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पुराना नियम · होशे · अध्याय 2 / 14

होशे 2

1अपने भाइयों को “अम्मी” तथा अपनी बहनों को “रफ़हामा” कहो।

2“अपनी माता से तर्क करो, हां, तर्क करो, क्योंकि न वह मेरी पत्नी रही और न मैं उसका पति। वह अपने चेहरे से वेश्यापन और अपने स्तनों के बीच से व्यभिचार दूर करे,

3ऐसा न हो कि मैं उसके वस्र उतार कर उसे जन्म के दिन के समान नंगी कर दूं और उसे उजाड़ वन के समान या मरफ़भूमि के समान कर के प्यास से मार डालूू।

4उसके बच्चों पर भी मैं कुछ तरस न खाऊंगा, क्योंकि वे वेश्यावृति की सन्तान है।

5उनकी माता ने वेश्यावृति की है। जिसने उन्हें गर्भ में धारण किया उसने निर्लज्जता की है, क्योंकि उसने कहा, ‘मैं अपने प्रेमियों के पीछे जाऊंगी जो मुझे रोटी और जल, ऊन और सन, तथा तेल और दाखमधु देते है।’

6इसलिए देखो, मैं उसके मार्ग पर काँटों का बाड़ा बांधूंगा, और उसके विरफ़द्ध दीवार खड़ी करूंगा कि उसे कोई राह न मिले।

7वह अपने प्रेमियों का पीछा तो करेगी पर उन तक पहुंच न सकेगी, वह उन्हें ढूंढ़ेगी पर न पाएगी। तब वह कहेगी, ‘मैं अपने पहले पति के पास लौटूंगी, क्योंकि वह समय मेरे लिए आज की अपेक्षा अच्छा था!’

8“क्योंकि वह नहीं जानती कि मैं ही उसे अन्न, दाखरस और तेल दिया करता था, और उसे प्रचुरता से सोना-चांदी देता था जिसे वे बाल देवता के लिए काम में लाए।

9इस कारण मैं कटनी के समय अपना अन्न और मौसम में दाखरस उससे ले लूंगा। जो ऊन और सन उसके नंगेपन को ढंकने के लिए मैंने दिया था उसे भी ले लूंगा।

10और मैं उसके प्रेमियों के सामने उसकी कामुकता प्रकट करूंगा, और कोई उसे मेरे हाथ से छुड़ा न सकेगा।

11मैं उसकी रंगरेलियों, उसके पर्वों, उसके नए चांद और सब्त के दिनों, और उसके आनन्दमय समारोहों का भी अन्त कर दूंगा।

12मैं उसकी दाखलताओं और अंजीर के वृक्षों को जिनके विषय में वह कहती है, ‘ये मेरी मजदूरी हैं, जो मेरे प्रेमियों ने मुझे दी हैं,’ उजाड़कर जंगल बना दूंगा, और वन के पशु उन्हें चट कर जाएंगे।

13मैं उसे उन दिनों के लिए दण्ड दूंगा जब वह बाल देवता के लिए बलिदान चढ़ाया करती थी और अपने आपको कर्णफूल और जेवरों से सजाकर अपने प्रेमियों के पीछे चली जाया करती थी जिससे वह मुझे भूल गई।” यहोवा की यही वाणी है।

14“इसलिए देखो, मैं उसे लुभा करके जंगल में ले जाऊंगा और उससे प्रेम की बातें करूंगा।

15तब मैं उसे वहीं दाख की बारियां तथा आकोर की घाटी को आशा के द्वार के रूप में दूंगा, और वहां वह ऐसा गाएगी जैसा अपनी जवानी के दिनों में गाती थी अर्थात् मिस्र देश से आने के दिनों मे।

16यहोवा की यह वाणी हैः उस दिन ऐसा होगा कि तू मुझे ‘ईशी’ कहेगी, और फिर कभी ‘बाली’ न कहेगी।

17क्योंकि मैं उसके मुख से बाल देवताओं के नाम हटा दूंगा जिससे नाम ले-लेकर उनका स्मरण फिर कभी न किया जाएगा।

18उस दिन मैं उनके लिए मैदान के पशुओं, आकाश के पक्षियाेंं, और भूमि पर रेंगनेवाले जन्तुओं के साथ वाचा बान्धूंगा, और मैं देश से धनुष, तलवार और युद्ध को समाप्त करके सब को निडर होकर सोने दूंगा।

19मैं तुझे सदा के लिए ब्याह लूंगा, हां, मैं तुझे धार्मिकता, न्याय, करफ़णा, तथा दया के साथ ब्याह लूंगा।

20मैं सच्चाई से तुझे ब्याह लूंगा। तब तू यहोवा को पहचान लेगी।”

21यहोवा यों कहता हैः “उस दिन ऐसा होगा कि मैं उत्तर दूंगा। मैं आकाश को उत्तर दूंगा और वह पृथ्वी को उत्तर देगा।

22पृथ्वी अन्न, दाखरस और तेल को उत्तर देगी और वे यिज्रेल को उत्तर देंगे।

23तथा मैं स्वयं उसे अपने लिए देश में बोऊंगा। जिस पर दया नहीं हुई मैं उस पर दया करूंगा, तथा जो मेरी प्रजा नहीं उससे कहूंगा ‘तू मेरी प्रजा है!’ और वह कहेगी, ‘तू मेरा परमेश्वर है’।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)