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नया नियम · इब्रानियों · अध्याय 5 / 13

इब्रानियों 5

1प्रत्येक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है और मनुष्यों के पक्ष में परमेश्वर से सम्बन्धित कार्यों के लिए नियुक्त किया जाता है कि पापों के लिए भेंट तथा बलिदान दोनों चढ़ाया करे।

2वह नासमझ तथा भूले-भटकों के प्रति कोमलता का व्यवहार कर सकता है, क्योंकि वह स्वयं भी निर्बलताओं से घिरा रहता है।

3इसी कारण उसे न केवल लोगों के लिए पर अपने लिए भी पापों का बलिदान चढ़ाना पड़ता है।

4यह सम्मान कोई अपने आप नहीं लेता वरन् परमेश्वर की ओर से बुलाए जाने पर उसे प्राप्त होता है, जैसे कि हारून भी बुलाया गया।

5इसी प्रकार मसीह ने भी महायाजक बनने का सम्मान स्वयं नहीं लिया, पर उसी ने दिया जिसने उस से कहा, “तू मेरा पुत्र है, आज मैंने तुझे उत्पन्न किया है।”

6इसी प्रकार वह एक अन्य स्थल पर भी कहता है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है।”

7अपनी देह में रहने के दिनों में मसीह ने उस से जो उसको मृत्यु से बचा सकता था उच्च स्वर से पुकारकर और आंसू बहा-बहा कर प्रार्थनाएं और विनतियां कीं और आज्ञाकारिता के कारण उसकी सुनी गई।

8पुत्र होने पर भी उसने दुख सह-सह कर आज्ञा पालन करना सीखा।

9वह सिद्ध ठहराया जाकर उन सब के लिए जो उसकी आज्ञा पालन करते हैं अनन्त उद्धार का स्रोत बन गया,

10और परमेश्वर की ओर से मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक नियुक्त किया गया।

11हमें उसके विजय में बहुत कुछ कहना है, जिसका समझना कठिन है, क्योंकि तुम ऊंचा सुनने लगे हो।

12तुम्हें अब तक तो शिक्षक हो जाना चाहिए था, फिर भी यह आवश्यक हो गया है कि कोई तुम्हें फिर से परमेश्वर के वचन की प्रारम्भिक शिक्षा दे। तुम्हें तो ठोस भोजन की नहीं पर दूध की आवश्यकता है।

13प्रत्येक जो दूध ही पीता है, वह धार्मिकता के वचन का अभ्यस्त नहीं, क्योंकि वह बालक है।

14परन्तु ठोस भोजन तो बड़ों के लिए है, जिनकी ज्ञानेन्द्रियां अभ्यास के कारण भले-बुरे की पहिचान करने में निपुण हो गई है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)