पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 10 / 66
यशायाह 10
1हाय उन पर जो अनुचित नियम बनाते हैं, और उन पर भी जो निरन्तर अन्यायपूर्ण निर्णय लिख देते हैं,
2कि कंगालों को न्याय से वंचित करें, और जो मेरी प्रजा में दरिद्र हैं उनका अधिकार छीन लें जिससे कि विधवाएं उनकी लूट बन जाएं और अनाथों का माल हड़प लें!
3अब तुम दण्ड के दिन और दूर से आने वाले सर्वनाश के समय क्या करोगे? तुम सहायता के लिए किसके पास भागोगे? और तुम अपनी धन-सम्पति कहां छोड़ोगे?
4कुछ शेष न रह जाएगा केवल इसके कि तुम बन्दियों के मध्य दुबक जाओ या मृतकों के मध्य गिर पड़ो। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ है, वरन् उसका हाथ अब तक उठा हुआ है।
5अश्शूर पर हाय, जो मेरे क्रोध की लाठी है और जिसके हाथ में मेरे कोप का सोंटा है,
6मैं उसे एक भक्तिहीन जाति के विरुद्ध, भेजता हूं, हां, उन लोगों के विरुद्ध नियुक्त करता हूं जिन पर मेरा कोप भड़का है कि उन्हें लूट ले और उनकी सम्पत्ति छीन ले; और उनको सड़कों के कीचड़ के समान रौंदे।
7फिर भी उसकी ऐसी मनसा नहीं है, न ही उसके मन में ऐसा कोई विचार है, परन्तु उसकी इच्छा तो यह है कि मैं बहुत-सी जातियों का सर्वनाश करूं और उन्हें काट डालू।
8क्योंकि वह कहता है, “क्या मेरे शासक सबके सब राजा नहीं?
9क्या कलनो कर्कमीश के समान नहीं? क्या हमात अर्पद के या सामरिया दमिश्क के समान नहीं है?
10मेरा हाथ तो मूर्तियों से भरे हुए उन राज्यों में पहुुंचा जिनकी गढ़ी हुई प्रतिमाएं यरूशलेम और सामरिया की मूर्तियों से बढ़कर थी।
11क्या जैसा मैंने सामरिया और उसकी मूर्तियों के साथ किया, वैसा ही यरूशलेम और उसकी प्रतिमाओं से भी न करूं?”
12इसलिए जब प्रभु सिय्योन पर्वत तथा यरूशलेम पर अपना सम्पूर्ण कार्य पूरा कर चुकेगा, तब वह कहेगा, “मैं अश्शूर के राजा को उसके अहंकारपूर्ण हृदय के फल तथा उसकी घमंड से चढ़ी हुई आंखों के लिए दंड दूंगा।”
13क्योंकि उसने कहा है, “मैंने अपने ही बाहुबल और अपनी बुद्धि से यह किया है, क्योंकि मैं चतुर हू। मैंने जातियों की सीमाएं तोड़ी हैं और उनका खजाना लूटा है। और शूरवीर के समान उनके निवासियों को गिरा दिया है।
14मेरा हाथ लोगों के धन तक मानो किसी घोंसले तक पहुंचा है। और जिस प्रकार कोई छोड़े हुए अंडे इकट्ठे कर लेता है उसी प्रकार मैंने सारी पृथ्वी को समेट लिया है। और वहां न तो कोई पंख फड़फड़ाने वाला, न चोंच खोलने वाला और नही चीं-चीं करने वाला था।”
15क्या कुल्हाड़ा उसके सामने डींग मारे जो उससे काटता हो? क्या आरी उससे बड़ी बने जो उसे चलाता हो? यह तो वैसा ही हुआ जैसा मुगदर उन्हें चलाए जो उसे चलाते हों अथवा लाठी उसे उठाए जो काठ न हो।
16अतः प्रभु, सेनाओं का यहोवा, उसके योद्धाओं में क्षय-रोग की बीमारी भेजेगा; और उसके ऐश्वर्य के नीचे जलती हुई ज्वाला के सदृश आग भड़केगी।
17और इस्राएल का प्रकाश तो आग और उसका पवित्र-जन ज्वाला बन जाएगा। और वह उसके झाड़-झंखाड़ को एक ही दिन में जलाकर भस्म कर देगी।
18वह उसके वन और फलदायक बाग की महिमा अर्थात् शरीर और प्राण दोनों को नष्ट कर देगा। और जैसे कि क्षय रोगी क्षीण हो जाता है वैसा ही उसके साथ भी होगा।
19उसके वन के वृक्ष संख्या में इतने कम रह जाएंगे कि एक बच्चा भी उन्हें गिनकर लिख लेगा।
20उस दिन ऐसा होगा कि इस्राएल के शेष लोग अर्थात् याकूब के घराने के बचे हुए लोग, फिर कभी उस पर जिसने उन्हें मारा था भरोसा नहीं रखेंगे, परन्तु इस्राएल के पवित्र अर्थात् यहोवा पर सच्चाई से भरोसा रखेंगे।
21शेष लोग, हां, याकूब के बचे हुए लोग, पराक्रमी परमेश्वर की ओर फिरेंगे।
22क्योंकि हे इस्राएल, चाहे तेरे लोग समुद्र की बालू के समान असंख्य हों, फिर भी उनमें से केवल बचा हुआ भाग ही लौटेगा। एक न्यायपूर्ण विनाश निश्चित है
23क्योंकि सेनाओें का यहोवा प्रभु उस निश्चित विनाश को सम्पूर्ण देश पर ले आएगा।
24अतः सेनाओं का यहोवा प्रभु कहता है, “हे सिय्योन में रहने वाली मेरी प्रजा, अश्शूर से भयभीत न हो जो लाठी से तुम पर प्रहार करता है और मिस्र के समान अपना सोंटा तुम पर उठाता है।
25क्योंकि अब थोड़ी ही देर में तुम्हारे प्रति मेरा क्रोध शान्त हो जाएगा और मेरा कोप उनके विनाश के लिए भड़क उठेगा।”
26जिस प्रकार ओरेब की चट्टान पर मिघानियों का वध हुआ, उसी प्रकार सेनाओं का यहोवा उस पर कोड़े बरसाएगा। और उसकी लाठी समुद्र के विरुद्ध उठेगी, जैसे उसने मिस्र में उठाई वैसे ही वह फिर उठाएगा।
27अतः उस दिन तेरे कन्धों पर से उसका बोझ और तेरी गर्दन पर से उसका जूआ उठा लिया जाएगा, और मोटापे के कारण वह जूआ तोड़ दिया जाएगा।
28वह अय्यात् पर चढ़ आया है, वह मिग्रोन में से होकर गया है; मिकमाश में उसने अपना डेरा डाला।
29वे यह कह कर दर्रे से पार हुए, “गेबा हमारे टिकने का स्थान होगा।” रामा थरथरा उठा है और शाऊल का गिबा भाग गया है।
30हे गल्लीम की पुत्री, ऊंची आवाज से चिल्ला! हे लैशा ध्यान दे! हाय अनातोत!
31मदमेना भाग गया है। गेबीम के निवासियों ने आश्रय खोज लिया है।
32फिर भी आज वह नोब में ठहरेगा; वह सिय्योन की पुत्री के पर्वत अर्थात् यरूशलेम की पहाड़ी को घूंसा दिखाएगा।
33देखो, प्रभु, सेनाओं का यहोवा, डालियों को भयंकर प्रहार से छांट डालेगा। वे जो बड़े बड़े हैं काट डाले जाएंगे और जो ऊंचे हैं वे नीचे किए जाएंगे।
34वह घने वन को लोहे के कुल्हाड़े से काट डालेगा, हां, लेबनोन एक सामर्थी के हाथ से गिराया जाएगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)