

11तब यहूदा ने अपनी बहू तामार से कहा, “जब तक कि मेरा पुत्र शेलाह जवान न हो जाए तब तक तू अपने पिता के घर में विधवा ही बैठी रह,” क्योंकि उसने सोचा, “मुझे डर है कि कहीं यह भी अपने भाइयों के समान मर न जाए।” अतः तामार अपने पिता के घर जाकर रहने लगी।

12बहुत समय बीत जाने पर शूआ की पुत्री अर्थात् यहूदा की पत्नी की मृत्यु हो गई, और जब शोक करने का समय बीत गया तो यहूदा अपनी भेड़ों का ऊन कतरने वालों के पास अपने मित्र हीरा अदुल्लाम-वासी सहित तिम्ना को गया।

13और तामार को यह बताया गया, “देख, तेरा ससुर अपनी भेड़ों का ऊन कतरवाने के लिए तिम्ना को जा रहा है।”

14तब उसने यह सोचा कि शेलाह तो जवान हो गया और मैं उसकी पत्नी होने के लिए नहीं दी गई हूं, इसलिए उसने अपना विधवापन का पहरावा उतारा और घूंघट डालकर अपने को ढांप लिया और एनैम के फाटक के पास जो तिम्ना के मार्ग पर है, जा बैठी।

15जब यहूदा ने उसे देखा तो वेश्या समझा क्योंकि वह अपना मुंह ढांपे हुई थी।

16अतः उसने मार्ग से उसकी ओर फिर कर कहा, “मुझे अपने पास आने दे,” क्योंकि वह तो नहीं जानता था कि यह मेरी बहू है। तामार ने कहा, “यदि मैं तुझे अपने पास आने दूं तो तू मुझे क्या देगा?”

17उसने उत्तर दिया, “मैं अपनी भेड़-बकरियों में से तुझे एक बच्चा भेज दूंगा।” उसने यह भी कहा, “उसको भेजने तक क्या तू मेरे पास धरोहर में कुछ रखेगा?”

18और उसने कहा, “मैं धरोहर में तुझे क्या दूं?” उसने कहा, “अपनी मुहर, अपना बाजू-बन्द और हाथ की लाठी।” अतः उसने उसे ये सब दे दिए और उसके पास गया, और वह उससे गर्भवती हुई।

19तब वह उठकर चली गई, और अपना घूंघट उतारकर उसने विधवापन का पहरावा फिर पहन लिया।

20जब यहूदा ने अपने मित्र अदुल्लाम-वासी के हाथ से बकरी का बच्चा भेजा कि उस स्त्री के हाथ से धरोहर रखी हुई वस्तुएं छुड़ा लाए, तो वह स्त्री उसे न मिली।

21अतः उसने उस स्थान के लोगों से पूछा, “वह देवदासी कहां है जो एनैम के मार्ग के किनारे बैठी थी?” परन्तु उन्होंने कहा, “यहां तो कोई देवदासी नहीं थी।”

22तब उसने यहूदा के पास लौटकर कहा, “मुझे तो वह नहीं मिली, वरन् वहां के लोगों ने कहा कि यहां तो कोई देवदासी थी ही नही।”

23यहूदा ने कहा, “उन वस्तुओं को उसके पास ही रखे रहने दे, अन्यथा हम हंसी के पात्र ठहरेंगे। देख, मैंने तो बकरी का बच्चा भेजा था, परन्तु वह स्त्री तुझे नहीं मिली।”

24लगभग तीन महीने के पश्चात् यहूदा को यह समाचार मिला, “तेरी बहू तामार वेश्या बन बैठी है, और देख, इस वेश्यावृत्ति से वह गर्भवती भी हो गई है।” तब यहूदा ने कहा, “उसे बाहर ले आओ कि वह जलाई जाए।”

25जब उसे बाहर निकाला जा रहा था तो उसने अपने ससुर को यह कहला भेजा, “जिस पुरुष की ये वस्तुएं हैं उसी से मैं गर्भवती हुई हू।” फिर उसने कहा, “पहचान कर देख कि यह मुहर, बाजूबन्द और लाठी किसकी है!”

26यहूदा ने उन्हें पहचानकर कहा, “वह तो मुझ से अधिक धर्मी है, क्योंकि मैंने उसका विवाह अपने पुत्र शेलाह से नहीं किया।” और उसने तामार के साथ फिर कभी प्रसंग नहीं किया।

27प्रसवकाल में मालूम पड़ा कि उसके गर्भ में जुड़वां बच्चे है।

28और प्रसव के समय एक का हाथ बाहर आया, और धाय ने तुरन्त एक लाल धागा लिया और उसके हाथ में बांधकर कहा, “यही पहले उत्पन्न हुआ।”

29और ऐसा हुआ कि जब उसने अपना हाथ खींच लिया तभी उसका भाई उत्पन्न हो गया। तब धाय ने कहा “तू तो अकारण ही बाहर निकल आया!” इस कारण उसका नाम पेरेस रखा गया।

30तत्पश्चात् उसका भाई भी उत्पन्न हो गया जिसके हाथ में लाल धागा बन्धा था, और उसका नाम जेरह रखा गया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)