पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 39 / 50
उत्पत्ति 39
1अब यूसुफ मिस्र पहुंचाया जा चुका था; और पोतीपर नामक फि़रौन के एक मिस्री अधिकारी और अंगरक्षकों के प्रधान ने उसे उन इश्माएलियों के हाथ से मोल ले लिया जो उसे वहां ले गए थे।
2और यहोवा यूसुफ के संग था। इसलिए वह एक सफल पुरुष हो गया। वह अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था।
3जब उसके स्वामी ने देखा कि यहोवा उसके साथ है और जो भी काम वह करता है उसको यहोवा उसके हाथ से सफल कर देता है,
4तो उसने यूसुफ पर कृपादृष्टि करके उसे अपना निजी सेवक बनाया। उसने उसे अपने घर का सर्वेसर्वा ठहराकर अपना सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया।
5फिर ऐसा हुआ कि जब से उसने उसे अपने घर और अपनी सब सम्पत्ति का सर्वेसर्वा ठहराया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिस्री के घर पर आशीष देने लगा, इस प्रकार उसकी सब वस्तुओं पर जो उसके घर में और मैदान में थीं यहोवा की आशीष होने लगी।
6अतः उसने अपना सर्वस्व यूसुफ के हाथ में सौंप दिया। और जो भोजन वह खाता था उसे छोड़ अपनी किसी अन्य वस्तु के विषय में कुछ नहीं जानता था। यूसुफ तो देखने में सुन्दर और रूपवान था।
7इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि उसके स्वामी की पत्नी ने कामुकता की दृष्टि यूसुफ पर लगाई, और उससे कहा, “मेरे साथ लेट।”
8परन्तु उसने इनकार करते हुए अपने स्वामी की पत्नी से कहा, “देख, मेरा स्वामी इन सब बातों के विषय में कुछ नही जानता इस घर में क्या-क्या है, और जो कुछ उसका है वह सब उसने मेरे हाथ में सौंप दिया है।
9इस घर में मुझसे बड़ा और कोई नही। उसने तुझे छोड़ जो उसकी पत्नी है, कोई अन्य वस्तु मुझसे नहीं रख छोड़ी है। तब मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर के विरोध में कैसे पाप कर सकता हू।”
10और ऐसा हुआ कि वह दिन-प्रतिदिन यूसुफ को मनाती रही, पर उसने उसके साथ लेटना या उसके संग रहना स्वीकार नहीं किया।
11तब एक दिन ऐसा हुआ कि यूसुफ अपना काम-काज करने के लिए घर के अन्दर गया, और घर का अन्य कोई व्यक्ति अन्दर नहीं था।
12तब उस स्त्री ने उसका वस्त्र पकड़कर कहा, “मेरे साथ लेट।” परन्तु वह अपना वस्त्र उसके हाथ ही में छोड़कर भागा और बाहर निकल गया।
13जब उसने देखा कि वह अपना वस्त्र मेरे हाथ में छोड़कर बाहर भाग गया है,
14तो उसने अपने घर के सेवकों को बुलवाया और उनसे कहा, “देखो, वह हमारी हंसी उड़ाने के लिए एक इब्री को हमारे पास ले आया है। वह तो मेरे साथ लेटने के लिए अन्दर आया था, तब मैं चिल्ला उठी।
15जब उसने मुझे ऊंचे स्वर में चिल्लाते हुए सुना तो वह अपना वस्त्र मेरे पास छोड़कर भागा, और बाहर निकल गया।”
16अतः वह उसका वस्त्र अपने स्वामी के आने तक अपने पास रखे रही।
17तब उसने उससे इन शब्दों में बातें कीं, “वह इब्री दास जिसे तू हमारे पास ले आया था वह मुझसे क्रीड़ा करने के लिए मेरे पास आया था,
18और जैसे ही मैं ऊंचे स्वर से चिल्ला उठी, वह मेरे पास अपना वस्त्र छोड़कर बाहर भाग गया।”
19जब उसके स्वामी ने अपनी पत्नी की ये बातें सुनीं, ‘तेरे दास ने मेरे साथ ऐसा-ऐसा किया,’ तब उसका क्रोध भड़क उठा।
20और यूसुफ के स्वामी ने उसको पकड़कर उसी बन्दीगृह में जहां राजा के कैदी थे बन्द करवा दिया। अतः वह उस बन्दीगृह में रहा।
21परन्तु यहोवा यूसुफ के संग था, उसने उस पर अपनी करुणा की और उसे बन्दीगृह के मुख्य दारोगा की दृष्टि में कृपा-पात्र बनाया।
22और मुख्य दारोगा ने उस बन्दीगृह के सब कैदियों को यूसुफ के हाथ में सौंप दिया। इस प्रकार जो कुछ वहां होता था वह सब उसी की आज्ञा से होता था।
23मुख्य दारोगा तो यूसुफ के अधीन किए गए किसी भी काम को नहीं देखता था, क्योंकि यहोवा यूसुफ के संग था। और जो कुछ भी वह करता था, यहोवा उसमें उसे सफलता देता था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)