पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 40 / 50
उत्पत्ति 40
1इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि मिस्र के राजा के साकी और रसोइये ने अपने स्वामी मिस्र के राजा का कुछ अपराध किया।
2अतः फि़रौन अपने उन दोनों अधिकारियों, अर्थात् प्रधान साकी और प्रधान रसोइये पर अति क्रोधित हुआ।
3उसने उन्हें बन्दी बनाकर अंगरक्षकों के प्रधान के घर के उसी बन्दीगृह में जहां यूसुफ बन्दी था, डाल दिया।
4तब अंगरक्षकों के प्रधान ने यूसुफ को उनके ऊपर अधिकारी ठहराया, और उसने उनकी देखभाल की। वे कुछ दिनों तक बन्दीगृह में रहे।
5तब मिस्र के राजा का साकी और रसोइया जो बन्दीगृह में बन्दी था उन दोनों ने एक ही रात में अपने भविष्य में होने वाली घटना के अनुसार एक-एक स्वप्न देखा।
6प्रातःकाल जब यूसुफ उनके पास आया तो उन्हें ध्यान से देखा कि वे उदास है।
7तब उसने फि़रौन के उन अधिकारियों से जो उसके साथ उसके स्वामी के भवन के बन्दीगृह में थे, पूछा, “आज तुम्हारे चेहरे उदास क्यों हैं?”
8तब उन्होंने उससे कहा, “हम दोनों ने स्वप्न देखा है और उनका अर्थ बताने वाला कोई नहीं है।” तब यूसुफ ने उनसे कहा, “क्या स्वप्नों का फल बताना परमेश्वर का काम नहीं है? मुझे अपने-अपने स्वप्न बताओ।”
9तब प्रधान साकी ने अपना स्वप्न यूसुफ को इस प्रकार बतलाया, “मैंने स्वप्न में देखा कि मेरे सामने एक अंगूर की लता है,
10और उस लता में तीन डालियां हैं: और उसमें मानों कलियां लगी हैं और वे फूलीं और उसके गुच्छों में अंगूर लगकर पक गए है।
11अब फि़रौन का कटोरा मेरे हाथ में था, इसलिए मैंने अंगूरों को लेकर फि़रौन के कटोरे में निचोड़ा और कटोरे को फि़रौन के हाथ में दिया।”
12तब यूसुफ ने उससे कहा, “इसका फल यह है कि तीन डालियों का अर्थ है तीन दिन।
13तीन दिनों के भीतर फि़रौन तेरा सिर ऊंचा करेगा और तेरा पद फिर से तुझे दे देगा; और तू पहले के समान फि़रौन का साकी बनकर उसका कटोरा उसके हाथ में दिया करेगा।
14जब तेरा भला हो जाए तो मुझे स्मरण करना, और मुझ पर कृपा करके फि़रौन से मेरी चर्चा करना और इस बन्दीगृह से मुझे छुड़वा देना।
15क्योंकि सचमुच मुझे इब्रानियों के देश से अपहरण करके लाया गया है, और यहां भी मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसके कारण मैं इस बन्दीगृह में डाला जाऊ।”
16प्रधान रसोइये ने जब देखा कि उसने स्वप्न का फल अनुकूल बताया है तो उसने यूसुफ से कहा, “मैंने भी स्वप्न देखा है कि मेरे सिर पर सप़फ़ेद रोटियों की तीन टोकरियां रखी है।
17ऊपर की टोकरी में फि़रौन के लिए सब प्रकार का पका हुआ भोजन है और पक्षी मेरे सिर पर की टोकरी में से उन वस्तुओं को खा रहे है।”
18तब यूसुफ ने कहा, “इसका फल यह हैः तीन टोकरियां तीन दिन हैं
19तीन दिनों के भीतर फि़रौन तेरा सिर कटवाकर तुझे एक वृक्ष पर टंगवा देगा और पक्षी तेरे मांस को नोच-नोच कर खाएंगे।”
20तीसरे दिन जब फि़रौन का जन्मदिन था उसने सब कर्मचारियों के लिए एक भोज किया और अपने कर्मचारियों में से प्रधान साकी और प्रधान रसोइए दोनों को बन्दीगृह से निकलवाया।
21और प्रधान साकी को फिर से साकी के पद पर नियुक्त किया और वह फि़रौन के हाथ में प्याला देने लगा।
22परन्तु उसने प्रधान रसोइए को टंगवा दिया, जैसा कि यूसुफ ने उनके स्वप्नों का फल उनको बताया था।
23फिर भी प्रधान साकी ने यूसुफ को स्मरण न रखा; परन्तु वह उसे भूल गया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)