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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 9 / 66

यशायाह 9

1परन्तु जो वेदना में थी उसके लिए अन्धकार बना न रहेगा। पूर्व काल में उसने जबूलून और नप्ताली के देशों का अपमान किया, परन्तु बाद के दिनों में वह समुद्र के तीर, यरदन के उस पार गैरयहूदियों के गलील को महिमान्वित करेगा।

2अन्धकार में चलने वालों ने महान् ज्योति देखी। अन्धकारपूर्ण देश में रहने वालों पर प्रकाश चमका।

3तू जाति को बढ़ाएगा, तू उनके आनन्द की वृद्धि करेगा; वे तेरी उपस्थिति में ऐसे आनन्दित होंगे जैसे लोग फसल काटने के समय, और जैसे लूट बांटने के समय मग्न होते है।

4क्योंकि तू उनके भारी जुए और उनके कन्धों की लाठी को, हां, अत्याचारी के डंडे को ऐसे तोड़ देगा जैसे तूने मिघान के युद्ध में किया था।

5क्योंकि युद्ध में धप-धप करने वाले प्रत्येक योद्धा के जूते, और खून में सने कपड़े जलाने के लिए आग का ईंधन ही होंगे।

6क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न होगा, हमें एक पुत्र दिया जाएगा; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।

7उसकी प्रभुता की बढ़ती का और उसकी शान्ति का अन्त न होगा। वह दाऊद की राजगद्दी और उसके राज्य को उस समय से लेकर सर्वदा के लिए न्याय और धार्मिकता के द्वारा स्थिर किए और सम्भाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन इसे पूरा करेगी।

8याकूब के विरुद्ध प्रभु संदेश भेजता है, हां यह इस्राएल पर आ पड़ा है।

9और सब लोग अर्थात् एप्रैमी और सामरी यह जानते हैं कि वे गर्व और मन की कठोरता से कहते हैं,

10“ईंटें तो गिर गई हैं, परन्तु हम तराशे हुए पत्थरों से पुनर्निर्माण करेंगे; गूलर के वृक्ष तो कट गए हैं, परन्तु हम उनके स्थान पर देवदार से काम लेंगे।”

11अतः यहोवा विरोधियों को रसीन की ओर से उनके भी विरुद्ध उकसाएगा और उनके शत्रुओं को,

12अर्थात् पूर्व में अरामियों और पश्चिम में पलिश्तियों को उभारेगा, और वे मुंह फाड़कर इस्राएल को निगल जाएंगे। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ है, वरन् उसका हाथ अब तक उठा हुआ है।

13फिर भी लोग ताड़ना देने वाले की ओर नहीं फिरते, न ही वे सेनाओं के यहोवा की खोज करते है।

14अतः यहोवा इस्राएल से सिर और पूंछ को, खजूर की डाली और सरकंडे दोनों को एक ही दिन काट डालेगा।

15प्राचीन और प्रतिष्ठित पुरुष तो सिर है और जो नबी झूठी बातें सिखाता है वह पूंछ है।

16क्योंकि जो इन लोगों की अगुवाई करते हैं वे उन्हें भटका देते हैं; और जिनकी वे अगुवाई करते हैं वे भरमा दिए जाते है।

17इसलिए प्रभु इनके जवानों से आनन्दित नहीं हेागा, न ही वह इनके अनाथों और विधवाओं पर दया करेगा; क्योंकि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति भक्तिहीन और कुकर्मी है। प्रत्येक के मुख से मूर्खता की बातें निकलती है। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ वरन् उसका हाथ अब तक उठा हुआ है।

18क्योंकि दुष्टता आग के समान धधकती है, वह झाड़-झंखाड़ को भस्म करती है, वरन् जंगल की झाड़ियों में आग लगाती है, जिस से घने धुएं के बादल चक्कर खाते हुए ऊपर उठते है।

19सेनाओं के यहोवा के कोप के कारण देश भस्म हो गया है, और लोग आग के ईंधन बन गए हैं; भाई अपने भाई को भी नहीं छोड़ता।

20वे दाहिनी ओर से छीन-झपट करके भी भूखे रहते हैं, बाईंर् ओर से लेकर खाते हैं, फिर भी वे संतुष्ट नहीं होते; उनमें से प्रत्येक अपनी ही बांह का मांस खाता है।

21मनश्शे, एप्रैम को और एप्रैम, मनश्शे को खा जाता है, और वे दोनों यहूदा के विरुद्ध है। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ है वरन् उसका हाथ अब तक उठा हुआ है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)