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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 8 / 66

यशायाह 8

1तब यहोवा ने मुझसे कहा, “तू अपने लिए एक बड़ा पटिया ले और उस पर साधारण अक्षरों में यह लिखः लूट शीघ्र आती है, लूटना अति शीघ्र होता है।

2और मैं ऊरिय्याह याजक और जेबेरेक्याह के पुत्र जकर्याह को साक्षी निमित्त अपने लिए विश्वसनीय साक्षी ठहराऊंगा।”

3अतः मैं नबिया के पास गया और वह गर्भवती हुई और एक पुत्र को जन्म दिया। तब यहोवा ने मुझसे कहा, “उसका नाम महेर-शालाल-हाश-बज रख।

4क्योंकि इसके पूर्व कि वह बालक ‘माँ और पिताजी’ कहना सीखे, दमिश्क की धन-सम्पत्ति और सामरिया की लूट को अश्शूर का राजा अपने साथ ले जाएगा।”

5यहोवा ने फिर दूसरी बार मुझसे कहा,

6“इसलिए कि ये लोग शीलोह के धीरे-धीरे बहने वाले जल को त्याग कर रसीन और रमल्याह के पुत्र के साथ आनन्दपूर्वक मिल गए हैं,

7इसलिए अब देख, प्रभु उन पर फ़रात महानद की प्रबल और प्रलयंकारी बाढ़ को, अर्थात् अश्शूर के राजा को उसके समस्त प्रताप के साथ चढ़ा ले आएगा, और वह सब नदी-नालों से उफनेगा और अपने सब तटों के ऊपर से बहने लगेगा।

8तब यह बाढ़ यहूदा में चढ़ आएगी, और ऊपर से बह जाएगी तथा बढ़कर उसे गले तक डुबा लेगी। हे इम्मानुएल, तेरा समस्त देश उसके पंखों के फैलने से ढँक जाएगा।

9“हे जाति-जाति के लोगो, टूट जाओ, हां चकनाचूर हो जाओ। हे पृथ्वी के दूर-दूर देश के सब लोगो, कान लगाकर सुनो। तुम अपनी कमर कसो तो कसो पर तुम्हें टुकड़े-टुकड़े हो जाना है। अपनी कमर बांधो तो बांधो पर तुम्हें चकनाचूर होना ही है।

10चाहे तुम कितनी भी युक्तियां क्यों न करो वह विफल हो जाएंगी। चाहे तुम कुछ भी कहो परन्तु वह ठहरेगा नहीं, क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है।”

11इस प्रकार यहोवा अत्यन्त सामर्थ्य के साथ मुझसे बोला और इन लोगों की सी चाल चलने के लिए यह कहकर मना लिया,

12“जिस-जिस बात को ये लोग षड्यन्त्र कहते हैं उसे तू षड्यन्त्र न कहना और जिस बात से ये डरते हैं उससे तू न तो डरना और न भय खाना।

13तू सेनाओं के यहोवा को ही पवित्र मानना। वही तेरे भय का कारण हो और तू उसी का भय मानना।

14तब वह तेरा पवित्रस्थान बन जाएगा। परन्तु इस्राएल के दोनों घरानों के लिए वह ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान तथा यरूशलेम के निवासियों के लिए जाल और फंदा होगा।

15और बहुत से लोग उससे ठोकर खाएंगे तथा गिरकर टूट जाएंगे, यहां तक कि वे फंदे में फंस कर पकड़े जाएंगे।”

16इस साक्षी को सुरक्षित रखो, और व्यवस्था पर मेरेे शिष्यों के लिए छाप लगा दो।

17मैं तो यहोवा की बाट जोहता रहूँगा जिसने अपना मुख याकूब के घराने से छिपा लिया है; मैं उसी की आस लगाए रहूंगा।

18देख, मैं और जो बच्चे यहोवा ने मुझे दिए हैं, सिय्योन पर्वत पर निवास करने वाले यहोवा की ओर से इस्राएल में चिह्न और चमत्कार के लिए है।

19और जब वे तुमसे कहें कि तुम बुदबदाने और फुसफुसाने वाले टोनों और भूत-प्रेत के साधकों से पूछो, तब क्या लोगों को नहीं चाहिए कि वे अपने परमेश्वर से ही पूछें? क्या जीवितों के लिए मुर्दों से पूछना चाहिए?

20व्यवस्था और साक्षी पर ध्यान दो! यदि वे लोग इस वचन के अनुसार न बोलें तो उनके लिए पौ न फटेगी।

21वे देश में भूखे और फटे-हाल घूमते फिरेंगे, और जब वे भूखे होंगे, तब वे क्रोध में आकर अपने मुख आकाश की ओर उठाएंगे और अपने राजा तथा परमेश्वर को शाप देंगे।

22तब वे पृथ्वी की ओर दृष्टि करेंगे, और उन्हें संकट तथा अन्धकार अर्थात् निराशा की वेदना दिखाई पड़ेगी; और वे अन्धकार में ढकेल दिए जाएंगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)