पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 7 / 66
यशायाह 7
1फिर ऐसा हुआ कि योताम के पुत्र, उज्जियाह के पोते यहूदा के राजा आहाज के दिनों में आराम के राजा रसीन और इस्राएल के राजा रमल्याह के पुत्र पेकह ने यरूशलेम से युद्ध करने के लिए चढ़ाई की, परन्तु उस पर विजय न पा सके।
2जब यह समाचार दाऊद के घराने को दिया गया कि सीरिया के लोगों ने एप्रैम से संधि की है तो उसका हृदय और उसकी प्रजा का हृदय ऐसे कांप उठा जैसे जंगल के वृक्ष आंधी से कांप उठते है।
3तब यहोवा ने यशायाह से कहा, “तू अपने पुत्र शार्याशूब को लेकर ऊपर वाले पोखर की नाली के सिरे पर धोबी-घाट के मार्ग पर आहाज से भेंट करने के लिए जा,
4और उस से कह, ‘सावधान हो, शान्त रह और भयभीत न हो तथा इन दो धुआं देती लुआठियों अर्थात् रसीन और सीरिया तथा रमल्याह के पुत्र के भड़के हुए कोप के कारण तेरा मन कच्चा न हो।
5क्योंकि सीरिया ने एप्रैम और रमल्याह के पुत्र के साथ मिलकर तेरे विरुद्ध बुराई की योजना यह कहकर बनाई है,
6“आओ, हम यहूदा पर चढ़ाई करके उसे आतंकित करें और अपने लिए उसकी शहरपनाह में दरार करके उसके मध्य ताबेल के पुत्र को राजा ठहरा दे।”
7इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता है, “यह युक्ति न तो सफल होगी और न पूरी।
8क्योंकि सीरिया का सिर तो दमिश्क और दमिश्क का सिर रसीन रहेगा। आगामी पैंसठ वर्षों के अन्दर एप्रैम का बल ऐसा टूट जाएगा कि वह जाति बनी न रहेगी,
9एप्रैम का सिर सामरिया, तथा सामरिया का सिर रमल्याह का पुत्र रहेगा। यदि तुम विश्वास न करोगे तो स्थिर भी न रहने पाओगे।”
10तब यहोवा ने आहाज से पुनः कहा,
11“अपने परमेश्वर यहोवा से अपने लिए कोई चिह्न मांग, चाहे वह अधोलोक जैसा गहरा या आकाश जैसा ऊंचा हो।”
12परन्तु आहाज ने कहा, “मैं न तो मांगूंगा, और न यहोवा की परीक्षा लूंगा!”
13तब उसने कहा, “हे दाऊद के घराने, सुन। क्या मनुष्यों को उकता देना छोटी बात समझ कर अब तुम मेरे परमेश्वर को भी उकता दोगे?
14इसलिए प्रभु आप ही तुम्हें एक चिह्न देगाः देखो, एक कुंवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी।
15जब तक वह बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना न जाने तब तक वह दही और मधु खाएगा।
16क्योंकि इससे पूर्व कि वह लड़का बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना जाने, वह देश जिसके दोनों राजाओं से तू आतंकित है, निर्जन हो जाएगा।
17यहोवा तुझ पर, तेरी प्रजा पर और तेरे पिता के घराने पर ऐसे दिनों को ले आएगा कि जब से एप्रैम यहूदा से अलग हो गया, तब से वैसे दिन कभी नहीं आए-अर्थात् अश्शूर के राजा के दिन।”
18और उस दिन ऐसा होगा कि यहोवा उन मक्खियों को जो मिस्र की नदियों के दूरस्थ मुहानों पर रहती हैं, और उन मधुमक्खियों को जो अश्शूर देश में रहती हैं, सीटी बजाकर बुलाएगा।
19और वे सबकी सब आकर इस देश के पहाड़ी नालों में और चट्टानों की दरारों में, और सब कंटीली झाड़ियों में तथा पानी के सब स्थानों पर बैठ जाएंगी।
20उसी दिन यहोवा महानद के पार वाले क्षेत्रों के भाड़े के उस्तरे अर्थात् अश्शूर के राजा के द्वारा सिर और पैरों के बाल साफ करेगा और उससे दाढ़ी भी मूड़ी जाएगी।
21उस दिन ऐसा होगा कि मनुष्य एक बछिया और भेड़ के एक जोड़े को ही पालेगा।
22और ऐसा होगा कि दूध की बहुतायत के कारण वह दही खाएगा, और उस देश में जितने लोग बचे रहेंगे वे दही और मधु खाएंगे।
23उस दिन ऐसा होगा कि जिन जिन स्थानों में हजार दाखलताएं होती थीं जिनका मूल्य चांदी के हजार सिक्कों के बराबर था; उन स्थानों में कँटीले झाड़-झंखाड़ ही होंगे।
24लोग वहां तीर और धनुष लेकर जाएंगे क्योंकि सारे देश में कंटीले झाड़-झंखाड़ होंगे।
25और जिन पहाड़ियों पर कुदाल से खोदकर खेती की जाती थी लोग वहां झाड़-झंखाड़ के भय से नहीं जाएंगे, परन्तु वे गाय-बैलों के चरने तथा भेड़-बकरियों के रौंदने के स्थान हो जाएंगे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)